ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से मुकाबले के लिए नेशनल रिटेल फ्रेमवर्क की तैयारी

नई दिल्‍ली। छोटी किराना दुकानों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से मुकाबला करने में मदद करने के लिए सरकार नेशनल रिटेल फ्रेमवर्क तैयार कर रही है।
योजना के तहत रिटेलर्स को वन-टाइम रजिस्ट्रेशन फीस, वर्किंग कैपिटल के लिए सॉफ्ट लोन और इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। सरकारी अधिकारियों ने बताया, ‘एक नेशनल फ्रेमवर्क पर काम शुरू हुआ है, जिसे राज्य अपना सकते हैं।’
DPIIT ने स्टोर की संख्या बताने को कहा
रिटेल से जुड़े मामले राज्य सरकार के अंतर्गत आते हैं। सभी राज्यों ने सेक्टर को लेकर अलग-अलग पॉलिसी अपना रखी है। फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) ने राज्यों से ऐसे स्टोर की संख्या बताने को कहा है।
जीडीपी में लोकल ट्रेड की 15% हिस्सेदारी
देश की 2.7 लाख करोड़ डॉलर की GDP में लोकल ट्रेड की 15 पर्सेंट हिस्सेदारी है। देश में छह करोड़ से अधिक बिजनेस एंटरप्राइजेज हैं। अनुमान के मुताबिक डोमेस्टिक ट्रेड से 25 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है और यह आंकड़ा हर साल 15 पर्सेंट बढ़ रहा है। ज्यादातर राज्यों में दुकानों से जुड़े नियम हैं, जिनके तहत स्टोर को रजिस्टर किया जाता है। हर राज्य में रजिस्ट्रेशन पॉलिसी, फीस और अन्य कायदे अलग हैं। कुछ राज्यों में सालाना तो कुछ में हर साल पर दुकानों को रजिस्ट्रेशन कराना होता है।
किराना दुकानों की लागत घटाएगी सरकार
सरकार नेशनल पॉलिसी के जरिए नियमों को आसान, समान और कम जटिल बनाने और किराना दुकानों पर कॉस्ट का भार घटाने की कोशिश कर रही है। सूत्र ने बताया कि फ्रेमवर्क में लाइफटाइम रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन एनरोलमेंट की सुविधा मुहैया कराने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारी ने बताया, ‘हम छोटे दुकानदारों की परेशानियों को समझने और उनका समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं। हम उनके लिए सॉफ्ट लोन, डिजिटल पेमेंट मैकेनिज्म जैसी सुविधाओं पर भी विचार कर रहे हैं।’
CAIT ने संभाला मोर्चा
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेड (CAIT) के सेक्रेटरी जनरल प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक लगभग 65 पर्सेंट स्टोर ऐसे हैं, जिनका डिजिटलीकरण नहीं हुआ है। ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ रिटेलर्स की शिकायतों का मोर्चा CAIT ने संभाला है। इसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर डिस्काउंट के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। हालांकि, ई-कॉमर्स फर्मों ने आरोपों को खारिज किया है।
राज्य बन सकते हैं कर्ज के गारंटर
नेशनल पॉलिसी के तहत सरकार और रिटेलर ग्रुप्स के बीच राज्य को कर्ज का गारंटर बनाने पर भी चर्चा हुई है। इससे बैंकों को दुकानदारों को कम ब्याज दर पर लोन देने में मदद मिलेगी। कर्ज देने की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों में भी कटौती होगी। अधिकारी ने बताया कि DPIIT नैशनल ट्रेडर वेलफेयर बोर्ड का दायरा भी बढ़ा रहा है। रिटेल कम्युनिटी के भले के लिए सरकार ने पहले ही दुकानदारों, रिटेल ट्रेडर्स और स्वरोजगार करने वालों के लिए पेंशन स्कीम को मंजूरी दे दी है। 60 साल की उम्र होने पर उन्हें 3,000 रुपये की मंथली पेंशन मिलेगी।
-एजेंसियां

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