FATF से पाकिस्‍तान को मिली चार महीने की मोहलत

FATF ने पाकिस्तान को आतंक पर कार्यवाही के लिए फरवरी 2020 तक की मोहलत देते हुए इसे डेडलाइन बताया है। FATF ने सख्त निर्देश दिया है कि तय समय में पाकिस्तान एक्शन प्लान बनाए और उस पर कार्यवाही करे नहीं तो आगे और सख्त कार्यवाही हो सकती है।
इस चेतावनी के साथ पाकिस्तान फिहाल टेरर फंडिंग को लेकर ब्लैकलिस्ट होने से बच गया है।
आज FATF (फाइनैंशल ऐक्शन टास्ट फोर्स) ने पाकिस्तान को सख्त निर्देश दिया कि फरवरी 2020 तक वह पूरा एक्शन प्लान तैयार कर उस पर आगे बढ़े। अगर निर्धारित वक्त में पाकिस्तान ऐसा करने में असफल रहता है तो उसे सख्त कार्यवाही के लिए तैयार रहना चाहिए। पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह के वित्तीय लेन-देन और बिजनेस पर भी सदस्यों से नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। चीन, मलेशिया और तुर्की से पाकिस्तान को समर्थन मिलने के बाद माना जा रहा था कि वह ब्लैकलिस्ट होने से बच सकता है।
दरअसल, पाकिस्तान को जब यह लगने लगा कि उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है तो उसने दुनिया के कई देशों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की। कश्मीर पर पाक ने झूठी बातें प्रचारित करनी शुरू कीं और भारत के खिलाफ अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए चीन के साथ-साथ तुर्की और मलेशिया से भी नजदीकी बढ़ाई। कश्मीर पर तुर्की और मलेशिया के रुख से साफ हो गया था कि चीन के साथ ये दोनों देश पाक को ब्लैकलिस्ट होने से बचा सकते हैं।
जून 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था
आपको बता दें कि FATF ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला था और 27 पॉइंट का एक्शन प्लान देते हुए एक साल का समय दिया था। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी संगठनों की टेरर फाइनैंसिंग रोकने के उपाय करने थे। आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में नाकाम और आतंकियों व उनके संगठनों के खिलाफ ठोस कदम न उठाने को लेकर यह सुधरने की अंतिम चेतावनी की तरह है।
FATF आतंक पर निगरानी के लिए बनी संस्था
FATF पैरिस स्थित अंतर-सरकारी संस्था है। इसका काम आतंकी संगठनों को गैरकानूनी आर्थिक मदद को रोकने के लिए नियम बनाना है और इसके पालन पर अपनी रिपोर्ट देनी है। संस्था का गठन 1989 में किया गया था। FATF की ग्रे या ब्लैक लिस्ट में डाले जाने पर देश को अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं से कर्ज मिलने में काफी कठिनाई आती है।
ब्लैकलिस्ट होने पर और पस्त होगी पाक की हालत
अगर पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया जाता तो उसके लिए कर्ज हासिल करना मुश्किल हो जाता। इस सूची में नाम आने के बाद पाकिस्तान में विदेशी निवेश के रास्ते भी बंद हो जाते। ब्लैकलिस्ट होने के बाद वैश्विक वित्तीय संस्थाएं पाक की रेटिंग कम कर सकती थीं। पाकिस्तान के लिए विश्व बैंक और IMF से पैसा लेना मुश्किल हो जाता। बदहाली से उबरने के लिए चीन, सऊदी जैसे देशों से भी फंड मिलने में मुश्किल हो सकती थी।
ग्रे और ब्लैक लिस्ट के बीच डार्क ग्रे
FATF नियमों के मुताबिक ग्रे और ब्लैक लिस्ट के बीच डार्क ग्रे की भी कैटिगरी होती है। ‘डार्क ग्रे’ का अर्थ है सख्त चेतावनी, ताकि संबंधित देश को सुधार का एक अंतिम मौका मिल सके।
-एजेंसियां

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