प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेन्स के जरिए किया गरीब कल्याण रोजगार अभियान का शुभारंभ

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली गरीब कल्याण रोजगार अभियान का शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेन्स के जरिए शुभारंभ किया।
इस योजना के माध्यम से कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान अपने राज्य लौटे लाखों प्रवासी मजदूरों को रोजगार दिया जाएगा।
इस दौरान पांच राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा के मुख्यमंत्री मौजूद रहे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी मौजूद रहे। इसके अलावा योजना से संबंध रखने वाले मंत्रालयों के केंद्रीय मंत्री भी इसमें शामिल हुए।
पीएम ने बिहार रेजीमेंट की तारीफ की
इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि लद्दाख में हमारे वीरों ने जो बलिदान दिया, आज जब मैं बिहार के लोगों से बातकर रहा हूं तो ये कहना चाहूंगा कि ये पराक्रम बिहार रेजीमेंट का है। हर बिहारी को इस पर गर्व होना चाहिए। जिन लोगों ने बलिदान दिया है, उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। उनके परिजनों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि ये देश आपके साथ है। देश सेना के साथ है।
पीएम मोदी ने बाहर से लौटे लोगों से की बात
खगड़िया जिले के डीएम आलोक रंजन घोष ने पीएम मोदी का स्वागत किया। बेलदौर प्रखंड के तेलिहर गांव के मुखिया अजय ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान जो अच्छी व्यवस्था की गई, उसके लिए मैं पीएम का धन्यवाद करता हूं। पीएम के पूछने पर मुखिया ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान करीब 475 लोग तेलिहर गांव लौटे, जिनके लिए सारी व्यवस्थाएं की गई। इसके लिए पीएम ने मुखिया को धन्यवाद किया।
सीता नाम की गांव की एक महिला से पीएम ने पूछा कि कहां तक शिक्षा हुई। इस पर सीता ने बताया कि वह इंटर तक शिक्षित हैं। लॉकडाउन के दौरान सीता अपने पति के साथ दिल्ली में थी। काम बंद होने पर पूरा परिवार श्रमिक ट्रेन से गांव लौटी। पीएम ने सीता से पूछा आपकी कोई शिकायत नहीं है मेरे लिए। पीएम के पूछने पर सीता ने बताया कि वह मधुमक्खी पालन के लिए सोच रही हैं। हमारा देश मोम और मधु दोनों बाहर से लाता है। अगर आप यह काम शुरू करेंगी तो देश का भला होगा।
हरियाणा के गुरुग्राम से बिहार लौटे जर्नादन ने बताया कि वह राज मिस्त्री हैं। जर्नादन ने बताया कि वह 12 साल से गुरुग्राम में काम करते थे। जर्नादन ने बताया कि ट्रेन में काफी अच्छी सुविधा थी। पीएम के पूछने पर जर्नादन ने बताया कि अब गांव में ही नाली-गली का काम मिल गया है। पीएम ने बताया कि इस योजन में मजदूर कम हो जाएंगे।
चंदन नामक शख्स ने पीएम को बताया कि राजस्थान के अजमेर में सात महीने से थे। उसके पहले आसाम में थे। चंदन टावर लगाने का काम करते हैं। चंदन ने बताया कि लॉकडाउन में फ्री में अनाज मिलने से काफी मदद मिली। पीमएम ने बताया कि टॉवर लगाने का काम 21वीं सदी के लिए काफी उपयोगी है। पीएम मोदी ने कहा कि इस योजना से आप जैसे कुशल लोगों से काफी भला होगा।
गरीब कल्याण रोजगार अभियान के लिए नीतीश ने पीएम की तारीफ की
इससे पहले योजना के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मैं गरीब कल्याण रोजगार अभियान के लिए पीएम मोदी का धन्यवाद करता हूं। दूसरे राज्यों काम करने वाले बिहार के लोगों को काफी कष्ट हुआ। हमने करीब 21 लाख लोगों को एक-एक हजार रुपये दिए। केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई ट्रेन सेवा से करीब 20 लाख लोग बिहार लौटे। क्वारंटीन सेंटरों में आए लोगों से बातचीत में पता चला कि ये लोग बाहर नहीं जाना चाहते हैं तो हमने भी उन्हें घर पर ही रोजगार देने के बारे में सोचा है। केंद्र की योजना राहत देने वाली है। बिहार के 38 में से 32 जिलों का चयन रोजगार कल्याण योजना के लिए चुना गया है। इस योजना की शुरुआत के लिए खगड़िया जिले का चुनाव करने के लिए पीएम मोदी का धन्यवाद।
क्या है गरीब कल्याण रोजगार अभियान
इस अभियान के तहत सरकार ने छह राज्यों के 116 जिलों की पहचान की है। इन जिलों में करीब 67 लाख प्रवासी मजदूर वापस हुए हैं। इन 116 जिलों में बिहार में 32, उत्तर प्रदेश में 31, मध्य प्रदेश में 24, राजस्थान में 22, ओडिशा में 4 और झारखंड में 3 जिले शामिल हैं।
125 दिन रोजगार
ये 116 वो जिले हैं जहां 25 हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर वापस आए हैं। ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ के तहत साल में 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने की योजना है।
अभियान का बजट 50 हजार करोड़
सरकार ने ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ का बजट 50 हजार करोड़ रुपये रखा है। कामगारों को स्किल के हिसाब से 25 सरकारी स्कीम के काम दिए जाएंगे। इस अभियान को लागू करने से पहले सरकार ने स्किल मैपिंग की है। आत्मनिर्भर भारत में भी प्रवासी मजदूरों के लिए मनरेगा योजना में पहले ही 40 हजार करोड़ एक्स्ट्रा की घोषणा की जा चुकी है। इस साल मनरेगा का बजट बढ़कर अब 1 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट का होगा काम
वित्त मंत्री ने इस अभियान को लेकर कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत पैकेज का हिस्सा है। जब मजदूरों को काम मिलेगा तो उनके हाथ में पैसे आएंगे और वे खर्च कर अर्थव्यवस्था में गति लाने का काम करेंगे। इसके अलावा उनके स्किल का इस्तेमाल रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट में भी किया जाएगा।
ये काम कराएं जाएंगे
इस अभियान के तहत कम्युनिटी सैनिटाइजेशन कॉम्पलेक्स, ग्राम पंचायत भवन, वित्त आयोग के फंड के अंतर्गत आने वाले काम, नैशनल हाइवे वर्क्स, जल संरक्षण और सिंचाई, कुएं की खुदाई. पौधारोपण, हॉर्टिकल्चर, आंगनवाड़ी केंद्र, पीएमआवास योजना (ग्रामीण), पीएम ग्राम संड़क योजना, रेलवे, श्यामा प्रसाद मुखर्जी मिशन, पीएम KUSUM, भारत नेट के फाइबर ऑप्टिक बिछाने, जल जीवन मिशन आदि के काम कराए जाएंगे।
सरकार ने पहले तैयार कर ली है प्रवासी मजदूरों की लिस्ट
केंद्र सरकार का कहना है कि जो मजदूर श्रमिक स्पेशल या राज्य सरकार द्वारा अन्य तरीके से गांव वापस भेजे गए हैं, उनके नाम की सूची पहले से ही सरकार के पास है। उसी सूची के आधार पर उन्हें काम दिलवाया जाएगा। जो व्यक्ति किसी शहर से पलायन कर पैदल या किसी अन्य साधन से अपने गांव पहुंचे हैं, उनकी सूची भी संबंधित जिला के जिलाधिकारी ने तैयार कर लिया है। तब भी, आप एक बार अपना नाम उस सूची में चेक कर लें तो बेहतर होगा।
योजना के बारे में कहां लें जानकारी?
प्रवासी मजदूरों को अगर इस योजना के बारे किसी तरह की जानकारी चाहिए तो वे नजदीकी ग्राम पंचायत या विकास खंड कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।
ब्लॉक या तहसील कार्यालय में करें संपर्क
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, जो कि इस अभियान के लिए नोडल मंत्रालय बनाया गया है, के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस रोजगार अभियान में काम कराने से लेकर मजदूरी के भुगतान का काम, सब राज्य सरकार के अधिकारी ही करेंगे इसलिए काम पाने के इच्छुक व्यक्ति सीधे केंद्र सरकार से संपर्क साधने के बजाय अपने ब्लॉक या तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क में रहें।
-एजेंसी

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *