इटली में पहली बार क्रिटिकल मरीज़ों की संख्या कम हुई

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का क़हर बढ़ रहा है लेकिन इस महामारी से सबसे ज़्यादा मौतें इटली में हुई हैं.
इटली के अधिकारियों के मुताबिक़ शनिवार को भी इस वायरस से 681 लोगों की मौत हुई है और कुल मौतों का आंकड़ा 15,362 तक पहुंच गया है लेकिन शनिवार को लंबे समय के बाद इटली में उम्मीद की कोई पहली किरण नज़र आई है.
इटली में आम लोगों की सुरक्षा करने वाले सिविल प्रोटेक्शन डिविज़न के मुताबिक देश में ऐसे मरीज़ों की संख्या में पहली बार कमी देखने को मिली है, जिनका इलाज इंटेंसिव केयर यूनिट में चल रहा है.
इटली के सिविल प्रोटेक्शन डिविज़न के प्रमुख एंजेलो बोर्रेली ने मीडिया को बताया है कि शुक्रवार को इटली के अस्पतालों में क्रिटिकल मरीज़ों की संख्या 4,068 थी जो शनिवार को कम होकर 3,994 हो गई है.
एंजेलो बोर्रेली ने कहा है, “यह हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण डेटा है क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ है जब क्रिटिकल मरीज़ों की संख्या कम हुई है. यह इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे हमारे अस्पतालों को थोड़ी राहत मिलेगी. उन्हें सांस लेने का मौक़ा मिलेगा. जब से हम लोगों ने आपातकालीन स्थितियों को देखा है तब से पहली बार क्रिटिकल मरीज़ों की संख्या में कमी आयी है.”
इतालवी सरकार के साइंटिफ़िक काउंसिल के प्रमुख फ्रांको लोकतेली ने बताया कि क्रिटिकल मरीज़ों की संख्या में कमी एक अहम संकेत है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं लगाया जा सकता है कि इटली ने क्रिटिकल स्टेज को पार कर लिया है.
उन्होंने कहा, “इससे यह ज़रूर पता चलता है कि हम जो तौर तरीक़े अपना रहे हैं, वो कारगर साबित हो रहे हैं.”
कारगर हुए हैं उपाय
इटली में नए संक्रमण के मामलों में भी कमी देखने को मिल रही है. शनिवार को इटली में कोरोना वायरस से संक्रमण के 2,886 नए मामले सामने आए हैं. मौजूदा समय में इटली में कोरोना वायरस की चपेट में 88,274 एक्टिव मरीज़ हैं.
इसके अलावा 20,996 मरीज़ इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं.
लोम्बार्डी का उत्तरी क्षेत्र इस वायरस से सबसे बुरी तरह प्रभावित है. पूरे देश के संक्रमित लोगों में से 85 फ़ीसदी इस क्षेत्र से हैं और जितनी मौतें इटली में हुई हैं उनमें से ज़्यादातर इसी इलाक़े में हुई हैं.
इस इलाक़े के लोगों को घर से बाहर निकलने पर सुरक्षा के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. यह नया प्रावधान 5 अप्रैल यानी रविवार से लागू होगा और 13 अप्रैल तक जारी रहेगा.
इतना ही नहीं, इटली के उत्तरी हिस्से के दूसरे शहरों यानी वेनेतो और आल्टो एडिगे में भी लोगों के लिए बाज़ार या शॉपिंग स्टोर में ख़रीदारी करने के लिए निकलने पर मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है.
इससे पहले भी इन इलाक़ों में एहतियातन कड़े क़दम उठाए गए थे. मसलन 15 अप्रैल तक इलाक़े में सड़कों पर वॉक करने या दौड़ने की इजाज़त नहीं दी गई थी. बाइक से भी बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई गई थी. सभी पर्यटक स्थलों और होटलों को बंद कर दिया गया था.
इसके अलावा किसी भी तरह के निर्माण कार्य पर पाबंदी लगाई गई थी.
फ़रवरी से ख़राब हुए थे हालात
इटली में पहला केस आने से पहले ही इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक टास्क फोर्स का गठन किया था. जो ख़ासतौर पर कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए तैयार किया गया था. इटली यूरोपीय यूनियन का पहला ऐसा देश था जिसने अपने यहां विमान सेवाओं को प्रतिबंधित किया.
अभी पूरे इटले में लॉकडाउन की स्थिति है, लेकिन लोम्बार्डी में कुछ ज़्यादा ही सख़्ती से प्रावधान लागू कराए जा रहे हैं, जिसके उल्लंघन करने पर लोगों पर ढाई लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है.
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के बूते इटली संक्रमण के मामलों का इलाज करता रहा लेकिन इलाज के लिए अस्पताल और उसमें बेड सब कम पड़ गए, मानवीय और तकनीकी दोनों संसाधनों का संकट उभर आया.
वैसे इटली में आधिकारिक तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत 20 फ़रवरी से हुई. जब एक 38 वर्षीय शख़्स ने लोम्बार्डी के कोडोग्नो कस्बे में अपनी जांच करायी.
जब जांच रिपोर्ट आई तो यह व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया. यह इटली का पहला आधिकारिक तौर पर दर्ज कोविड-19 केस था. हालांकि कुछ स्वास्थ्य अधिकारी ये मानते हैं कि इटली में इस वायरस का प्रवेश बहुत पहले हो गया था.
-BBC

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