RSS के स्थापना दिवस पर VHP व बजरंग दल के कार्यक्रम आयोजि‍त

मथुरा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)के स्थापना दिवस एवं विजयदशमी के पावन पर्व पर विश्व हिंदू परिषद मथुरा महानगर द्वारा दीनदयाल नगर शिशु मंदिर पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मथुरा महानगर अध्यक्ष अमित जैन ने बताया कि शारदीय नवरात्र के अगले दिन यानी दशमी को विजयादशमी का पर्व बुराई और असत्य पर अच्छाई और सत्य की विजय के उपलक्ष में मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी। यह त्योहार भारतीय संस्कृति के वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा हमें देता है।

मंत्री अजय कुमार सिंह द्वारा उल्लेख किया गया की आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी अर्थात विजयादशमी के दिन शास्त्र के साथ साथ शस्त्र की भी पूजा की जाती है तथा आज के दिवस विक्रमी संवत 1982 (27 सितंबर 1925) के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना परम पूजनीय गुरुदेव डॉ केशव राव बलिराम हेडगेवार जी ने नागपुर महाराष्ट्र में की थी। राष्ट्र यानी भारत, विषम परिस्थितियों से जूझ रहा था भविष्य के दूरगामी चिंतन की बड़ी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए डॉ हेडगेवार ने आर एस एस की स्थापना की। संघ के स्वयंसेवकों का देश की आजादी में बड़ा योगदान रहा परंतु अपने स्वभाव के अनुसार अपने योगदान का बखान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी नहीं किया।

बजरंग दल संयोजक विकास दीक्षित ने बताया कि सन 1947 भारत देश को विभाजन के साथ स्वतंत्रता प्राप्त हुई। प्रथम गृह मंत्री के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश में संवैधानिक लोकतंत्र को स्थापित करने के लिए पूरे भारतवर्ष की लगभग 562 रियासतों का विलय भारत सरकार में कराया। आज के भारत के स्वरूप की चर्चा और समीक्षा बहुत जरूरी है। रियासतों का भारत सरकार में विलय उसी वंशवाद और परिवारवाद की स्वार्थी मानसिकता को हटाना था जिस को तोड़ने के लिए डॉ हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी।

सह मंत्री गोकुलेश गौतम ने विस्तार से बताया कि ऐसा संभव तो हो सकता है कि किसी राजा का पुत्र उस राजा के समान योग्यता रखता हो परंतु यह निश्चित नहीं है कि प्रत्येक राजा का पुत्र एक कुशल राजा के समान योग्यता रखता हो। और ऐसी स्थिति को अंग्रेजों के जाने के बाद भी भारत की जनता ने स्वतंत्र भारत में 65 वर्ष से अधिक के कालखंड में झेला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चार पीढ़ियों के लंबे संघर्ष के बाद आज भारत की सत्ता उस परिवार वाद से बाहर दिखाई देती है। जिसने इस देश के अहित का कोई मार्ग रिक्त नहीं छोड़ा।

कार्यक्रम में सभी कार्यकर्ताओं द्वारा यह प्रण लिया गया कि वह स्वदेशी वस्तुओं का ही प्रयोग एवं उपयोग करेंगे तो निश्चित ही यह हमारे स्वदेशी एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र के प्रति सच्ची श्रद्धा एवं समर्पण होगा और विजयादशमी का अर्थ भी सार्थक सिद्ध होगा।

कार्यक्रम में विभाग संयोजक विवेक सिंह, सत्संग प्रमुख गिरिराज किशोर अग्रवाल, मोहित नौहबार, दीपक कुमार आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
– Legend News

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