नेपाल के चुनाव आयोग से प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बड़ी राहत

काठमांडू। नेपाल के चुनाव आयोग ने नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के अध्‍यक्ष पुष्‍प कमल दहल ‘प्रचंड’ को बड़ा झटका दिया है। चुनाव आयोग ने अपने फैसले में नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के दोनों ही धड़ों को आध‍िकारिक मान्‍यता देने से इंकार कर दिया है।
चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद से हटाए जाने और पार्टी से निकाले जाने को भी खारिज कर दिया है जिससे उन्‍हें बड़ी राहत मिली है। आयोग ने कहा कि कानूनी रूप से दोनों ही धड़े एक हैं।
रविवार को चुनाव में आयोग में हुई एक बैठक में दोनों पक्षों के असली पार्टी होने के दावे को स्‍वीकार नहीं किए जाने का फैसला लिया गया। इससे पहले प्रचंड और ओली दोनों की धड़ों ने एक याचिका दायर करके आयोग के समक्ष खुद को आधिकारिक पार्टी बताया था। इस बीच चुनाव आयोग के प्रवक्‍ता राजकुमार श्रेष्‍ठ ने कहा कि यह फैसला दोनों ही दलों के दावों को देखते हुए लिया गया है।
‘ओली को पार्टी की सदस्‍यता से हटाना स्‍‍वीकार नहीं’
आयोग ने कहा कि वह केपी ओली और प्रचंड के नेतृत्‍व वाली 441 सदस्‍यीय सेंट्रल कमेटी को मान्‍यता देता है। उसने यह भी कहा कि वह ओली और प्रचंड के एकजुटता वाली पार्टी नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी को मान्‍यता देता है जिसके ये दोनों अध्‍यक्ष हैं। नेपाली चुनाव आयोग ने कहा कि वह प्रचंड और माधव कुमार नेपाल के धड़े के ओली को पार्टी की सदस्‍यता से हटाने और माधव कुमार नेपाल को नया पार्टी अध्‍यक्ष बनाए जाने के फैसले को स्‍वीकार नहीं करेगा।
नेपाली चुनाव आयोग के इस फैसले के बाद नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के दोनों ही धड़ों को अब मध्‍यावधि चुनाव में जाने के लिए एक नई पार्टी के रूप में रजिस्‍टर कराना होगा। इससे पहले सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ के नेतृत्व वाले गुट ने रविवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पार्टी की सदस्यता से निष्कासित कर दिया। द हिमालयन टाइम्स की खबर के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड और माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाले गुट की स्थाई समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
चीन समर्थक प्रचंड को करारा झटका लगा
इससे पहले ओली पार्टी आलाकमान को अपने हालिया फैसलों के बारे में स्पष्टीकरण देने में विफल रहे थे। प्रचंड के नेतृत्व वाले गुट ने सोमवार को प्रधानमंत्री के बलुवातार स्थित आवास पर एक पत्र भेजा था। इससे पहले अलग हुए गुट ने ओली को पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया था। नेपाल में ताजा राजनीतिक विवाद की शुरुआत 20 दिसंबर को हुई थी जब ओली ने संसद को भंग कर दिया था। चुनाव आयोग के ताजा फैसले से चीन समर्थक प्रचंड को करारा झटका लगा है जो ओली को पार्टी से निकालना चाहते थे।
-एजेंसियां

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