नेपाल: ओली की सत्ता को बचाने के लिए फिर आगे आईं चीनी राजदूत

काठमांडू। चीन के इशारे पर नाच रहे नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सत्‍ता को बचाने के लिए नेपाल में चीनी राजदूत हाओ यांकी एक बार‍ फिर से आगे आई हैं। चीनी राजदूत ने ओली से करीब दो घंटे तक मुलाकात की। ओली बनाम पुष्‍प कमल दहल ‘प्रचंड’ की इस लड़ाई में चीनी राजदूत के कूदने का अब खुद नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी में जोरदार विरोध हो रहा है।
चीनी राजदूत ने पीएम ओली से मुलाकात की और करीब दो घंटे चर्चा की। एक और सूत्र के मुताबिक यान्की और ओली ने सत्ताधारी पार्टी के एकीकरण की प्रक्रिया और पार्टी के अंदर मौजूदा मतभेदों को सुलझाने पर चर्चा की। एक सूत्र ने बताया कि दोनों ने पार्टी को टूटने से बचाने पर और सरकार बनाने पर चर्चा की है। यान्की ने विवाद खत्म करने के लिए समझौता करने पर जोर दिया है।
दहल ने ओली की गतिविधियों को ‘अक्षम्य’ करार दिया
इससे पहले जब नेपाल के राजनीतिक संकट में चीनी राजदूत यान्की ने ओली की मदद के लिए दखल दिया था तो इसे लेकर वहां काफी विवाद पैदा हुआ था। इसके बाद दावा किया गया था कि अब चीनी राजदूत सीधे प्रधानमंत्री से नहीं मिल पाएंगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। ओली और चीनी राजदूत की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई जब सत्ताधारी नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के अंदर असंतोष बहुत ज्‍यादा बढ़ गया है।
पीएम ओली ने को-चेयर पुष्प कमल दहल को सचिवालय में होने वाली बैठक स्थगित करने का प्रस्ताव दिया जबकि दहल ने इसे मानने से इनकार कर दिया। यह बैठक आयोजित की गई लेकिन इसमें कोई फैसला नहीं किया जा सका। अब 28 नवंबर को बैठक होगी। इससे पहले हुई बैठक में दहल ने एक दस्तावेज पेश कर ओली की गतिविधियों को ‘अक्षम्य’ करार दिया था और उनका इस्तीफा मांगा था। उन्होंने ओली को पीएम पद के लिए अयोग्य भी करार दिया था।
इस राजनीतिक उथल पुथल के बीच ओली के चीनी राजदूत से मिलने का खुद सत्‍तारूढ़ नेपाल कम्‍युनिस्‍ट में ही विरोध शुरू हो गया है। पार्टी की स्‍टैंडिंग कमिटी के मेंबर रघुजी पंत ने कहा, ‘यह दोनों पक्षों के मुलाकात का सही समय नहीं था। वह भी तब जब हमारी पार्टी के काम करने का एक तरीका है।’ हाओ यांकी के इस कदम से अब यह संदेह पैदा होता जा रहा है कि कम्‍युनिस्‍ट पार्टी वास्‍तव में खुद से काम कर रही है या चीनी राजदूत के इशारे पर।
‘ओली और हाओ यांकी की यह मुलाकात अनुचित’
चीनी राजदूत ने ओली से यह मुलाकात ऐसे समय पर की है जब 21 अक्‍टूबर को नेपाली पीएम ने अकेले में भारत की खुफिया एजेंसी RAW के चीफ से मुलाकात की थी। ओली इस मुलाकात को लेकर भी घिरे हुए हैं। नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व विदेश मंत्री प्रकाश शरण कहते हैं कि इस तरह की खुलेआम मुलाकात राष्‍ट्रीय संप्रभुता को कमजोर करती है। साथ ही बड़ी शक्तियों में प्रतिस्‍पर्द्धा को बढ़ाती है।
नेपाल कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के स्‍टैंडिंग कमिटी के एक और सदस्‍य लीलामणि पोखरेल ने कहा कि ओली और हाओ यांकी की यह मुलाकात अनुचित थी। उन्‍होंने कहा, ‘एक राजदूत प्रधानमंत्री से नहीं मिल सकती हैं। एक राजदूत के साथ पार्टी के आंतरिक मामलों के बारे में चर्चा करना अच्‍छा नहीं है। बता दें कि लंबे समय से नेपाली प्रधानमंत्री चीनी राजदूत के साथ अपनी मुलाकातों को लेकर विवादों में हैं।
-एजेंसियां

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