कोरोना आपदा में राहत कार्य की न‍िगरानी के ल‍िए न‍ियुक्त हों नोडल अधिकारी

इस विषम परिस्थिति में गरीबों व मजदूरों के पलायन की समस्या से मात्र सरकारी प्रयासों द्वारा उबरना सम्भव नहीं है, यह एक निरन्तर एवं लम्बे समय तक चलने वाले सेवा कार्यों एवं ‘परहित धर्म सरिस नहीं भाई’ के भाव से ही सम्भव है।

चूंक‍ि वैश्विक महामारी कोरोना से उत्पन्न परिस्थितियों में अपने मूल निवास को बड़ी संख्या में लोग लौट रहे हैं लिहाजा उनके कष्टाें को कम करने के लिए सामाजिक/धार्मिक संस्थाओं एवं सरकार को निरंतर प्रभावी प्रयास करने होंगे। जिस प्रकार बड़ी संख्या में लोग विभिन्न क्षेत्रों से अपने घरों को लौट रहे हैं, यह एक गम्भीर एवं विचारणीय विषय है। राज्य सरकारों की व्यवस्थाओं एवं अपील के बाद भी लोगों का पलायन रुक नहीं रहा है। यह पलायन कहीं इस महामारी का विस्तार ना कर दे, यह डर भी लोगों के दिमाग़ में है ही।

अनेक जागरूक ग्राम पंचायतों द्वारा बाहर से आने वाले लोगों का प्रवेश गाँव में बंद कर दिया गया है, बाहर से आने वाले ग्राम वासियों के लिए भी भोजन/रहने की व्यवस्था ग्राम से बाहर की है एवं एक निश्चित समय के बाद ही उनको गाँव में प्रवेश दिया जा रहा है।

यह अनुकरणीय पहल है, इस मॉडल को सभी ग्राम पंचायत में तत्काल लागू किया जाना चाहिये। टोल नाकों, बस स्टैंड आदि पर वापस लौट रहे लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए, यदि कोई अस्वस्थ हो तो उसको वहीं चिकित्सीय निगरानी में रखना चाहिये जिससे क‍ि वह अनजाने में ही सही इस महामारी का संवाहक ना बन जाए।

सरकार, ग्राम पंचायत, नगर पालिका, ब्लॉक ऑफ़िस आदि सभी संस्थाओं को समन्वय कर घर लौट रहे लोगों को सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुरूप 14 दिन क्षेत्र के लोगों से अलग रहने की व्यवस्था तत्काल बड़े स्तर पर लागू कराने की ज़रूरत है। यदि इस पर गम्भीरता से सामूहिक प्रयास किए जायें तो इस महामारी की विकरालता को निश्चित रोका सकता है। इसके लिए जन जन को जागरूक हो सम्मिलित प्रयास करने होंगे, साथ ही अपनी रक्षा के साथ साथ अपने परिवार एवं सभी के कल्याण की कामना के अनुरूप कार्य-व्यवहार करना होगा।

घर वापस लौट रहे लोगों के लिए गाँव से पर्याप्त दूरी पर स्कूल-धार्मिक स्थलों-पंचायत भवनों का उपयोग कर सभी आवश्यक सुविधाएँ भोजन आदि उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

आज अनेकानेक सरकारी-ग़ैरसरकारी संस्थाएँ/जागरूक नागरिक, जो असहाय/ज़रूरतमंदों के लिए भोजन, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सेवाओं को बनाये रखने के लिए अपनी परवाह न कर मानवता के लिए रात दिन लगे हैं।

सरकार को ब्लॉक स्तर पर इस आपदा से निपटने के लिए सरकारी, समाजसेवी व धार्मिक संस्थाओं के द्वारा किये जा रहे कार्यों की समीक्षा एवं समन्वय की दृष्टि से एक नोडल अधिकारी की तत्काल नियुक्ति पर विचार किया जाना चाहिये, जो सरकारी विभागों के साथ साथ धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर सके।

कुत्सित मनोवृत्ति के लोग आपदा के समय कहीं अपनी स्वार्थ सिद्धि में न लग जाएं, ऐसे में ब्लॉक स्तर पर नोडल अधिकारी होने से उन पर भी नियंत्रण बेहतर रहेगा।

समाज के शिक्षित वर्ग को लोगों में जागरूकता लाने के लिए आगे आकर इस महामारी के प्रकोप एवं परिणामों से लोगों को अवगत कराना होगा। लोगों को उन मुश्किलों का हल बताना होगा, जिनके कारण वह समझते हुए भी सरकार एवं चिकित्सकों की सलाह का पालन नहीं कर रहे हैं।

सनातन धर्म का मूल संस्कार वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को धारण करने का यही समय है ताक‍ि इस वैश्विक महामारी से छुटकारे के साथ साथ भविष्य में भी सुरक्षित रहने के ल‍िए हम सब एकजुट हो सकें।

– कपिल शर्मा
  सचिव श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, मथुरा

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