पालघर लिंचिंग केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, महाराष्‍ट्र सरकार से मांगी स्‍टेटस रिपोर्ट

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की मॉब लिन्चिंग की जांच के मामले में राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
पालघर में 16 अप्रैल की रात भीड़ ने दो साधुओं को पीट-पीटकर मार डाला था जिसके बाद देशभर में इसको लेकर कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर पालघर घटना की कोर्ट की निगरानी में एसआईटी या सीबीआई जांच की मांग की गई है, साथ ही मामले को महाराष्ट्र से दिल्ली ट्रांसफर कर दिल्ली में ट्रायल चलाने की गुहार लगाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने मामले की वीडियो कॉन्फेंसिंग के जरिए सुनवाई की और इस दौरान उस गुहार को ठुकरा दिया, जिसमें राज्य में चल रही जांच पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह याचिका की कॉपी महाराष्ट्र सरकार के वकील को मुहैया कराएं और राज्य सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते में मामले की जांच संबंधित स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा कि घटना पुलिस के सामने हुई और पुलिस साधुओं को प्रोटेक्ट नहीं कर पाई। लॉकडाउन के दौरान भीड़ इकट्ठी हुई ये पुलिस की लापरवाही है। मामले में जिन पुलिस कर्मियों की लापरवाही है उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए और संबंधित धाराओं में केस दर्ज होना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने कहा कि मुंबई से साधू सूरत जा रहे थे। इसी दौरान करीब 200 लोगों की भीड़ पालघर में इकट्ठी हुई और उन्होंने लाठी व चाकू आदि से साधुओं पर हमला किया। लॉकडाउन 25 मार्च से ही चल रहा था बावजूद इसके 16 अप्रैल को 200 लोगों की भीड़ वहां जुटी थी। पुलिस के सामने अटैक हुआ और साधुओं को बचाने के लिए पुलिस ने ठोस कार्यवाही नहीं की और न ही भीड़ को हटाया।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल उठाया गया कि क्या लोगों के जीवन की रक्षा की जिम्मेदारी राज्य पर नहीं है? क्या पुलिस की लापरवाही के कारण ये घटना नहीं हुई? क्या मामले की छानबीन सीबीआई या एसआईटी को न सौंपी जाए? जिन पुलिस कर्मियों पर जिम्मेदारी है उन पर क्यों न केस दर्ज किया जाए। सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि मामले में कोर्ट की निगरानी में एसआईटी या फिर सीबीआई जांच कराई जाए और जिम्मेदार पुलिस कर्मियों पर भी केस दर्ज कराया जाए। मामले का ट्रायल दिल्ली में ट्रांसफर किया जाए।
-एजेंसियां

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