रिश्तों की दरार भरने में मददगार साबित हो सकती है साइकोथेरपी

कई बार हमारी लाख कोशिश के बाद भी घर में तनाव बढ़ता जाता है और रिश्तों में दरारें आने लगती हैं। अगर आप भी इस तरह की किसी समस्या से जूझ रहे हैं तो साइकोथेरपी आपके लिए मददगार साबित हो सकती है।
हमारे देश में साइकॉलजिकल माइंडेट की कमी है। उसकी वजह से लोग डिप्रेशन, एंग्जाइटी या तरह की दूसरी बीमारियों को साइकॉलजिकल सिकनेस ना समझकर फिजिकल डिजीज समझते हैं। साइकॉलजिकल माइंडेट की कमी के कारण यह स्थिति बहुत दुविधाजनक होती है। कई बार हम समझ नहीं पाते कि आखिर हमारे रिश्ते में समस्या क्या है। हो सकता है कोई एक पार्टनर किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहा हो…। अगर आप चाहकर भी अपने रिश्ते में आ रही दरारों को नहीं भर पा रहे हैं तो साइकाट्रिस्ट या काउंसलर की मदद ले सकते हैं क्योंकि ये जो थेरपीज देते हैं, वे रिश्तों को सुधारने में आपकी मदद कर सकती हैं। कई बार दवाइयों से अधिक रिश्तों को सुधारने में इन थेरपीज का रोल होता है बेहद अहम…
साइकोथेरपी कई तरह की होती हैं लेकिन इन सभी का मेन मोटिव पेशंट के डिप्रेशन का मुख्य कारण जानना होता है। इन थेरपीज के दौरान एक्सपर्ट्स आपको अपने विचारों और सोच के उन कारणों पर कंट्रोल करना सिखाते हैं, जो आपको अवसाद में थकेल रहे होते हैं। साइको थेरपी कई अलग-अलग तरह से भी की जाती है। इन्हें कॉन्गेटिव विहेवियर थेरपी के नाम से जाना जाता है। कॉग्नेटिव विहेवियर थेरपी में मुख्य रूप से ये थेरपी शामिल होती हैं…
व्यक्तिगत थेरपी- इस थेरपी के दौरान एक्सपर्ट केवल पेशंट की थेरपी करता है। उसी से बातचीत करके उसकी परेशानी वजह जानने की कोशिश करता है।
ग्रुप थेरपी- इस थेरपी के दौरान एक्सपर्ट दो या अधिक पेशंट्स की एक साथ साइकोथेरपी करता है। यह इस मायने में मददगार साबित हो सकता है कि आप जिन परेशानियों से घिरे हुए हैं और सोच रहे हैं कि केवल आपके साथ ही यह सब हो रहा है तो ऐसा नहीं है। दुनिया में हजारों लोग इसी समस्या से गुजर रहे हैं।
कपल थेरपी- इस थेरपी में पति-पत्नी को साथ में बैठाकर थेरपी दी जाती है। ताकि पार्टनर अपने साथी की समस्या को समझ सके और जान सके कि उसके डिप्रेशन की वजह क्या है। उन्हें सिखाया जाता है कि किस तरह वे अपने वर्ड्स और एक्शन के जरिए अपने पार्टनर को डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद कर सकते हैं।
फैमिली थेरपी- इस थेरपी के दौरान परिवार के सदस्यों को यह समझने में मदद की जाती है कि डिप्रेशन आपको किस तरह प्रभावित कर रहा है और वे लोग इससे बाहर आने में किस तरह आपकी मदद कर सकते हैं। हालांकि थेरपिस्ट पेशंट की कंडीशन के हिसाब से थेरपी सिलेक्ट करते हैं। हो सकता है कि आपके थेरपिस्ट कई तरह की थेरपीज को एक साथ लेकर आपका ट्रीटमेंट करे।
-एजेंसियां

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