NEET 2021 को स्थगित करने की याचिका हाई कोर्ट से खारिज

नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट NEET 2021 को स्थगित करने की मांग वाली याचिका हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। कर्नाटक हाई कोर्ट में 31 अगस्त के बाद नीट 2021 परीक्षा आयोजित करने के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा, केंद्र और एक्सपर्ट्स की सलाह के बाद लिया गया फैसला सही है इसलिए इसे बदला नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने कहा है कि केंद्र सरकार के 31 अगस्त के बाद परीक्षा आयोजित करने के फैसले को गलत नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह विशेषज्ञों की राय और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रयोग किए जा रहे विवेक के आधार पर लिया गया होगा।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, नीट 2021 का आयोजन 18 अप्रैल को होना था लेकिन कोरोना वायरस (COVID19) की दूसरी लहर के दौरान परीक्षा अगस्त तक स्थगित करने का फैसला लिया गया था। केंद्र और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का मानना था इस समय परीक्षा आयोजन छात्रों और स्टाफ के लिए सुरक्षित नहीं है इसलिए परीक्षा 31 अगस्त तक के लिए टाल दी गई थी लेकिन पीआईएल (PIL) में मांग की गई कि परीक्षा को 31 अगस्त के बाद तक टालना ठीक नहीं है, इससे उम्मीदवारों में तनाव बढ़ रहा है।
नीट परीक्षा को लेकर क्या थी मांग?
याचिकाकर्ता डॉ. विनोद के मुताबिक नीट-2021 का आयोजन 18 अप्रैल को होना था जिसके स्थगित होने से पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई करने के इच्छुक डॉक्टरों को तनाव, चिंता और अवसाद का शिकार होना पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि जब महामारी के दौरान अन्य सभी परीक्षाएं आयोजित की जा रही थीं तो NEET को स्थगित करने का कोई कारण नहीं था। हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल करते हुए मांग की कि एग्जाम डेट से चार महीने पहले और समय के लिए परीक्षा स्थगित नहीं करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
कौन हैं डॉ. विनोद कुलकर्णी?
याचिका जी बी कुलकर्णी मेमोरियल लीगल ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिसका प्रतिनिधित्व इसके अध्यक्ष डॉ. विनोद कुलकर्णी कर रहे हैं। डॉ. विनोद एक न्यूरो साइकेट्रिस्ट कंसलटेंट, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, उन्होंने 8 मई को जनहित याचिका दायर की थी।
इससे पहले केंद्र ने मई में नीट एंट्रेंस एग्जाम पोस्टपोंड करते हुए कहा था कि यह 31 अगस्त से पहले आयोजित नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने कहा था कि छात्रों को इसकी तैयारी के लिए कम से कम एक महीने का समय दिया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय COVID स्थिति की समीक्षा करने के बाद परीक्षाओं पर फैसला करेगा।
-एजेंसियां

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