देश की केवल 10 एजेंसियां ही कर सकती हैं किसी का भी फोन टैप

नई दिल्ली। वॉट्सऐप कॉल और संदेशों की टैपिंग विवादों के बीच भारत सरकार ने उन एजेंसियों के नामों का खुलासा किया है कि जो जरूरत पड़ने पर किसी का भी फोन टैप कर सकती हैं। बस उन्हें सक्षम प्राधिकारी से इस काम के लिए अनुमति लेनी होगी।
सक्षम प्राधिकारी संबंधित व्यक्ति और विभाग की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकता है। सरकार ने यह भी बताया कि देश में केवल 10 एजेंसियों के पास यह अधिकार है कि वे किसी का भी फोन टैप कर सकें।
इस बात की जानकारी केंद्रीय गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में दी। उन्होंने यह भी बताया कि फोन कॉल पर किसी की निगरानी करने से पहले केंद्रीय गृह सचिव की मंजूरी लेनी होती है।
जी किशन रेड्डी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69 केंद्र सरकार या किसी राज्य सरकार को देश की संप्रभुता या अखंडता के हित में किसी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से उत्पन्न, प्रेषित, प्राप्त या संग्रहित सूचना को बीच में रोकने, उस पर निगरानी रखने या उसके कोड को पढ़ने के लिहाज से बदलने का अधिकार प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि कानून, नियमों और मानक परिचालन प्रक्रियाओं के प्रावधानों के तहत ही इस पर नजर रखने के अधिकार का क्रियान्वयन किया जा सकता है।
सरकार की तरफ से यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार के मामले में केंद्रीय गृह सचिव को और राज्य सरकार के मामले में संबंधित राज्य सरकार के गृह सचिव से इसकी अनुमति लेनी होगी।
जानिए उन 10 एजेंसियों के नाम:-
खुफिया ब्यूरो (आईबी)– यह देश की आंतरिक गुप्तचर एजेंसी है जो दुनिया की सबसे पुरानी एजेंसियों में से एक है। इसका गठन 1887 में अंग्रेजों द्वारा किया गया था जिसका आजादी के बाद 1947 में पुर्नगठन किया गया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई)– यह देश की प्रमुख जांच एजेंसी है। जो आपराधिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हुए विभिन्न मामलों की जांच करती है। यह कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के अधीन कार्य करती है। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो का उद्गम विशेष पुलिस स्थापना (एसपीई) से हुआ जिसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा वर्ष 1941 में की गई थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)– प्रवर्तन निदेशालय भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन काम करने वाली एक विशेष वित्तीय जांच एजेन्सी है। इसका मुख्यालय नयी दिल्ली में स्थित है। निदेशालय के क्षेत्रीय कार्यालय अहमदाबाद, बंगलौर, चंडीगढ़, चेन्नई, कोच्चि, दिल्ली, पणजी, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, जालंधर, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई, पटना तथा श्रीनगर में स्थित हैं। प्रवर्तन निदेशालय की स्थापना वर्ष 1956 में दिल्ली में की गई थी। यह विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) और धन आशोधन अधिनियम के तहत कुछ प्रावधानों को लागू करने के लिए उत्तरदायी है।
मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी)– मादक पदार्थ नियंत्रक ब्यूरो (नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) ड्रग तस्करी को रोकने और अवैध पदार्थों के देश में प्रसार को प्रतिबंधित करने वाली भारत की नोडल ड्रग कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसी है। एनसीबी का महानिदेशक भारतीय पुलिस सेवा या भारतीय राजस्व सेवा स्तर का एक अधिकारी होता है। इसकी स्थापना 17 मार्च 1986 को हुई थी।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी)– केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग का एक अंग है। जिसे केंद्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम 1963 के तहत जांच का अधिकार प्राप्त है। इसे 1 जनवरी 1964 को सक्रिय किया गया। यह आयकर विभाग के माध्यम से प्रत्यक्ष कर कानून के प्रशासन के लिए जिम्मेदार है।
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई)– यह भारत की खुफिया एजेंसी है जो तस्करी को रोकने और जांच के लिए जिम्मेदार है। इस निदेशालय का संचालन केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अधिकारियों द्वारा किया जाता है। इसका कई राज्यों में क्षेत्रीय कार्यालय भी है। इसके अलावा इस एजेंसी की विदेशों में भी शाखाएं हैं। इसकी अध्यक्षता भारत सरकार के विशेष सचिव रैंक के महानिदेशक करते हैं।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए)– यह देश में आतंकवाद के बढ़ते खतरों का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित एक संघीय जाँच एजेंसी है। एजेंसी राज्यों से विशेष अनुमति के बिना आतंक संबंधी अपराधों से निपटने के लिए सशक्त है। यह एजेंसी 31 दिसम्बर 2008 को भारत की संसद द्वारा पारित अधिनियम राष्ट्रीय जाँच एजेंसी विधेयक 2008 के लागू होने के साथ अस्तित्व में आई थी।
रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ)– यह भारत की अंतर्राष्ट्रीय गुप्चर संस्था है। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद ऐसी एजेंसी की जरूरत महसूस की गई जो विदेशों में खुफिया काम कर सके। जिसके बाद सितंबर 1968 में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) का गठन किया गया। इससे पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो देश के साथ विदेशों में भी गुप्तचर का काम करती थी। रॉ का मुख्य कार्य जानकारी इकठ्ठा करना, आतंकवाद को रोकना व गुप्त ऑपरेशनों को अंजाम देना है। इसके अलावा यह देश हित से जुड़ी कई प्रकार की खुफिया जानकारी इकठ्ठा करती है।
सिग्नल खुफिया निदेशालय– सिग्नल इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट एक संयुक्त सेवा संगठन है, जो थलसेना, नौसेना और वायु सेना के कर्मियों द्वारा संचालित है। इसमें बड़ी संख्या में वायरलेस प्रायोगिक इकाइयां हैं जो अन्य देशों के सैन्य लिंक की निगरानी का कार्य करती हैं। यह एजेंसी रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है। दिसंबर 2018 को केंद्र सरकार ने इसे फोन और कंप्यूटर टैपिंग के लिए अधिकृत किया।
दिल्ली पुलिस– दिल्ली में कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 1861 में इसकी स्थापना की गई थी। इसका पुर्नगठन 16 फरवरी 1948 को किया गया था। दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह शक्ति प्राप्त है कि वह कानून व्यवस्था के हित में किसी का फोन और कंप्यूटर को टैप कर सकता है।
-एजेंसियां

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