5 महीने से धूल फांक रहे CM के आदेश, Keshav vatika नहीं खुली

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आद‍ित्यनाथ द्वारा 5 महीने पहले श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थ‍ित Keshav vatika को खोलने के लिए द‍िए गए आदेश प्रशासन‍िक लापरवाही के चलते आज भी धूल फांक रहे हैं जबक‍ि जन्मस्थान आने वाले श्रद्धालुओं को Keshav vatika के खुलने का अब बेसब्री से इन्तजार है।

इसे लेकर जन्मस्थान के पदाध‍िकार‍ियों ने कहा क‍ि गृह विभाग उप्र के पत्र दिनांक 25 फरवरी 2019 द्वारा जारी स्पष्ट आदेशों के उपरान्त भी आज तक केशव वाटिका को समीप से निहारने के लिए भक्त तरस रहे हैं। गृह विभाग के स्पष्ट आदेशों का अभी तक पालन न हो पाना श्रद्धालुओं एवं ब्रजवासियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

ज्ञातव्य है कि जन्मस्थान परिसर में स्थित लगभग 3.5 एकड़ के क्षेत्र में फैली अद्भुद केशव वाटिका पौराणिक दृष्ट‍ि एवं धार्मिक मान्यताओं के आधार पर तो महत्वपूर्ण है ही, साथ ही जन्मस्थान सेवा संस्थान के प्रयासों से एक अद्भुत एवं दर्शनीय वाटिका का रूप ले चुकी है।

वर्ष 1996 में प्रस्तावित विष्णु महायज्ञ आयोजन का अनावश्यक रूप से हौवा बनाकर तुष्ट‍ीकरण की रीति एवं नीति पर चलने वाली सरकार ने तत्कालीन पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर इस अत्यन्त पवित्र स्थल की बेरीकेडिंग कर श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ किया।

गौलोकवासी श्री विष्णुहरि डालमिया एवं संस्थान के अन्य सदस्यों एवं पदाधिकारियों ने तभी से प्रशासन की इस हठधर्मिता के विरोध में आवाज उठाई और बैरीकेडिंग हटाने के निरन्तर प्रयास करते रहे।

जून 2017 में संस्थान के अध्यक्ष पूज्य महन्त नृत्यगोपाल दास जी महाराज के जन्मदिवस के अवसर पर अयोध्‍या से श्रीकृष्ण जन्मस्थान पधारे प्रदेश के मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को संस्थान के सचिव कपिल शर्मा एवं सदस्य श्री गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने इस समस्या से अवगत कराया था, तदोपरान्त  मुख्यमंत्री योगी ने स्वयं बैरीकेडिट स्थल का निरीक्षण किया और पुलिस-प्रशासन को निर्देश दिये कि निष्पक्ष और स्पष्ट कार्यवाही कर इस बैरीकेडिंग को हटाने का कार्य सुनिश्च‍ित करें। तब से प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा ने निरन्तर एवं सतत प्रयास कर इस विषय को मुख्यमंत्री एवं शासन के सामने उठाया।

संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य श्री गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि गृह विभाग के आदेश के क्रियान्वयन में हो रहे विलम्ब एवं प्रशासन के लचर रवैये से कृष्‍णभक्‍त क्षुब्ध एवं आक्रोषित हैं। केशव वाटिका में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ और स्वरूप में परिवर्तन कतई स्वीकार नहीं किया जायेगा।

चतुर्वेदी ने आगे बताया कि केशव वाटिका का उपयोग सिर्फ श्रद्धालुओं को दर्शन कराने और उनके विश्राम हेतु किया जाएगा। संस्थान की यह मंशा स्पष्ट है।

संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि बैरीकेडिंग लगने के बाद उजड़ चुकी केशव वाटिका के पुनरोद्धार का कार्य लगभग दस वर्ष पूर्व किया गया जो अब अपने पूर्व स्वरूप में आ चुकी है। हमें आशा है कि शासन की भावनाओं एवं आदेशों के अनुसार केशव वाटिका श्रद्धालुओं हेतु शीघ्र ही खोली जाएगी ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »