संयुक्त राष्ट्र में 56 मिनट के मुकाबले मात्र 17 मिनट

इमरान खान के 56 मिनट के मुकाबले बस 17 मिनट। इमरान का कश्मीर, इस्लाम और 10 बार ‘मोदी-मोदी’ की रट से भरा बेलगाम भाषण और दूसरी तरफ पीएम मोदी की स्पीच से इमरान तो दूर, पाक पर एक सीधा शब्द नहीं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में शुक्रवार को पीएम मोदी का भाषण शब्दों की कूटनीति से भरा हुआ था। मोदी ने ‘खामोशी’ से पाकिस्तान ही नहीं, दुनिया को भी कश्मीर पर स्पष्ट संदेश दे दिया।
अपने भाषण में कश्मीर का जिक्र न कर मोदी ने जता दिया कि आर्टिकल 370 को खत्म करना भारत का आंतरिक मामला है और वैश्विक मंच पर इसकी चर्चा करने की कोई जरूरत नहीं है।
अपने पाकिस्तानी समकक्ष के साथ तकरार में शामिल होने के बजाए मोदी ने जलवायु परिवर्तन, अक्षय ऊर्जा, गरीबी और भारत के विकास जैसे व्यापक मुद्दों को दुनिया के सामने रखा।
उधर, अपने संक्षिप्त संबोधन में मोदी ने एक बार भी पाकिस्तान का जिक्र नहीं किया बल्कि दुनिया से मिलकर आतंकवाद से लड़ने की अपील की।
उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए बल्कि पूरे विश्व एवं मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।’
स्वामी विवेकानंद के 125 साल पहले शिकागो में धर्म संसद में दिए संदेश का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का आज भी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए शांति और सौहार्द ही, एकमात्र संदेश है।’
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जब बोलने आए तो उन्होंने समय और शब्दों की मर्यादाएं लांघते हुए भारत के खिलाफ अपने अजेंडे को प्राथमिकता में रखा।
RSS पर आरोप, दुनिया के मुसलमानों को भारत के खिलाफ उकसाने यहां तक कि भारतीय मुस्लिमों को भी इमरान ने बरगलाने की कोशिश की।
इमरान के मंसूबे का इसी से पता चल जाता है कि 4 पॉइंट्स में 56 मिनट तक बोलते हुए उन्होंने कुल 10 बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया। इमरान तय समय से कहीं ज्यादा देर तक भारत के खिलाफ नफरत उगलते रहे। उनका युद्ध राग पीएम मोदी के उसी मंच से कुछ समय पहले दिए गए शांति संदेश से ठीक उलट था।
आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में संबोधन के लिए दुनियाभर के नेताओं को 15 से 20 मिनट का वक्त दिया जाता है। प्रधानमंत्री ने तय समय और कम शब्दों में अपनी बात रखी वहीं, लाल बत्ती (यानी अपनी बात खत्म करने का अलार्म) लगातार जलते रहने के बाद भी इमरान और आधे घंटे तक नफरत और युद्ध का उन्माद भड़काते रहे।
इमरान खान ने एक और पुलवामा हमले की धमकी दी और खुद को मुस्लिमों के मसीहा के तौर पर पेश करने की कोशिश की।
मुसलमानों को लेकर भी उनकी अप्रोच सिलेक्टिव रही। एक तरफ पाक पीएम ने कश्मीर और भारत के मुसलमानों को लेकर झूठी कहानी गढ़ी और म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति अपना दर्द दिखाया पर चीन में उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार पर चुप्पी साधे रहे।
आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी स्पीच में दुनिया में विकास, भागीदारी और जनहित की बात की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सामने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने पर जोर दिया। मोदी ने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जिसने विश्व को ‘युद्ध नहीं बुद्ध’ दिए।
दरअसल, पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे का उस समय से अंतर्राष्ट्रीयकरण करने का प्रयास कर रहा है जब भारत ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। हालांकि इससे संबंधित अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने को भारत ने अपना आंतरिक मामला बताया है।
-एजेंसियां

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