अब हिंदी फिल्‍मों के क्रेडिट रोल हिंदी में ही देने होंगे, बॉलिवुड नाखुश

नई दिल्‍ली। हाल ही में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने निर्देश जारी किया कि हिंदी फिल्मों में क्रेडिट रोल अब हिंदी में दिए जाएं। इससे बॉलिवुड खुश नजर नहीं आ रहा। मंत्रालय का यह फैसला किसी को हास्यास्पद फरमान लग रहा है तो किसी को लॉजिक समझ नहीं आ रहा। वहीं कुछ डायरेक्टर्स कहते हैं कि आखिर फिल्म का क्रेडिट कौन देखता है, किसे फर्क पड़ता है कि यह हिंदी में या इंग्लिश में।
मंत्रालय की ओर से जारी किए गए लेटर में कहा गया है कि हिंदी फिल्मों में हिंदी में ही क्रेडिट रोल होने चाहिए। इससे उन लोंगों को फायदा पहुंचेगा जो अंग्रेजी नहीं जानते और इस कारण उन्हें पता नहीं चल पाता था कि इस फिल्म के साथ कौन-कौन लोग जुड़े हैं। फिल्म में क्रेडिट रोल या तो हिंदी में हो या हिंदी और अंग्रेजी दोनों में, लेकिन हिंदी को प्राथमिकता दी जाए। एक महीने के भीतर यह आदेश प्रभावी हो जाएगा।
‘ट्रांसलेटर पर दया आ रही है’
इस फैसले ने फिल्म जगत में एक हलचल मचा दी है। प्रॉड्यूसर्स का मानना है कि इससे उनका काम और बढ़ जाएगा। उन्हें ट्रांसलेटर आदि मुहैया करवाने होंगे। फैसले से नाखुश डायरेक्टर संजय गुप्ता ने टि्वटर पर इस खबर को शेयर करते हुए लिखा, ‘बेहतरीन अब जाहिर सी बात है चेन्नै, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश असम, ओडिशा, महाराष्ट्र, पाकिस्तान, गुजरात, पंजाब, कश्मीर, गोवा और नॉन हिंदी कहे जाने वाले सभी राज्य इस महान निर्देश का दिल खोलकर स्वागत करेंगे।’
उनका व्यंग्यात्मक अंदाज इतने में ही खत्म नहीं हुआ। अगली ट्वीट में उन्होंने लिखा, ‘मुझे उस इंसान पर दया आ रही है जिसे वीएफएक्स, डबिंग, स्टंट्स, मैट, एसएफएक्स, रिंग्स, स्टीडीकैम ऑपरेटर, साउंड डिजाइनर, पोस्ट प्रॉडक्शन सुपरवाइजर जैसे शब्दों को हिंदी में ट्रांसलेट करना होगा। कोई सुझाव?’ वहीं ‘मुबारकां’, ‘नो एंट्री’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके अनीष बज्मी कहते हैं, ‘यह तो बेहद हास्यास्पद बात है। थिएटर में फिल्म खत्म होने के बाद कौन है जो रुककर पूरे क्रेडिट्स देखता है। हां, अगर किसी ने फिल्म के प्रॉडक्शन में काम किया हो तो बात अलग है। मुझे तो इसका लॉजिक समझ नहीं आ रहा है। यह तो बरसों से चला आ रहा है फिर अचानक से यह फरमान क्यों? ऐसी चीजों पर फोकस क्यों? मैं तो कहूंगा कि आप एजुकेशन को बढ़ावा दें ताकि ऐसी नौबत ही न आए।’
ऐक्टर हर्षवर्धन राणे ने एक शॉर्ट फिल्म ‘खामखां’ की थी जिसमें हिंदी भाषा के सम्मान की बात कही गई थी। हर्ष से जब हमने इस फैसले पर बातचीत की तो उनका जवाब था, ‘मैं इतना बड़ा तो नहीं कि मैं किसी फैसले को सही या गलत बता सकूं लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि कई बेहद गंभीर समस्याएं है। जैसी पाइरेसी, उससे हर साल करोड़ों का नुकसान होता है। उस पर ध्यान देना चाहिए।’
‘इसमें बुराई क्या है’
बॉलिवुड में ‘गदर’,’ हीरो’ जैसी सरीखी फिल्में डायरेक्ट कर चुके अनिल शर्मा इस फैसले का स्वागत करते हुए कहते हैं, ‘मुझे तो इस फैसले में कोई बुराई नहीं लगती है। हमारी भाषा बेहद संपन्न है। इससे हमारी भाषा की गरिमा और बढ़ेगी। यह अच्छा निर्देश है और मैं तो कहूंगा हिंदी और इंग्लिश दोनों में क्रेडिट हों तो और अच्छा है।’ वहीं शुजित सिरकार ने बचते हुए कहा, ‘कोई कॉमेंट नहीं करना चाहूंगा क्योंकि अभी इसपर रिसर्च करूंगा और तब कुछ कह पाऊंगा।’ आपको बता दें चीन, कोरिया जैसे देशों में फिल्म के बाद क्रेडिट्स उनकी भाषा में ही दिए जाते हैं।
-एजेंसियां

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