रूस के सोची में मोदी और पुतिन के बीच चल रही है अनौपचारिक मुलाकात

रूस के सोची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्‍ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अनौपचारिक मुलाकात चल रही है। राष्‍ट्रपति पुतिन से पीएम मोदी का बेहद गर्मजोशी से स्‍वागत किया। पीएम मोदी ने चौथी बार राष्ट्रपति चुने जाने के लिए राष्‍ट्रपति पुतिन को बधाई दी। साथ ही कहा कि भारत के साथ राष्ट्रपति पुतिन का विशेष रिश्ता रहा है। मेरे राजनीतिक जीवन में रूस का विशेष महत्व रहा है। भारत और रूस के संबंधों के महत्‍व पर प्रकाश डालते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच लंबे समय से दोस्‍ताना संबंध हैं। मैं राष्‍ट्रपति पुतिन का धन्‍यवाद करता हूं कि उन्‍होंने मुझे अनौपचारिक वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।’
पीएम नरेंद्र मोदी ने बताया कि भारत को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में स्‍थाई सदस्‍यता दिलाने में रूस ने अहम भूमिका निभाई थी। अब भारत और रूस इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर(आइएनएसटीसी) और ब्रिक्‍स में मिलकर काम कर रहे हैं।
रूस रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से होने वाली उनकी मुलाकात दोनों देशों के विशेष रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करेगी। वैसे तो इस मुलाकात को दोनों पक्षों की तरफ से अनौपचारिक बताया जा रहा है लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने एक तरह से मुलाकात के एजेंडे की झलक दे दी है।
जानकारों की मानें तो दोनों नेताओं की मुलाकात निकट भविष्य में भारत-रूस द्विपक्षीय सहयोग की दशा व दिशा तय करेगी। मोदी और पुतिन के बीच दिसंबर, 2018 तक चार और द्विपक्षीय मुलाकातों की तैयारी है। आगे किन मुद्दों पर दोनों देशों को सहमति बनानी है, इसका फैसला सोची में कर लिया जाएगा। ईरान से अफगानिस्तान व मध्य एशिया होते हुए रूस तक रेल व सड़क मार्ग का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करने व आपसी सहयोग से तीसरे देशों में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने पर खास जोर दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस रवानगी से पहले सोशल मीडिया साइट ट्विटर के जरिये अपनी यात्रा की जानकारी दी।
उन्होंने कहा है, ‘रूस के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात को लेकर उत्सुक हूं। उनसे मिलने से हमेशा प्रसन्नता होती है। मुझे भरोसा है कि पुतिन के साथ बातचीत भारत व रूस के बीच के विशेष रणनीतिक रिश्ते को और मजबूत करेगी।’
इससे पहले विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि यह मुलाकात राष्ट्रपति पुतिन के आग्रह पर तय की गई है और इस बार ज्यादा ध्यान वैश्विक मामलों पर होगा। चूंकि बगैर पूर्व निर्धारित एजेंडे के यह मुलाकात हो रही है इसलिए दोनों नेताओं की तरफ से भी अपने-अपने मुद्दे उठाए जाने की छूट होगी। विदेश मंत्रालय की तरफ से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि मोदी और पुतिन की मुलाकात में ईरान से परमाणु करार तोड़ने का मुद्दा काफी अहम होगा। अभी यह मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में सबसे गर्म है। एक दिन पहले सोची में ही पुतिन की जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल के साथ मुलाकात हुई है, जिसमें ईरान-अमेरिका विवाद काफी प्रमुखता से उठा है। रूस के सामने मौका है कि वह दुनिया के प्रमुख देशों के सामने इस बारे में अपना पक्ष रखे।
जानकारों के मुताबिक भारत खुलकर भले ही अभी नहीं बोल रहा हो, लेकिन वह ईरान परमाणु मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले से बेहद असहज है। ट्रंप के फैसले से भारत व रूस दोनों की अर्थव्यवस्थाओं पर विपरीत असर होने के आसार हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच उन उपायों पर चर्चा होगी, जिससे आर्थिक दबाव को कम किया जा सके। यह भी बताते चलें कि मोदी और पुतिन के बीच सोची के बाद भी दिसंबर, 2018 तक चार बार द्विपक्षीय मुलाकात होगी।
अगले महीने दोनों नेता चीन में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेंगे। उसके बाद दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में मुलाकात करेंगे। फिर ईस्ट एशियाई देशों के साथ सहयोग बैठक में उनकी मुलाकात होगी। इसके बाद भारत में होने वाली भारत-रूस सालाना बैठक की अगुवाई ये दोनों करेंगे।
-एजेंसी

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