अब आनंद शर्मा ने बोला पार्टी के फ़ैसले पर तीखा हमला

नई दिल्‍ली। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के फ़ैसलों को लेकर पार्टी का बाग़ी खेमा जिसे जी-23 कहा जा रहा है, वो लगातार मुखर होता जा रहा है.
पिछले हफ़्ते ही इस खेमे ने जम्मू में अपनी ताक़त का प्रदर्शन किया था. अब जी-23 के अहम सदस्य आनंद शर्मा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आईएसएफ़ यानी इंडियन सेक्युलर फ़्रंट से गठबंधन को लेकर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. आनंद शर्मा ने कहा कि यह चुनावी गठबंधन कांग्रेस की विचारधारा के ख़िलाफ़ है.
रविवार को पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने वामपंथी नेताओं और आईएसएफ़ के संस्थापक अब्बास सिद्दीक़ी के साथ महागठबंधन की एक रैली में मंच शेयर किया था. अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस के नेता भी हैं.
आनंद शर्मा ने कांग्रेस के फ़ैसले पर तब तीखा हमला बोला है जब कांग्रेस ने जी-23 को बाँटने की कोशिश की है. जी-23 के नेता कांग्रेस में आमूलचूल बदलाव चाहते हैं और इन्होंने पिछले साल अगस्त में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को एक पत्र लिखा था.
कुल 23 नेताओं ने इसे लेकर पत्र लिखा था. कहा जाता है कि पत्र को लेकर राहुल गाँधी ने कड़ी नाराज़गी जताई थी. इन 23 में से एक पृथ्वीराज चव्हाण भी हैं. चव्हाण को कांग्रेस नेतृत्व ने जी-23 से अपनी तरफ़ खींचने की कोशिश की है. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री चव्हाण को कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव में स्क्रीनिंग पैनल का प्रमुख बनाया है.
आनंद शर्मा की आपत्ति का जवाब देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ”आनंद शर्मा को ज़मीनी हक़ीक़त जानने के लिए पहले मुझसे बात करनी चाहिए थी. कांग्रेस ने वामपंथी पार्टियों के साथ 92 सीटों के लिए गठबंधन किया है और बाक़ी के सेक्युलर धड़े इस महागठबंधन के हिस्सा हैं.”
चौधरी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ”पार्टी में कोई भी फ़ैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं होता है. हम चर्चा के बाद ही कोई फ़ैसला लेते हैं.”
आनंद शर्मा ने ट्वीट कर कांग्रेस पर हमला बोला है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, ”सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ लड़ाई में कांग्रेस चयनात्मक नहीं हो सकती है. हमें हर सांप्रदायिकता के हर रूप से लड़ना है. पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की उपस्थिति और समर्थन शर्मनाक है, उन्हें अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.”
शर्मा ने दूसरे ट्वीट में लिखा है, ”आईएसएफ़ और ऐसे अन्य दलों से साथ कांग्रेस का गठबंधन पार्टी की मूल विचारधारा, गांधीवाद और नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के ख़िलाफ़ है, जो कांग्रेस पार्टी की आत्मा है. इन मुद्दों को कांग्रेस कार्यसमिति पर चर्चा होनी चाहिए थी.”
आनंद शर्मा के ट्वीट पर कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने ट्वीट कर जवाब दिया है. जितिन ने लिखा है, ”गठबंधन पार्टी और कार्यकर्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए किया गया है. अब वक़्त आ गया है कि हम मिलकर चुनाव लड़ें और पार्टी को मज़बूत करें.”
इससे पहले ग़ुलाम नबी आज़ाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ में सोमवार को कहा था कि पीएम ने अपनी पृष्ठभूमि कभी छुपाई नहीं और उन्होंने खुलकर बताया कि वे बचपन में चाय बेचते थे और बर्तन धोते थे. आज़ाद और आनंद शर्मा के ऐसे बयान तब आ रहे हैं जब कांग्रेस तमिलनाडु, पुदुचेरी, केरल, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए पीएम मोदी और बीजेपी को निशाने पर ले रही है.
कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि जब पीएम मोदी के चाय बेचने के दावों पर इतने सवाल उठते हैं, ऐसे में ग़ुलाम नबी आज़ाद ऐसा कहकर उन सवालों को नकार रहे हैं. शनिवार को जी-23 के नेताओं ने जम्मू में अपनी एकता का प्रदर्शन किया था. इसमें कपिल सिब्बल, मनीष तिवारी, राज बब्बर, भूपिंदर सिंह हुड्डा, ग़ुलाम नबी आज़ाद और आनंद शर्मा एक मंच पर दिखे थे.
हालाँकि जी 23 के कई नेताओं ने हालिया प्रगति से ख़ुद को अलग रखा है. लोकसभा सांसद शशि थरूर भी जी-23 के अहम नेता हैं जो कि अब शीर्ष नेतृत्व के हर फ़ैसलों के साथ दिख रहे हैं.
तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने आईएसएफ़ के साथ चुनावी गठबंधन को लेकर कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों पर हमला बोला है. बीजेपी पश्चिम बंगाल के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा कि अब्बास सिद्दीक़ी को शामिल कर कांग्रेस ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है.
ग़ुलाम नबी आज़ाद ने शनिवार को जम्मू की रैली में कहा था कि वो राज्यसभा से रिटायर हो सकते हैं लेकिन राजनीति से रिटायर नहीं हुए हैं. इस रैली आनंद शर्मा ने कहा था, ”एक पार्टी पद और रैंक दे सकती है लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि जिन्हें पद दिया जाता है, वे जननेता बन जाएंगे.”
रैली में कपिल सिब्बल ने कहा था, ”यह सच्चाई है कि कांग्रेस कमज़ोर हो रही है. इसीलिए हम यहाँ जुटे हैं. हम इससे पहले भी एक साथ बैठे थे और हमने साथ मिलकर पार्टी को मज़बूत किया था.”
सिब्बल ने कहा था, ”विमान में उड़ान भरने के लिए एक अनुभवी पायलट की ज़रूरत पड़ती है. विमान ठीक से काम करे उसके लिए एक इंजीनियर की भी ज़रूरत होती है. ग़ुलाम नबी आज़ाद दोनों भूमिका आसानी से निभा सकते हैं. आज़ाद देश के हर राज्य के हर ज़िले तक में कांग्रेस को अच्छी तरह से समझते हैं. हमें दुख हुआ जब पता चला कि संसद से वे रिटायर हो गए हैं. हम नहीं चाहते कि आज़ाद संसद से बाहर जाएं. मैं समझ नहीं पा रहा कि कांग्रेस उनके अनुभव का फ़ायदा क्यों नहीं उठा पा रही है.”
-BBC

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