काशी में बनेगी अब एक ‘मिनी गंगा’, ऐतिहासिक घाटों को मिलेगा नया जीवन

वाराणसी। महादेव की नगरी काशी में अब दूसरी गंगा बहेगी। काशी के अर्धचंद्राकार घाटों के दूसरी तरफ गंगा पार रेती पर ‘मिनी गंगा’ (कैनाल) बनाई जा रही है।
11.95 करोड़ की लागत से तैयार इस ‘मिनी गंगा’ से काशी के ऐतिहासिक घाटों को नया जीवन मिलेगा। इसके साथ ही वाराणसी में ‘मिनी गंगा’ के तैयार होने के साथ काशी में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रोजेक्ट मैनेजर पंकज वर्मा ने बताया कि गंगा पार रेती पर 5.3 किलोमीटर लंबा ओर 25 मीटर चौड़ा कैनाल बनाया जा रहा है। गंगा के जरिए इस कैनाल में पानी भरा जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की खास बात ये है कि खनन किए गए बालू के नीलामी से प्रोजेक्ट की आधी कीमत निकली जाएगी।
ऐतिहासिक घाटों को मिलेगा नया आयाम
वाराणसी के कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि गंगा पार इस कैनाल के तैयार होने के बाद गंगा के पानी का दबाव घाटों पर कम होगा। पानी का दबाव के होने के कारण घाटों को कटान से बचाया जा सकेगा। इससे घाटों को नया जीवन मिलेगा साथ ही सदियों तक उसे बचाया जा सकेगा।
दोनों गंगा के बीच बनेगा आइलैंड
वाराणसी में दोनो गंगा के बीच रेत के टापू को आइलैंड जैसे विकसित किया जाएगा। इस आइलैंड में पर्यटक ऊंट, घोड़े और हाथी की सवारी के साथ पैराग्लाइडिंग, स्कूबा ड्राइव का मजा ले सकेंगे। इसके अलावा प्रमुख त्योहार जैसे देव दीपावली पर भी गंगा पार से पर्यटक घाटों की खूबसूरती को निहार सकेंगे। रेत पर आइलैंड के लिए पर्यटन विभाग पीपीई मॉडल के का सहारा भी ले सकता है।
-एजेंसियां

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