नए वेरिएंट के बाद लगे प्रतिबंधों से कुछ हासिल नहीं होगा: दक्षिण अफ्रीका

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमीक्रोन के सामने आने के बाद अपने देश और पड़ोसी मुल्कों पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध की निंदा की है.
सिरिल रामाफोसा ने कहा कि वह इस कार्रवाई से “बेहद निराश” हैं. उन्होंने इसे अनुचित ठहराते हुए प्रतिबंधों को तत्काल हटाने की मांग की है.
ब्रिटेन, यूरोपियन यूनियन और अमेरिका उन देशों में शामिल हैं जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका सहित कुछ अन्य अफ्रीकी देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं.
दक्षिण अफ्रीका से सामने आए कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन को “चिंता का कारण” माना जा रहा है, प्रारंभिक सबूत बताते हैं कि इसमें म्यूटेशन काफ़ी तेज़ है और रि-इंफेक्शन का ख़तरा की काफ़ी ज़्यादा है.
इस महीने की शुरुआत में दक्षिण अफ्रीका में इस वेरिएंट का पता चला था और फिर बीते बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को इसकी सूचना दी गई.
पिछले दो हफ्तों में दक्षिण अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले प्रांत गौटेंग में इसके ज़्यादातर मामले सामने आए लेकिन अब ये पूरे देश में फैल चुका है.
डब्ल्यूएचओ ने जल्दबाज़ी में यात्रा पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें “जोखिम-आधारित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण” वाले अप्रोच के बारे में सोचना चाहिए. जबकि,हाल के दिनों में नए वेरिएंट पर चिंताओं के बीच कई देशों से दक्षिण अफ्रीका पर यात्रा प्रतिबंध लगाए गए हैं.
रामाफोसा ने रविवार को अपने भाषण में कहा कि यात्रा प्रतिबंधों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है और दक्षिणी अफ्रीका अनुचित भेदभाव का शिकार है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्रतिबंध वेरिएंट के प्रसार को रोकने में प्रभावी नहीं होंगे.
उन्होंने कहा, “यात्रा पर प्रतिबंध प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्थाओं को और नुकसान पहुंचाएगा और महामारी का जवाब देने और उससे उबरने की हमारी क्षमता को कम करेगा.”
-एजेंसियां

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