कोरोना की जांच घर-घर कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों के घर-घर जाकर जांच कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट में चार वकीलों की ओर से अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि शहरों में संक्रमण ज्यादा है ऐसे में पहले शहर से ही शुरुआत की जाए और घर-घर से लोगों का सैंपल लिया जाए और कोरोना टेस्ट हो।

याचिका में आगे कहा गया है कि वायरस के इस “घातक प्रसार” को रोकने के लिए ” हर नुक्कड़ और कोने से ऐसा परीक्षण प्राथमिकता के साथ शुरू होना चाहिए जो राज्य और शहर सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हैं, यानी ‘कोरोना वायरस हॉटस्पॉट’ हैं। याचिकाकर्ताओं, तीन वकीलों शशावत आनंद, अंकुर आज़ाद और फ़ैज़ अहमद, और इलाहाबाद के एक कानून के छात्र सागर ने इस बात पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है कि भारत किस तरह महामारी से लड़ने का प्रयास कर रहा है, विशेष रूप से परीक्षण की कम दर के संबंध में ।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में हेल्थ मिनिस्ट्री, होम मिनिस्ट्री और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट को प्रतिवादी बनाया गया है। अर्जी में कहा गया है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि लोगों के घर-घर जाकर व्यापक पैमाने पर कोरोना टेस्ट किया जाए और जो भी संक्रमित व्यक्ति हैं उनकी पहचान की जाए और फिर उन्हें आईसोलेशन में रखा जाए और उनका इलाज कराया जाए। कोरोना महामारी के चेन को ब्रेक करने के लिए सबसे पहले शहरों में ये टेस्ट शुरू किया जाए। साथ ही कहा गया है कि पीएम रिलीफ फंड और चीफ मिनिस्टर रिलीफ फंड में जो रकम है उसे नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड बनाकर उसमें ट्रांसफर किया जाए जिसका महामारी से मुकाबले में इस्तेमाल हो।
सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि कोरोना वायरस बीमारी फैल रही है। ऐसे में सिर्फ संदिग्ध के टेस्ट तक टेस्टिंग को सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। बल्कि आम पब्लिक का कोरोना टेस्ट जरूरी है और जो भी संक्रमित हैं उन्हें अलग किया जाए। देश भर में लॉकडाउन किया गया है और जो भी संदिग्ध हैं उनका टेस्ट हो रहा है और जब तक मास टेस्ट नहीं होगा तब तक बात नहीं बनेगी। कोरोना के मरीज में लक्षण होते भी हैं और न भी होते हैं। जिन्हें लक्षण नहीं होते हैं कोरोना के वह कैरियर का काम करते हैं। ऐसे में मौजूदा टेस्टिंग प्रक्रिया पर्याप्त नहीं है और खतरा बकरार है। ऐसे टेस्टिंग में वो लोग छूट रहे हैं जिन्हें लक्षण नहीं है या ट्रैवल हिस्ट्री है लेकिन लक्षण नहीं हैं। पर्याप्त टेस्ट के अभाव में देश के 1.38 अरब लोगों की जिंदगी खतरे में है और इस तरह उनके जीवन और लिबर्टी का अधिकार प्रभावित हो रहा है।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *