अमेरिका-चीन के कोल्‍ड वॉर में तबाही की ओर बढ़ रहा है पाकिस्‍तान

आर्थिक मंदी और कोरोना वायरस से तबाही के साथ ही पाकिस्तान का अमेरिका और चीन बीच जारी कोल्ड वॉर में भी पिसना तय माना जा रहा है। कभी अमेरिका का चहेता रहा रहा पाकिस्तान इन दिनों चीन की गोद में बैठा हुआ है। पाकिस्तान के स्टेट बैंक ने इस साल देश की आर्थिक विकास दर निगेटिव स्थिति में जाने का अनुमान व्यक्त किया है। आने वाले वर्षों में भी पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है।
क्यों पाकिस्तान पर छा रहा काला साया
अमेरिका और चीन के बीच कोरोना वायरस को लेकर जारी तनाव और ट्रेड वॉर के कारण खैरात पर निर्भर पाकिस्तान कर्ज के बोझ तले डूब सकता है।
हाल में ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कोरोना से बचाव के लिए वैश्विक समुदाय से पैसे देने की गुहार भी लगाई थी लेकिन उन्हें किसी भी देश ने कर्ज नहीं दिया। इस समय अमेरिका और चीन अंदरूनी हालात को सही करने में उलझे हुए हैं। ऐसे समय में ये दोनों देश पाकिस्तान की मदद करने की स्थिति में नहीं हैं।
आईएमएफ भी कर्ज देने को तैयार नहीं
आर्थिक रूप से नाकाम साबित हो चुके पाकिस्तान ने आईएमएफ से कर्ज देने की गुहार लगाई थी। हालांकि इस संस्था ने मांग की आधी से भी कम रकम पाकिस्तान को दी। वर्तमान में पाकिस्तान के ऊपर अंतरराष्ट्रीय कर्ज बहुत ज्यादा हो गया है।
पाक का सबसे बड़ा साथी है चीन
2015 में चीन ने अरब सागर तक अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की शुरूआत की थी। इसी के साथ चीन पाकिस्तान में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया था। हालांकि, 2016 से बाद इस गलियारे के निर्माण को लेकर पाकिस्तान में खासी राजनीति हुई। जिस कारण फिलहाल इस रोड का काम रूका हुआ है।
रक्षा सहयोग से शुरू हुई चीन-पाक की दोस्ती
साल 1970 के दशक में पाकिस्तान ने अमेरिका और चीन से अपने संबंधों का भरपूर फायदा उठाया। चीन ने 1980 और 1990 के दशक में परमाणु हथियारों को बनाने और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए तकनीकी सहायता मुहैया कराई। आज भी दोनों देश रक्षा के क्षेत्र में कई प्रकार के हार्डवेयर का उत्पादन करते हैं जिसमें जेएफ-17 लड़ाकू विमान भी शामिल है। इसके अलावा दोनों देश एक टैंक के निर्माण की तकनीकी पर भी साथ में काम कर रहे हैं।
भारत से दुश्मनी ने गहरी की दोस्ती
कहते हैं कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए चीन और पाकिस्तान ने अपनी दोस्ती को और मजबूत किया। दोनों देश भारत के साथ युद्ध लड़ चुके हैं। चीन के पास बेचने के लिए हथियार हैं और पाकिस्तान इन हथियारों को खरीदता भी है। वहीं दूसरी तरफ चीन अपने मुस्लिम बहुल प्रांत में पाकिस्तान की मदद से आतंकी गतिविधि पर भी लगाम लगाने में सफल हुआ है।
-एजेंसियां

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