पौष पुत्रदा Ekadashi कल, जान‍िए इसका महत्व

सभी एकादश‍ियों में पुत्रदा Ekadashi का विशेष स्‍थान है, पौष पुत्रदा Ekadashi कल है। मान्‍यता है कि इस व्रत के प्रभाव से योग्‍य संतान की प्राप्‍ति होती है। इस दिन सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु की आराधना की जाती है।

पुत्रदा एकादशी एक ऐसा शुभ दिन है जब संतान से जुड़ी हर समस्या का समाधान श्रीकृष्ण कर देते हैं। कान्हा की कृपा से संतान प्राप्ति और संतान के सुख का वरदान मिल सकता है। कल पुत्रदा एकादशी है, इसलिए हम आपको बताएंगे पुत्रदा एकादशी से जुड़ी हर जरूरी बात लेकिन पहले जानते हैं क्या है पुत्रदा एकादशी और इसका महत्व।

हिन्‍दू धर्म में पौष पुत्रदा एकादशी (Pausha Putrada Ekadashi) का विशेष महत्‍व है। हिन्‍दू पंचांग के अनुसार, साल में 24 एकादशियां पड़ती हैं, जिनमें से दो को पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi) के नाम से जाना जाता है। पुत्रदा एकादशी श्रावण और पौष शुक्‍ल पक्ष में पड़ती हैं। दोनों ही एकादशियों का विशेष महत्‍व है। मान्‍यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान की प्राप्‍ति होती है। आपको बता दें कि हिन्‍दू पंचांग की 11वीं तिथि को एकादशी (Ekadashi) कहते हैं। यह तिथि एक महीने में दो बार आती है। पूर्णिमा के बाद और अमावस्या के बाद। पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली एकादशी को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं।

पुत्रदा एकादशी की तिथि और मुहूर्त
पौष पुत्रदा एकादशी की तिथि: 6 जनवरी 2020
एकादशी तिथि प्रारम्भ: 6 जनवरी 2020 को सुबह 3 बजकर 6 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त: 7 जनवरी 2020 को सुबह 4 बजकर 2 मिनट तक
पारण (व्रत तोड़ने का) की तिथि और समय: 7 जनवरी 2020 को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट से दोपहर 3 बजकर 55 मिनट तक

पुत्रदा एकादशी का महत्‍व
सभी एकादश‍ियों में पुत्रदा एकादशी का विशेष स्‍थान है। मान्‍यता है कि इस व्रत के प्रभाव से योग्‍य संतान की प्राप्‍ति होती है। इस दिन सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु की आराधना की जाती है। कहते हैं कि जो भी भक्‍त पुत्रदा एकादशी का व्रत पूरे तन, मन और जतन से करते हैं उन्‍हें संतान रूपी रत्‍न मिलता है। ऐसा भी कहा जाता है कि जो कोई भी पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ता है, सुनता है या सुनाता है उसे स्‍वर्ग की प्राप्‍ति होती है।

-Legend News

 

 

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