गहलोत के नकारा कहे जाने पर पायलट बोले, मेरे अपने संस्‍कार हैं इसलिए कमेंट नहीं करूंगा

नई दिल्‍ली। सीएम अशोक गहलोत की ओर से नकारा कहे जाने पर सचिन पायलट ने कहा है कि मैंने अपने परिवार से संस्कार पाया है। अगर किसी दूसरी पार्टी में मेरा कट्टर दुश्मन भी होगा तो मैं उनके लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं करूंगा। पायलट ने कहा कि राजनीति में बयान सोच समझकर देना चाहिए। शब्दों का चयन सही हो यह जरूरी है। अशोक गहलोत उम्र में मुझसे काफी बड़े हैं। व्यक्तिगत तौर पर मैंने हमेशा उनका सम्मान किया है लेकिन वर्किंग में अगर मुझे कुछ दिखेगा तो मैं उस पर विरोध जाहिर करूंगा, यह मेरा अधिकार है। हां… जिस प्रकार की टिका टिप्पणी हुई उस पर मैं कोई कमेंट करुं, यह ठीक नहीं है। बस इतना कहूंगा कि जो भी आरोप लगाए गए उसका सच सामने आ चुका है। सचिन पायलट ने कहा कि मैंने पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि मैं कांग्रेस में ही रहूंगा। हमने सबके सहयोग से सरकार बनाई। मुझे लगा कि सरकार और और संगठन मिलकर काम करेगी।
जयपुर लौटने से पहले सचिन पायलट ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह हमारे संगठन और पार्टी के लिए जरूरी था। राजनीति में द्वेष, ग्लानी, दुर्भावना की कोई जगह नहीं होती है। मैंने हमेशा कोशिश की है कि राजनीतिक संवाद हो, शब्दावली हो। बहुत सोच-समझकर अपनी बातों को रखना चाहिए। किसी व्यक्ति की बात नहीं है, सिद्धांतों की बात है। हम लोगों खासकर कार्यकर्ताओं का जो मान सम्मान होना चाहिए था हमने उसको लेकर इश्यू जाहिर किया था। हम जिन मुद्दों पर चुनाव जीतकर आए वह मेर सौभाग्य रहा।
पायलट ने कहा कि जब राज्य में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 21 रह गई थी तब मुझे राहुल गांधी ने पार्टी को राज्य में दोबारा खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसे मैंने बखूबी निभाया। मैंने पांच साल विपक्ष में रहते हुए धरना, प्रदर्शन, लाठी चार्ज, पुलिस घेराव, भूख हड़ताल का सामना करते हुए चुनाव में गए और कांग्रेस के 100 से ज्यादा विधायक जीतकर आए। ऐसे में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते मेरी जिम्मेदारी बनती थी कि कार्यकर्ताओं के मान सम्मान का ख्याल रखा जाए। उनकी मांगें मानी जाए। उनकी उम्मीदों पर खरा उतरें। कार्यकर्ताओं का ख्याल रखना पूरी पार्टी की जिम्मेदारी थी, लेकिन हमने डेढ़ साल में जो काम किए, उसमें कार्यकर्ताओं की बात को पूरा नहीं कर पा रहे थे इसलिए हमें लगा कि दिशा बदलनी चाहिए। अगर हम सरकार बनाने के बाद वादों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी पीड़ा पार्टी फोरम पर रखें। हमने राहुल और प्रियंका जी से बातचीत के दौरान इन सारी बातों को रखा। उन्होंने सारी बातें ध्यान से सुना और सारे वादों के निराकरण का आश्वासन दिया है।
गहलोत के बदले सुर
इससे पहले सीएम अशोक गहलोत के भी सुर बदले दिखे। मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि वह जब तक जिंदा रहेंगे वे अभिभावक बने रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि विधायकों की नाराजगी दूर करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरे पांच साल राजस्थान में सरकार चलाएगी। उनके इस बयान के साथ ही अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या सीएम गहलोत सीएम कुर्सी से विदा लेंगे क्योंकि उन्होंने ये नहीं कहा कि वे पांच साल सरकार चलाएंगे बल्कि उन्होंने ये कहा है कि कांग्रेस पांच साल सरकार चलाएगी।
सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी के नेताओं ने पूरा जोर लगा लिया, लेकिन हमारा एक आदमी भी टूट कर नहीं गया। बीजेपी ने हमारी सरकार को किसी भी कीमत पर गिराने का षड्यंत्र किया। इस माहौल के बीच भी हमारे एक भी विधायक उनके साथ नहीं गए। ऐसे में सोच सकते हैं कि उनके प्रति मेरी सोच क्या होगी। मैंने उनसे कहा है कि जब तक जिंदा रहूंगा आपका अभिभावक बनकर रहूंगा।
सीएम ने आगे कहा कि मेरा फर्ज बनता है कि सचिन पायलट को हाईकमान और मुझ पर भरोसा है। जिन लोगों ने नाराजगी जाहिर की है उसे दूर करना मेरी जिम्मेदारी है क्योंकि मैं मुख्यमंत्री हूं।
पायलट के सवाल को टाल गए गहलोत
सीएम से जब पूछा गया कि ये काम पहले भी हो सकता था तो इस पर उन्होंने कहा कि ये तो आप उन लोगों से बात कीजिए जिनकी वजह से ये सब हुआ है। सवाल को टालते हुए सीएम गहलोत ने कहा कि राजस्थान की जनता ने बीजेपी को हराया है। वे उनके बहकावे में नहीं आए। राजस्थान की जनता, हमारे कार्यकर्ता और हमारे विधायकों ने दिखा दिया है कि हम बीजेपी का मुकाबला कर सकते हैं। इनकम टैक्स, सीबीआई सबका दुरुपयोग हुआ है।
-एजेंसियां

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