किसान आंदोलन को “हवा” दे रहे हैं पाकिस्‍तान और चीन

नई दिल्‍ली। भारत में जारी किसानों के आंदोलन के पीछे पाकिस्‍तान का हाथ भले न हो, लेकिन वह इस आग में घी डालने की कोशिश जरूर कर रहा है। पाकिस्‍तानी यूजर्स सोशल मीडिया पर अलग तरह का प्रोपेगेंडा फैला रहे हैं। भड़काऊ और फर्जी ट्वीट्स के जरिए भारत में सिखों की हालत को लेकर एक नैरेटिव सेट करने की कोशिश है। इसमें चीन भी उसका साथ दे रहा है। चीनी नाम वाले कई छद्म अकाउंट्स से पाकिस्‍तान के समर्थन वाले ट्वीट किए जा रहे हैं। ऐसा दिखाने की कोशिश हो रही है कि पाकिस्‍तान में सिखों की बड़ी कद्र है जबकि भारत में अल्‍पसंख्‍यकों के साथ सरकार ऐसा व्‍यवहार करती है। मगर पाकिस्‍तानी यूजर्स शायद अपने गिरेबान में झांककर नहीं देखना चाहते। अगर देखते तो उन्‍हें पता चलता कि उनके अपने मुल्‍क में जितना बुरा हाल अल्‍पसंख्‍यकों का है, वैसा तो दुनिया के किसी और देश में नहीं है।
देखें, कैसे अपना प्रॉपेगेंडा फैला रहे चीन और पाक
पाकिस्‍तानी ट्विटर पर इन दिनों भारत की खूब चर्चा हो रही है। वहां के ट्रेंड्स में भारत के विषय दिखते हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को अपने प्रोपेगेंडा वॉर में इस्‍तेमाल कर पाकिस्‍तान यह साबित कर रहा है कि वह भारत को नीचा दिखाने के लिए खुद किसी भी हद तक गिर सकता है। सिख सैनिक के साथ पाकिस्‍तानी सेना प्रमुख की एक तस्‍वीर वायरल की जा रही है। इसकी तुलना भारत में प्रदर्शनकारी सिख किसान पर लाठी बरसाते एक पुलिस के जवान की फोटो से हो रही है। इसके जरिए यह बताने की नापाक कोशिश है कि भारत और पाकिस्‍तान में सिखों को किस तरह ट्रीट किया जाता है।
पाकिस्‍तान के कई यूजर्स भारत के ‘सिख किसानों’ के प्रति अपना समर्थन जाहिर करते हुए फूट डालने की कोशिश में हैं। कुछ पाकिस्‍तानी यूजर्स ने तो यहां तक लिखा कि भारतीय सिखों को अब समझ आया होगा कि मोहम्‍मद अली जिन्‍ना क्‍यों सही थे। भारत-पाकिस्‍तान का धार्मिक आधार पर बंटवारा कराने वाले जिन्‍ना पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपिता हैं। कुछ पाकिस्‍तानी यूजर्स अपने प्रधानमंत्री इमरान खान को सलाह दे रहे हैं कि पाकिस्‍तान को पूरी तरह से खालिस्‍तान आंदोलन का साथ देना चाहिए, मगर छिपकर।
कई भारतीय यूजर्स ने पाकिस्‍तानी यूजर्स की ऐसी हरकतों को ट्विटर पर बेनकाब भी किया है।
काश…आइना देख लेते पाकिस्‍तानी
भारत में अल्‍पसंख्‍यकों की स्थिति पर कोई टिप्‍पणी करने से पहले पाकिस्‍तान अवाम को अपना ट्रैक रिकॉर्ड देख लेना चाहिए था। स्थिति ये है कि आज मानवाधिकार दिवस है और वहां के अल्‍पसंख्‍यक आज ‘काला दिवस’ मना रहे हैं। पाकिस्‍तान में अभी 12 साल की ईसाई लड़की फराह शाहीन का मुद्ददा चर्चा में है। मुस्लिमों ने उसका 5 महीने अपहरण कर लिया था और जबरन धर्मांतरण करा दिया। अपहरणकर्ताओं में से एक ने उससे शादी तक कर ली थी। जब लड़की मिली तो उसके शरीर पर चोटों के निशान थे। इससे पहले 30 नवंबर को रावलपिंडी में एक ईसाई महिला को शादी का प्रस्‍ताव ठुकराने पर सिरफिरे ने गोली मार दी थी। सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के अनुसार 2013 से नवंबर 2020 के बीच पाकिस्‍तान में धर्मांतरण के 162 मामले ऐसे रहे जिन पर शक था। इनमें से 54 फीसदी पीड़‍िताएं हिंदू धर्म से थीं जबकि 44 फीसदी ईंसाईं। भयावह आंकड़ा यह भी है कि इनमें से 46 फीसदी से ज्‍यादा पीड़‍िताओं की उम्र 18 साल से कम थी।
-एजेंसियां

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