निर्भया के दोषियों को फांसी देने वाले पवन ने कहा, जल्लाद एक ‘नोबल प्रोफेशन’

नई दिल्ली। 2012 के निर्भया गैंगरेप केस में चारों दोषियों को शुक्रवार तड़के साढ़े पांच पर फांसी दे दी गई। मेरठ के जल्लाद पवन ने तिहाड़ जेल में इन चारों की फांसी संपन्न की। इसी के साथ उसने पहली बार में ही चार लोगों को फांसी देकर एक रिकॉर्ड भी बनाया।
जल्लाद पवन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उसे इन दोषियों को सजा के लिए कई बार दिल्ली आना-जाना पड़ा, जिसकी वजह से उसे काफी थकान भी हुई।
पवन ने कहा कि जल्लाद होना एक ‘नोबल प्रोफेशन’ है क्योंकि ये बुरे लोगों को समाज से दूर करता है।
जल्लाद पवन ने दी निर्भया के दोषियों को फांसी
22 जनवरी से लगातार निर्भया के दोषियों की फांसी कानूनी वजहों से टल रही थी। इस बीच तिहाड़ जेल प्रशासन ने जल्लाद पवन को मेरठ से बुलाया लेकिन फांसी की तारीख टलती रही। हालांकि 20 मार्च को सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद चारों को फांसी दी गई और जल्लाद पवन ने लीवर खींचकर इन्हें अंतिम अंजाम तक पहुंचाया।
परिवार से सीखा फांसी देना: पवन जल्लाद
जल्लाद पवन अपने परिवार में तीसरे सदस्य हैं जो इस काम को कर रहे हैं। पवन ने जल्लाद का काम अपने दादा कल्लू जल्लाद से सीखा है, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दो हत्यारों को 1989 में फांसी दी थी। पवन जल्लाद के पिता भी जल्लाद थे। उनका नाम मम्मू जल्लाद था। उन्होंने संसद पर आतंकी हमले के आरोपी अफजल गुरु को फांसी दी थी। अफजल गुरु को फरवरी 2013 में फांसी दी गई थी। पवन ने बताया कि मेरे पिता ने अपने 47 साल की सर्विस के दौरान 12 कैदियों को फांसी दी थी।
दादा और पिता भी थे जल्लाद
पवन जल्लाद ने बताया कि करीब चार पहले उसे फांसी देने का मौका मिला था जब निठारी रेप-हत्या के मामले में दोषी सुरिंदर कोली को फांसी देने का फैसला सुनाया गया था। करीब एक हफ्ते तक पवन जल्लाद की फांसी की प्रेक्टिस की गई लेकिन बाद में सुरिंदर कोली की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके बाद ये चौथा मौका है जब पवन जल्लाद को मेरठ से तिहाड़ जेल आना पड़ा और इस बार उसने निर्भया के चारों दोषियों को फांसी दी।
बेटे के जल्लाद बनने पर ये बोले पवन
पवन ने कहा कि जल्लाद होना एक ‘नोबल प्रोफेशन’ है क्योंकि ये बुरे लोगों को समाज से दूर करता है। निर्भया के दोषियों को फांसी देने को लेकर उन्होंने कहा कि वे सभी एक लड़की से बलात्कार और हत्या के दोषी थे इसलिए एक लड़की का पिता होने की वजह से मुझे उन्हें फांसी देने में खुशी हुई।
बता दें कि पवन को 2013 में 3 हजार रुपये में उत्तर प्रदेश जेल प्रशासन ने हायर किया था। पवन ने बताया कि वो नहीं चाहता कि उसके बच्चे इस पेशे में आएं। मैं नहीं चाहता कि मेरा बेटा भी पद-चिन्हों पर चले और एक जल्लाद बने।
-एजेंसियां

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