पीएम मोदी ने बताया, किस प्रकार किसानों के लिए लाभकारी हैं नए कृषि कानून

नई दिल्‍ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में जारी किसान संगठनों के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर किसानों से अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार कई सेक्‍टर्स के बीच खड़ी दीवारें हटा रही है। औद्योगिक संगठन FICCI की 93वीं सालाना आम बैठक (AGM) में मोदी ने ताजा कानूनों के बारे में कहा कि ‘इन रिफॉर्म्स के बाद किसानों को नए बाजार मिलेंगे, नए विकल्प मिलेंगे, टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा, देश का कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगा।’
हजारों की संख्‍या में किसान इन नए कानूनों के खिलाफ दिल्‍ली में पिछले दो हफ्ते से भी ज्‍यादा समय से आंदोलनरत हैं। सरकार ने उनसे कई दौर की बातचीत के बाद कुछ संशोधन का प्रस्‍ताव दिया था मगर वे तीनों कानूनों को वापस लेने से कुछ भी कम पर तैयार नहीं है। केंद्र सरकार एक बार फिर से किसान संगठनों से बातचीत की कोशिश में है। इस बीच पीएम मोदी ने शनिवार को फिर किसानों को नए कृषि कानूनों के फायदे गिनाए।
कृषि क्षेत्र में आएगा सबसे ज्‍यादा निवेश: पीएम मोदी
एग्रीकल्चर सेक्टर और उससे जुड़े अन्य सेक्टर जैसे एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर हो, फ़ूड प्रोसेसिंग हो, स्टोरेज हो, कोल्ड चैन हो इनके बीच हमने दीवारें देखी हैं। अब सभी दीवारें हटाई जा रही हैं, सभी अड़चनें हटाई जा रही हैं। इन रिफॉर्म्स के बाद किसानों को नए बाजार मिलेंगे,नए विकल्प मिलेंगे, टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा, देश का कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगा। इन सबसे कृषि क्षेत्र में ज्यादा निवेश होगा। इन सबका सबसे ज्यादा फायदा मेरे देश के किसान को होने वाला है।
कारोबारियों से गांव में निवेश की अपील
पीएम मोदी ने ग्रामीण इलाकों में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए पिछले दिनों लॉन्‍च ‘पीएम-वाणी’ योजना का भी जिक्र किया। उन्‍होंने कहा, “पीएम-वाणी योजना के तहत देशभर में सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्‍पॉट्स का नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इससे गांव-गांव में कनेक्टिविटी का व्यापक विस्तार होगा।” उन्‍होंने एजीएम में मौजूद कारोबारियों से अपील कि वे ग्रामीण इलाकों में निवेश करें।
मोदी ने कहा, “मेरा आपसे आग्रह है कि रूरल और सेमी रूरल क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी की इन प्रयासों में भागीदार बनें। ये निश्चित है कि 21वीं सदी के भारत की ग्रोथ को गांव और छोटे शहर ही सपोर्ट करने वाले हैं। आप जैसे आंत्रप्रेन्‍योर्स को गांव और छोटे शहरों में निवेश का मौका बिल्कुल नहीं गंवाना चाहिए।”
दरअसल, कृषि सुधार कानूनों के विरोध में दिल्ली सीमा पर आधे महीने से डटे किसानों को मनाने के लिए सरकार लगातार हर जुगत लगा रही है। किसानों के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कानून वापसी पर अड़े किसान संशोधन पर मानने को तैयार नहीं हैं। किसानों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सरकार की तरफ से अब विज्ञापन का सहारा भी लिया जा रहा है।
सरकार को समझाने की इसी कोशिश के तहत कृषि मंत्रालय ने एक देश के प्रमुख अखबारों में विज्ञापन निकाला है, इसमें पीएम मोदी किसान का हाथ थामे हुए हैं। इसमें कृषि काननू के फायदे समझाए गए हैं।
सच और झूठ की लिस्ट भी दे दी गई
इसके साथ ही सरकार की तरफ से कृषि कानूनों पर सच और झूठ की लिस्ट भी दे दी गई है। कृषि मंत्रालय के इस ऐड में सरकार ने अपनी इस बात को दोहराया है एमएसपी को खत्म नहीं किया जाएगा।
किसान आंदोलन के बीच सरकार ने खरीदा पिछले साल से 22% ज्यादा धान
इस बीच केंद्र सरकार ने बताया है कि मौजूदा खरीफ विपणन सत्र में अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान की खरीद पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 22.5 प्रतिशत बढ़कर 368.7 लाख टन तक पहुंच गई है। यह खरीद 69,612 करोड़ रुपये में की गई। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि अक्टूबर 2020 से शुरू हुये मौजूदा खरीफ विपणन सत्र 2020- 21 में सरकार लगातार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीफ फसलों की खरीदारी कर रही है।
इसमें कहा गया है कि पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, चंडीगढ़, जम्मू कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, ओडीशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में 2020-21 खरीफ सत्र की सरकारी खरीद लगातार सुनियोजित ढंग से चल रही है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्यों की अन्य एजेंसियों ने 10 दिसंबर 2020 तक 368.7 लाख टन धान की खरीद कर ली है, जबकि इसी अवधि तक पिछले साल 300.97 लाख टन धान की खरीद की गई थी।
-एजेंसियां

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