अब गरुड़ प्रकाशन से छपकर आ रही है Delhi riots 2020

नई द‍िल्ली। दिल्ली दंगों पर आधारित किताब Delhi riots 2020 को छापने से ब्लूम्सबरी पब्लिशिंग इंडिया द्वारा मना करने के बाद अब गरुड प्रकाशन ने इसे छापने का जिम्मा लिया है और प्रकाशन के अनुसार यह क‍िताब अगले 15 द‍िन में बाजार में हर एक के ल‍िए उपलब्ध होगी। फ‍िलहाल इसकी कीमत 199 रुपये रखी गई है और ये ह‍िंंदी में ”द‍िल्ली दंगे 2020 : अलकही कहानी” व अंग्रेजी में Delhi riots 2020: The Untold Story -दोनों भषाओं में उपलब्ध होगी।

गौरतलब है क‍ि Delhi riots 2020: The Untold Story नाम से ब्लूम्सबरी इंडिया किताब छापने जा रहा था, प्रकाशन से पहले सोशल मीडिया पर मचे हंगामे और विरोध के बाद ब्लूम्सबरी ने किताब छापने से इनकार कर दिया। इसके एक दिन बाद गरुड़ प्रकाशन (garuda publication) ने इस किताब को छापने का ऐलान किया है।

गरुण प्रकाशन ने कहा है कि अगले 15 दिनों में किताब मार्केट में उपलब्ध होगी। गरुड़ प्रकाश के अधिकारी संक्रांत सानू ने कहा है कि अन्य पब्लिकेशन हाउस किताब की विषय वस्तु के स्थान पर अन्य बातों से प्रभावित होकर किताब छापने से इंकार कर रहे हैं। गरुड़ प्रकाशन दिल्ली दंगों पर आधारित किताब लिखने वाले लेखकों के प्रयास का समर्थन करता है।

किताब के विरोध का कारण
कपिल मिश्रा के ऊपर दिल्ली दंगों को भड़काने के आरोप लगाए गए थे। दिल्ली दंगों को भड़काने के लिए एक पक्ष बीजेपी के कई बड़े नेताओं को जिम्मेदार मानता है। वहीं विरोध करने वाले लोगों का ये भी कहना है कि ये किताब केवल एक पक्ष को दर्शाती है और हिंदू मुस्लिम की एकता के खिलाफ है। कई बड़े पत्रकारों से लेकर बुद्धिजीवियों ने इस किताब के प्रकाशन का विरोध किया है।

क्या है Delhi Riots 2020: An Untold Story में –

 Delhi Riots 2020: An Untold Story इस हिंसा के पीछे प्लाट का खुलासा करती है। यह पुस्तक इस बात का भी खुलासा करती है कि कैसे उनकी योजना बनाई गयी थी और उन्हें सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया था और किन किन हथियारों को इकट्ठा किया गया था एवं खरीदा गया था और हकीकत में क्या हुआ था। यह किताब इस पूरे नरसंहार की पृष्ठभूमि पर भी बात करती है, माने सीएए (नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019), उससे उपजा असंतोष और इसके कारण विश्वविद्यालयों में हुई हिंसा तथा शाहीन बाग़ और दिल्ली में बाकी जगहों पर हुए धरने।

पहली बार हमारे पास दिल्ली दंगों के प्रमाणित सबूत हैं, जिस पर लेखकों ने जम कर मेहनत की है, घटनाओं पर शोध किया है, और यह लेखिकाएं ग्रुप ऑफ इंटेलेक्चुलस एंड एकेडमीशियन (जीआईए) की संस्थापक हैं। इस किताबा में जमीन पर किए गए शोध के साथ ही उन पीड़ितों की कहानियां भी हैं जिन्होनें इस हिंसा का सामना किया है और जो दंगों की आग से बच गए हैं। और जो कहानी उन्होंने हमें बताई है वह हमें परेशान करने वाली और दिल दुखाने वाली है, क्षोभ पैदा करने वाली है।

– Legend News

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