मजदूरों की मौत पर नीतीश का बयान, इक्का-दुक्का घटनाएं हो जाती हैं

पटना। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से मजदूरों की घर वापसी के दौरान अव्यवस्था के चलते हुई मौतों पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि इक्का-दुक्का घटनाएं हो जाती हैं।
बुधवार को सीएम नीतीश ने कोरोना उन्मूलन के जागरुकता कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए ये बातें कही।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने हर जिले के कम से कम दो क्वारंटीन सेंटरों को देखा है और वहां क्वारंटीन किए गए लोगों से बातचीत भी की है। सीएम ने कहा कि 13 मार्च को हमने कोरोना वायरस को लेकर पहली बैठक की। उसके बाद से लगातार इस वायरस से निपटने की कोशिश कर रहे हैं। जनता कर्फ्यू के बाद हमने 23 मार्च को तय किया था लॉकडाउन करेंगे। इसी दिन शाम को पीएम मोदी ने देशभर में चार खंड में लॉकडाउन की घोषणा की।
कोरोना से निपटने में बिहार के सारे जनप्रतिनिधियों ने काफी अच्छा काम किया है। हमारे गांव के लोगों ने इतनी जागरूकता दिखाई कि उन्होंने किसी बाहरी को गांव में आने नहीं दिया। पहले डॉक्टरों ने कहा था कि मास्क केवल संक्रमित लोगों को लगाना है, लेकिन बाद में तय हुआ कि हरेक को मास्क पहनना है।
हमने तय किया है कि गांव के हर परिवार को चार मास्क और साबून सरकार देगी। इस पर काफी काम हो चुका है। अब शहरों में भी गरीबों को मुफ्त मास्क मुहैया कराया जाएगा।
सीएम नीतीश ने कहा कि बिहार सरकार के अनुरोध पर मजदूरों को ट्रेनों से घर लाया गया। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में मजदूरों की मौत की घटना पर सीएम नीतीश ने कहा कि सभी लोग आराम से घर पहुंचे हैं। इक्का-दुक्का घटनाएं होती रहती है। बाकी मजदूरों को लाने की पूरी प्रक्रिया सफल रही।
सीएम ने कहा, ‘मार्च के अंत तक बाहर फंसे लोगों के फोन आने शुरू हुए। तब हमने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि प्रवासी मजदूरों को लाने की व्यवस्था की जाए। पहले तय हुआ कि मजदूरों को बस से लाया जाए, लेकिन हमने कहा कि ट्रेन से आएंगे तो ज्यादा सुविधा होगी। हम केंद्र सरकार के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने ट्रेन का इंतजाम किया।’
सीएम ने आगे कहा कि ट्रेन से बडी संख्या में लोग लौटे और ज्यादा बेहतर तरीके से आए। इक्का-दुक्का घटना तो घट सकती है। ट्रेनों से आने में लोगों को काफी सहूलियत हुई।
सीएम नीतीश ने कहा क्वारंटीन सेंटर खत्म हो जाने पर अगर कोई कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो उसे आइसोलेशन सेंटर में रखा जाएगा। बिहार में बनाए गए आइसोलेशन सेंटर में 40 हजार की क्षमता है। कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाके लिए तीन खास अस्पतालों में 2344 बेड का इंतजाम है।
सीएम ने बताया कि क्वारंटीन सेंटर में एक शख्स पर 14 दिनों में 5300 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। अब तक हम एक करोड़ 62 लाख लोगों को एक-एक हजार रुपये दिया जा चुका है। 85 लाख पेंशनधारियों को 3 महीने का अतिरिक्श पेंशन दिया गया है। 200 से अधिक आपदा राहत केंद्र संचालित किया गया, जिसमें 74 लाख लोग लाभांवित हुए।
मालूम हो कि मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से उतरते ही एक महिला की मौत हो गई थी। महिला की मौत के बाद उसका बच्चा उसे जगाने की कोशिश कर रहा था। यह तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। महिला के साथ गुजरात से आए रिश्तेदार ने बताया कि ट्रेन में पर्याप्त खाना और पानी मिला था। महिला के पति इस्लाम ने कुछ समय पहले से उससे अलग रहने लगा है। महिला के रिश्तेदार ने बताया कि स्टेशन पर उतरते ही महिला की अचानक मौत हो गई। उन्हें कटिहार जाना था।
इस महिला की ही तरह सिर्फ बिहार में ट्रेन में करीब 7 लोग दम तोड़ चुके हैं। भागलपुर, बरौनी और अररिया स्टेशन पर एक-एक व्यक्ति की मौत भी इसी तरह हुई। मुजफ्फरपुर स्टेशन पर डेढ़ साल के बेटे का शव गोद मे लिए पिता ने बताया कि ट्रेन में 4 दिन तक पत्नी को खाना नहीं मिला तो दूध नहीं उतरा, बच्चा भी भूखा रह गया, ऊपर से भीषण गर्मी। रास्ते में ही तबियत बिगड़ी और यहां आते आते मौत हो गयी। इसी तरह मुंबई से सीतामढ़ी आ रहे एक परिवार में भी एक बच्चे की मौत कानपुर में हो गयी।
जबकि पश्चिमी चंपारण का रहने वाला मृत बच्चा बिहार के बाहर से ट्रेन से पटना पहुंच कर ट्रेन से मुजफ्फरपुर पहुंचा था। इससे जंक्शन पर अफरातफरी मच गई। प्रवासियों में नाराजगी हो गई। इसकी सूचना पर रेल डीएसपी रामकांत उपाध्याय और जीआरपी प्रभारी नंद किशोर सिंह पहुंचे दोनों के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
-एजेंसियां

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