एमपी में एक बार फिर सियासी उठापटक शुरू, सेंधमारी जारी

भोपाल। एमपी में एक बार फिर से सियासी उठापटक शुरू हो गई है। बीते 10 दिनों के अंदर कांग्रेस के 2 विधायकों ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की है जबकि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने दावा किया था कि कुछ और विधायक कतार में हैं। मार्च में कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ की सरकार गिर गई थी। अब बीजेपी ने एक रणनीति के तहत कमलनाथ और दिग्विजय के खेमे के बाद अरुण यादव के खेमे में सेंधमारी शुरू कर दी है।
दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बीजेपी में आए 22 विधायकों में से कुछ कांग्रेस के दूसरे गुट के भी थे। बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह डंग जैसे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के नहीं थे। अब जुलाई में कांग्रेस के दो विधायक इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए हैं, जिसमें प्रद्युमन सिंह लोधी और सुमित्रा देवी हैं।
अरुण यादव खेमे की थीं सुमित्रा
अब एमपी में बीजेपी ने कांग्रेस के तीसरे खेमे में भी सेंधमारी शुरू कर दी है। 2 दिन पहले बीजेपी में शामिल हुईं सुमित्रा देवी को अरुण यादव के प्रयासों के कारण 2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिला था। सुमित्रा राजनीति में नया चेहरा है। वो विधायक बनने से पहले तक सिर्फ जनपद सदस्य रही हैं। वो अरुण यादव के नाम पर ही राजनीति करती थीं। उनके पति वेटनरी विभाग में हैं। सुमित्रा देवी बुरहानपुर जिले में कांग्रेस की इकलौती विधायक थीं। सुमित्रा कास्डेकर के इस्तीफा देने के बाद जिले में कांग्रेस की एकमात्र सीट भी चली गई है।
ये है इनसाइड स्टोरी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सुमित्रा देवी के बीजेपी में आने की पटकथा सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया ने लिखी थी।
भदौरिया की भूमिका ऑपरेशन लोट्स के दौरान भी महत्वपूर्ण थी। 22 विधायकों के साथ वह बेंगलुरू में भी डटे हुए थे। जानकारी के अनुसार 6 महीने से सुमित्रा बीजेपी नेताओं के संपर्क में थीं। भदौरिया ने ही सुमित्रा देवी की बात सीएम शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा से कराई थी।
हर गुट में सेंधमारी की कोशिश
एमपी में कांग्रेस की सरकार गुटबाजी की वजह से ही गई है। कांग्रेस प्रदेश में अलग-अलग गुटों में बंटी है। हर गुट एक-दूसरे को निपटाने में लगा रहता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफा देने के बाद कमलनाथ, दिग्विजय सिंह का खेमा एक्टिव है। इसके साथ ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव का खेमा भी सक्रिय है। तत्कालीन कमलनाथ की कैबिनेट में अरुण यादव के खेमे से उनके छोटे भाई सचिन यादव सरकार में मंत्री थे। लेकिन भाजपा ने दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बाद अब अरुण यादव के खेमे में भी सेंध लगा दी है।
बीजेपी ने किस-किस को दिया झटका
मंदसौर जिले के सुआवसरा सीट से कांग्रेस के विधायक रहे हरदीप सिंह डंग कमलनाथ के गुट में थे लेकिन सरकार में उन्होंने तवज्जो नहीं मिल रही थी। तख्तापलट के दौरान डंग ने पाला बदल लिया है और सिंधिया समर्थकों के साथ बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली। अब शिवराज सरकार में हरदीप सिंह डंग मंत्री हैं।
वहीं, कांग्रेस के विधायक रहे एंदल सिंह कंषाना और बिसाहू लाल सिंह वरिष्ठ नेता थे। दोनों दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते थे। कमलनाथ की सरकार में बिसाहूलाल सिंह वरिष्ठ होने के बावजूद उपेक्षित महसूस कर रहे थे। उन्होंने भी मार्ट में पाला बदलकर बीजेपी की सदस्यता ले ली। बिसाहूलाल सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। शिवराज कैबिनेट में दोनों मंत्री हैं।
कांग्रेस के अंदर से उठी आवाज
कांग्रेस में अभी भगदड़ मची हुई है। ऐसे में पार्टी के अंदर से भी आवाज उठने लगी है। पूर्व वन मंत्री उमंग सिंघार ने सुमित्रा देवी के इस्तीफे पर राहुल और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए ट्वीट किया है कि आज का वक्त खुद को नेता बनाने का नहीं, पार्टी और संगठन को मजबूत करने का वक्त है। साथ ही उन्होंने इसे राजस्थान की राजनीति से भी जोड़ा है।
वहीं, सुमित्रा देवी के इस्तीफे पर कांग्रेस नेता अरुण यादव ने कहा है कि मुझे दोपहर में अचानक पता चला जब इस्तीफा हो गया। नाराजगी जैसी या अन्य कोई बात नहीं थी। 4 दिन पहले कांग्रेस के कार्यक्रम में शामिल हुई थीं। बड़े पैमाने पर हॉर्स ट्रेडिंग चल रही है। जिसमें नए विधायकों पर दांव चला जा रहा है।
सीएम शिवराज ने किया वेलकम
सीएम शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में सुमित्रा देवी ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। सीएम ने कहा था कि नेपानगर से विधायक पद से इस्तीफा देकर जनसेवा के लक्ष्य के साथ बीजेपी की सदस्यता लेने वाली बहन सुमित्रा देवी कासडेकर का हार्दिक स्वागत करता हूं। कांग्रेस आज एक डूबता जहाज़ बन गई है। क्षेत्र का विकास और जनता की भलाई का कार्य करने वाले जनप्रतिनिधि की वहां कोई सुनवाई नहीं है।
-एजेंसियां

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