2024 के आम चुनावों में लोगों को मिल सकता है रिमोट वोटिंग का विकल्प: मुख्य चुनाव आयुक्त

नई दिल्‍ली। 2024 में होने वाले आम चुनावों के दौरान में लोगों को रिमोट वोटिंग का विकल्प मिल सकता है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने आशा जताई है कि अगले आम चुनाव तक रिमोट वोटिंग का कन्सेप्ट संभव हो सकता है। अरोड़ा ने कहा कि रिमोट वोटिंग से जुड़ा पायलट प्रोजेक्ट अगले दो-तीन महीने में शुरू हो सकता है। चुनाव आयोग ने इस साल की शुरुआत में आईआईटी मद्रास, अन्य आईआईटी तथा अन्य प्रमुख संस्थानों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स के साथ विचार विमर्श कर से रिमोट वोटिंग को सक्षम बनाने के लिए एक रिसर्च प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी।
ब्लॉकचेन तकनीक पर हो रहा काम
ब्लाकचेन तकनीक पर आधारित इस परियोजना के बारे में पूर्व वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त संदीप सक्सेना ने साफ किया कि इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए वोटरों को पूर्व निर्धारित समयावधि के दौरान पहले से तय जगह पर पहुंचना होगा। ब्लॉकचेन एक तरह से सूचनाओं को रिकॉर्ड करने की प्रणाली है जो सिस्टम को बदलने, हैक या धोखा देने को मुश्किल या असंभव बना देती है। एक ब्लॉकचेन ट्राजेंक्शन का एक डिजिटल लेज़र है। इस तकनीक में डेटा किसी सेंट्रल सर्वर में स्टोर नहीं होता है बल्कि सैकड़ों, हजारों कम्प्यूटर्स में अलग-अलग होता है।
जल्द ही वोटिंग मॉडल को दिया जाएगा अंतिम रूप
अरोड़ा का कहना है कि चुनाव आयोग के लिए मतदान की पारदर्शिता और गोपनीयता हमेशा स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय चुनाव सुनिश्चित करने में एक मार्गदर्शक विचार रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग जल्द ही विभिन्न विकल्पों पर विचार-विमर्श के बाद इस तरह के वोटिंग के अंतिम मॉडल को आकार देगा। उन्होंने कहा कि कुछ प्रोसेस से जुड़े बदलाव भी होंगे। उन्होंने कहा इससे पहले राजनीतिक दलों और अन्य संबंधित लोगों के साथ राय मशविरा किया जाएगा।
मतदान केंद्र जाने की नहीं पड़ेगी जरूरत
चुनाव आयोग आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर ऐसी नई तकनीक पर काम कर रहा है जिसके जरिए दूर दराज के क्षेत्रों में रह रहे मतदाताओं को मतदान करने के लिए तय मतदाता केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे दूर रह कर भी मतदान कर सकेंगे।
प्रोजेक्ट का मकसद फिलहाल इंटरनेट बेस्ड वोटिंग नहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त हालांकि, कई मौके पर यह कर चुके हैं कि फिलहाल इस प्रोजेक्ट का मकसद न तो इंटरनेट आधारित वोटिंग है और न ही इसका मतलब घर बैठे वोटिंग की सुविधा है। आखिर रिमोट वोटिंग का विकल्प लोगों को किस रूप में मिलेगा इसका पूरा पता इसके पायलट प्रोजेक्ट के रिजल्ट और अंतिम रूपरेखा पर निर्भर करेगा। हालांकि, अरोड़ा यह बात भी कह चुके हैं कि यदि प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इंटरनेट के जरिये मतदान भी संभव हो सकेगा।
ऐप से वोटिंग पर क्या है चुनाव आयोग का रुख
शुक्रवार को सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एनपीए) जब अरोड़ा से पूछा गया कि क्या आयोग नागरिकों के लिए रिमोट जगह से वोट करने की सुविधा के लिहाज से ऐप आधारित ई-वोटिंग शुरू करने की दिशा में काम कर रहा है। इस पर उन्होंने जवाब दिया, ”हम आईआईटी-मद्रास, चेन्नई और कुछ जानेमाने वैज्ञानिकों के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि 2024 के लोकसभा चुनाव तक आप चुनाव आयोग के काम करने के तरीके में व्यापक बदलाव देखेंगे।’
सुप्रीम कोर्ट में भी पेंडिंग है ई-वोटिंग से जुड़ा केस
सुप्रीम कोर्ट में सरकार और चुनाव आयोग से ई-वोटिंग शुरू करने, मतदान प्रणाली को विकेंद्रीकृत करने और अन्य श्रेणियों में पोस्टल वोटिंग की प्रणाली को बढ़ाने संबंधी याचिका दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ही पूरे मामले पर सुनवाई के लिए सहमति देते हुए केंद्र सरकार के साथ ही चुनाव आयोग से भी जवाब मांगा है। याचिका में घर से दूर रहने वाले प्रवासी मजदूरों, छात्रों, बिजनेस प्रोफेशनल्स का वोटिंग अधिकार वंचित ना हो यह सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार से ई-वोटिंग के विकल्प की मांग की गई है।
-एजेंसियां

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