श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत के लिए नेहरू, काटजू और शेख अब्‍दुल्‍ला जिम्‍मेदार

अगरतला। त्रिपुरा के राज्‍यपाल तथागत रॉय ने भारतीय जनसंघ के संस्‍थापक श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, पूर्व गृहमंत्री के एन काटजू और जम्‍मू-कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री शेख अब्‍दुल्‍ला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रॉय ने बलिदान दिवस पर ट्वीट कर कहा कि एक साजिश के तहत मुखर्जी को जम्‍मू-कश्‍मीर ले जाया गया जो भारतीय सुप्रीम कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। उन्‍होंने कहा कि हार्ट अटैक आने पर उनके इलाज में लापरवाही बरती गई। नेहरू और काटजू श्रीनगर में होने के बाद भी उन्‍हें देखने तक नहीं गए।
रॉय ने ट्वीट कर कहा, ‘आज बलिदान दिवस है। आज ही के दिन डॉक्‍टर श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी नजरबंदी के दौरान श्रीनगर में शहीद हुए थे। उन्‍हें साजिश के तहत जम्‍मू-कश्‍मीर भेजा गया ताकि वह भारतीय सुप्रीम कोर्ट के क्षेत्राधिकार से बाहर रह सकें। जानलेवा हार्ट अटैक आने के बाद उनके इलाज में आपराधिक स्‍तर की लापरवाही बरती गई और यह किसी और ने नहीं बल्कि शेख अब्‍दुल्‍ला ने किया था।’
उन्‍होंने कहा, ‘संभवत: लोकसभा के सबसे महत्‍वपूर्ण सदस्‍य ने अपना अंतिम समय अनाथ की तरह छोटे से हवादार कमरे में बिताया। उस कमरे में टेलिफोन तक नहीं था। साथ ही वह श्रीनगर कस्‍बे से काफी दूर था। नेहरू और उनके गृहमंत्री के एन काटजू ने उनके (मुखर्जी के) हिरासत के दौरान श्रीनगर का दौरा किया था लेकिन उनसे 5 मिनट मिलने के लिए नहीं जा सके।’
टैक्‍सी में ले जाया गया हॉस्पिटल
राज्‍यपाल ने कहा, ‘हार्ट अटैक आने के बाद उन्‍हें (डॉक्‍टर मुखर्जी को) हॉस्पिटल में एंबुलेंस में नहीं बल्कि टैक्‍सी में ले जाया गया, वह भी बैठाकर। हॉस्पिटल में भी उन्‍हें महिलाओं के वॉर्ड में ले जाया गया जबकि उनके जैसा व्‍यक्तित्‍व सर्वश्रेष्‍ठ चिकित्‍सा सुविधाओं का हकदार था। वहां पर डॉक्‍टर मुखर्जी की सुबह 3.40 बजे मौत हो गई। इस दौरान कोई हमदर्द उनके साथ नहीं था।’
बता दें कि डॉक्‍टर मुखर्जी कश्‍मीर से धारा-370 को समाप्त करने का समर्थन किया था। अगस्त 1952 में उन्‍होंने जम्मू में आयाजित विशाल रैली में संकल्प व्यक्त किया था कि या तो वह जम्‍मू कश्‍मीर की जनता को भारतीय संविधान प्राप्त कराएंगे या फिर इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये अपना जीवन बलिदान कर देंगे। उन्होंने तत्कालीन नेहरू सरकार को चुनौती दी तथा अपने दृढ़ निश्चय पर अटल रहे। अपने संकल्प को पूरा करने के लिए वह 1953 में बिना परमिट लिए जम्मू-कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। कश्‍मीर पहुंचते ही डॉक्‍टर मुखर्जी गिरफ्तार कर नजरबंद कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई।
-एजेंसियां

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