CBI के सामने पेश होने के लिए तैयार हुए परम बीर सिंह

नई दिल्‍ली। मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह सोमवार को सामने आने के लिए तैयार हो गए। कई दिनों से एजेंसियां उन्हें ढूंढ रही थीं। उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। उनके विदेश भाग जाने की खबरें भी आई थीं लेकिन सोमवार को वह अचानक उनके वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और कोर्ट को कहा कि वह भारत में है और फरार नहीं है।
परम बीर सिंह ने अपने वकील के माध्यम से शीर्ष अदालत को बताया कि वह भारत में ही हैं। वह देश छोड़कर कहीं नहीं गए हैं लेकिन उन्हें अपनी जान का खतरा है इसलिए छिपे हुए हैं।
मैं गलत नहीं हूं
मुंबई के पूर्व पुलिस प्रमुख ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ‘मैं 48 घंटे के भीतर CBI के सामने पेश होने के लिए तैयार हूं। अगर मैं गलत हूं, तो मुझे गिरफ्त मे लिया जाए।’
वकील से मांगा था ठिकाने का पता
जस्टिस एस के कौल की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनके वकील को सिंह के ठिकाने के बारे में अदालत को सूचित करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने परम बीर सिंह को गिरफ्तारी से सुरक्षा भी दी और उन्हें जांच में शामिल होने के लिए कहा।
याचिका पर सुनवाई के लिए राजी अदालत
अदालत परमबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई छह दिसंबर को निर्धारित की गई है।
अदालत ने कहा, उलझता जा रहा मामला
अदालत ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और परम बीर सिंह के बीच चल रहे विवाद पर चिंता व्यक्त की और कहा, ‘हमें तस्वीर बहुत परेशान करने वाली लगती है।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि मामला दिन-प्रतिदिन उलझता जा रहा है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने घोषित किया है अपराधी
बॉम्बे की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने बुधवार को सिंह और शहर के कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जबरन वसूली के एक मामले में घोषित अपराधी घोषित किया था। पूर्व आयुक्त सिंह आखिरी बार इस साल मई में अपने कार्यालय में आए थे जिसके बाद वह छुट्टी पर चले गए थे। राज्य पुलिस ने पिछले महीने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि उसके ठिकाने का पता नहीं है।
मुंबई पुलिस ने अपराधी घोषित करने की मांग की थी
जबरन वसूली के मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने उन्हें अपराधी घोषित करने की मांग की थी। मुंबई पुलिस ने कहा था कि क्योंकि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद भी आईपीएस अधिकारी का पता नहीं लग पा रहा था इसलिए उन्हें अपराधी घोषित किया जाए।
-एजेंसियां

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