देश के 543 लोकसभा सांसदों में से मात्र 35 ने ही किया पूरी निधि का उपयोग

नई दिल्‍ली। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी डेटा के मुताबिक साल 2014 से 543 में से केवल 35 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में ही सांसद निधि का इस्तेमाल कर प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं. यानि देश के 543 सांसदों में से मात्र 35 सांसदों ने 25 करोड़ की राशि का पूरा उपयोग किया.
केंद्र सरकार अब सांसदों के फंड जारी करने की योजना में बदलाव करने की योजना बना रही है. पहले सरकार सासंदों के फंड को दो किश्तों में जारी करती थी लेकिन अब इसे एक बार में ही पूरी किश्त जारी करने की योजना पर विचार कर रही है.
केंद्र की ओर से जारी आंकड़ों बताते हैं कि पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात और हरियाणा ही ऐसे राज्य हैं जहां एक या दो क्षेत्रों में सांसद निधि के तहत पूरी की गई परियोजनाओं के साथ 25 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किया गया.
पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा सासंदों ने अपने फंड का इस्तेमाल किया. वहां करीब 10 सासंदों ने स्वीकृत स्कीमों के लिए यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट दिखाया. दक्षिण भारत का कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां पूरी राशि इस्तेमाल हो पाई हो.
वहीं उत्तर प्रदेश में 6, मध्य प्रदेश में 4, पंजाब में 3, असम, गुजरात और हरियाणा में 2-2 सांसद ऐसे हैं जो कि पूरी राशि खर्च कर पाए हैं. इसके अलावा राजस्थान और बिहार में मात्र एक सांसदों ने पूरी राशि खर्च की है. इसके अलावे कई अन्य एमपी भी हैं जिन्होंने अपनी सासंद निधि की पूरी राशि खर्च की.
लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने कहा था, ”कई वजहों से जिला प्रशासन के द्वारा उपयोग प्रमाणपत्र जमा करने में देरी होती है. सांसद निधि को लेकर कई बैठकों में चर्चा हो चुकी है.” उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि एक बार में ही फंड को रिलीज कर दिया जाए.
एक बार में फंड जारी करने को लेकर गौड़ा ने कहा कि इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री के पास प्रस्ताव विचाराधीन है. अगर वित्त मंत्रालय से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है तो सासंदों को एक बार में ही एक साल का फंड जारी कर दिया जाएगा.
-एजेंसियां

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