नेपाल की हरकत ने संबंध बिगाड़े, अब सामान्य करने की जिम्मेदारी भी नेपाल पर: भारत

काठमांडू। भारत ने नेपाल पर अपना रुख कड़ा कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक भारत ने साफ कर दिया है कि नेपाल की हरकतों ने मुश्किल स्थिति पैदा कर दी है और अब बातचीत के लिए सकारात्मक और अनुकूल माहौल बनाने की जिम्मेदारी नेपाल सरकार की है।
नेपाल ने भारत के विरोध के बावजूद अपने विवादित नक्शे से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को संसद में पेश किया। इस नक्शे में भारत के तीन इलाको लिपुलेख, लिंपियाधुरा और कालापानी को शामिल किया गया है। नेपाली संसद के निचले सदन में इसे मंजूरी मिल चुकी है।’
सूत्रों के मुताबिक भारत ने कहा है कि हालिया दिनों में नेपाल की मौजूदा सरकार ने राजनीतिक कारणों से एकतरफा फैसले लिए हैं। भारत ने दोनों देशों के बीच सीमा के विवाद को सुलझाने के लिए बार-बार लगातार नेपाल के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखा लेकिन इसकी अनसुनी करते हुए नेपाल की दोनों संसद ने ऐसा नक्शा पास किया जिसपर न सिर्फ भारत को आपत्ति है बल्कि इसका कोई आधार भी नहीं रहा है।
हालात को सामान्य करने की जिम्मेदारी नेपाल पर
सोमवार को भारत सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि अब चूंकि नेपाल ने ऐसी हरकत की है तो अब हालात को सामान्य करने की जिम्मेदारी भी नेपाल पर है। अब दोनों देशों के बीच आगे संबंध किस तरह बढ़ता है वह नेपाल के रुख पर निर्भर करेगा। नेपाल ने अपनी हरकतों से हालात को कठिन बना दिया है। इसके साथ ही भारत ने संकेत दिये कि वह नेपाल की हरकतों पर आंख मंद कर नहीं रहेगा।
दोनों देशों के बीच हालिया विवाद के बीच पहली बार भारत की ओर से विस्तार से अपना रूख रखते हुए सरकार से जुड़े उच्चस्तरीय अधिकारी ने कहा कि नक्शे को जारी करने के बाद नेपाल ने इस पर और रिसर्च करने के लिए एक्सपर्ट की बनाई। भारत ने कहा कि मानचित्र को जारी करने के बाद कमेटी बनाने से साफ हो गया कि यह महज राजनीतिक लाभ लेने के लिए किया गया न कि इसके पीछे कोई जमीनी आधार था। भारत ने कहा कि चाहे 1997 हो या 2014 या फिर 2019, इन सभी सालों में भारत ने बहुत अच्छे माहौल में सीमा विवाद को हल करने की पहल की लेकिन नेपाल ने ही बहुत उत्साह नहीं दिखाया।
नेपाल को दी जा रही मदद पर कोई असर नहीं
मौजूदा संकट के बारे में कहा गया कि महज एक महीने के अंदर भारत ने सचिव स्तर की बातचीत के 2 ऑफर दिए। कोरोना संकट के बीच वर्चुअल बातचीत के बारे में नेपाल सरकार से संपर्क किया गया लेकिन सभी ऑफर पर नेपाल की ओर से कोई पहल नहीं की गयी। भारत ने आगे जल्दबाजी में बातचीत की पहल अपनी ओर से नहीं करने का संकेत देते हुए कहा कि अब बातचित का माहौल बनाने की जिम्मेदारी नेपाल पर है। दोनो देशो के बीच गहरे सम्बद्ध रहे हैं। हालांकि खराब होते संबंध की आशंका के बीच भारत ने यह भी साफ किया कि नेपाल में भारत की मदद से चल रही अलग-अलग प्रोजेक्ट पर इसका कोई असर नहीं होगा।
कोरोना पर भी राजनीति
नेपाल पीएम के यह आरोप पर की उनके देश मे 85 फीसदी मामले भारत से गए हैं, भारत सरकार के सीनियर अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार की मदद और आग्रह से उनके ही नागरिक को वहाँ भेजा गया। एक बार वहां जाने के बाद वहां उनके स्वास्थ्य की जांच करना उनकी जिम्मेदारी थी। भारत ने कहा कि बीमारी के लिए जिम्मेदार में किसी एक देश का नाम लेना कहीं न कहीं राजनीतिक रूप से ग्रसित था। अधिकारी ने कहा कि वहां कोविड से निबटने में सरकार की विफलता कर खिलाफ प्रोटेस्ट भी हो रहे हैं और संभव है कि उसे छुपाने के लिए इस तरह के आरोप लग सकते हैं।
सोनबरसा फायरिंग पर अभी कोई जवाब नहीं
बिहार के सीतामढ़ी जिले में सोनबरसा इलाके में नेपाल पुलिस की कार्रवाई में एक भारतीय की गयी जान के मामले में भारत ने कहा कि नेपाल सरकार के सामने कड़ी आपत्ति जताई गई है लेकिन वहां के गृह मंत्रालय की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। भारत ने कहा कि तत्काल पहल से ही बाकी बंधकों को छुडवाने में मदद मिली थी।
बॉर्डर पर फायरिंग के बाद नेपाल का नया दांव
अधिकारी ने बताया कि भारत ने नेपाल से बातचीत के लिए हमेशा सकारात्मक रुख दिखाया है और नेपाली संसद के निचले सदन में विवादित नक्शे से संबंधित विधेयक पर मतदान से पहले भी उसके साथ संपर्क साधा गया। वर्चुअल बातचीत और विदेश सचिव के दौरे की भी पेशकश की गई लेकिन नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली अपनी जिद पर अड़े रहे और उन्होंने विधेयक संसद में पेश कर दिया। हैरानी की बात है कि उन्होंने अपने देश के लोगों को भारत की पेशकश के बारे में नहीं बताया।
रोटी-बेटी का रिश्ता
इससे पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि लिपुलेख तक की सड़क निर्माण के बाद भारत और नेपाल के बीच जो गलतफहमी पैदा हुई है, उसका हल निकाला जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उत्तराखंड जन संवाद को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्ते प्राचीन और ऐतिहासिक के साथ-साथ सांस्कृतिक भी रहे हैं । बाबा केदार और पशुपति नाथ को अलग नहीं माना जा सकता। गोरखा रेजिमेंट के शौर्य को भूला नहीं जा सकता। गोरखा रेजिमेंट के उद्घोष में जय महाकाली का जिक्र भी इसे साबित करता है। भारत और नेपाल के बीच का रिश्ता रोटी-बेटी का रिश्ता है, ऐसे में दुनिया की कोई ताकत इसको तोड़ नहीं सकती।
-एजेंसियां

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