राडिया की नीयत में खोट का ही नतीजा है ‘नयति’ का इस “नियति” को प्राप्‍त होना, 5 वर्ष पहले जता दी थी आशंका

28 फरवरी 2016 को मथुरा में नयति हॉस्‍पिटल का उद्घाटन करते उद्योगपति रतन टाटा। साथ हैं चेयरपरसन नीरा राडिया।

28 फरवरी 2016 को देश के प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा के हाथों जब “2G स्‍पैक्‍ट्रम” घोटाला फेम और “पनामा लीक्‍स” चर्चित महिला लाइजनर “नीरा राडिया” ने योगीराज भगवान श्रीकृष्‍ण की नगरी में ‘नयति’ के नाम से सुपर स्पेशलिटी हॉस्‍पिटल का उद्घाटन कराया था तो ऐसा लगा जैसे ईश्‍वर ने ब्रजवासियों की बात सुन ली क्‍योंकि मथुरा जनपद तब स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के मामले में काफी पिछड़ा हुआ था।
लेकिन कॉरपोरेट लॉबिस्‍ट नीरा राडिया द्वारा समाजसेवा की आड़ लेकर कृष्‍ण नगरी में खोला गया ‘नयति’ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बहुत जल्‍द नित-नए विवादों का केंद्र बन गया लिहाजा Legend News ने 23 जून 2016 को “नीरा राडिया के नयति की नीयत में ही खोट लगता है” शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की।
इस खबर से बौखलाकर ‘नयति’ की ओर से उसकी लॉ फर्म ARCINDO Law Advotactes & Solicitors द्वारा लीगल नोटिस भी भेजा गया किंतु Legend News की और से जब इस लॉ फर्म को तथ्‍यों सहित जवाब दिया गया और किसी भी सूरत में कोई खंडन न छापने तथा केस लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार रहने को कहा गया तो ‘नयति’ के प्रबंधतंत्र को सांप सूंघ गया।
आखिर ‘नयति’ ने भविष्‍य में शिकायतें ठीक करने का आश्‍वासन देकर जैसे-तैसे अपनी साख बचाने में ही भलाई समझी।
बहरहाल, 5 साल पहले अपनी खबर के माध्‍यम से “लीजेण्‍ड न्‍यूज़” द्वारा लिखी गईं वो लाइनें अब सच साबित होती दिखाई दे रही हैं जिनमें आशंका जताई गई थी कि यही हाल रहा तो ‘नयति’ बहुत जल्‍द बंद हो जाएगा क्‍योंकि नयति के मालिकानों का मथुरा जैसे विश्‍व प्रसिद्ध धार्मिक स्‍थान पर अत्‍याधुनिक सुविधाओं से युक्‍त हॉस्‍पिटल खोलने का मकसद चाहे जो भी हो, कम से कम जनसेवा तो नहीं लगता।
23 जून 2016 को लिखी गई इस पूरी खबर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्‍लिक करके पढ़ सकते हैं-
https://bhrashtindia.blogspot.com/2016/06/blog-post_23.html
अब नई खबर यह है कि “नयति हॉस्‍पिटल” में फिलहाल ताला डाल दिया गया है क्‍योंकि उस पर एक ओर जहां बिजली विभाग का 01 करोड़ 33 लाख रुपयों का भारी-भरकम बिल बकाया है वहीं दूसरी ओर स्‍टाफ को भी कई माह से वेतन नहीं दिया गया है। हालांकि हॉस्‍पिटल में ताला लगने का कारण ‘नियति’ का प्रबंधतंत्र कुछ और बता रहा है। उसका कहना है कि हॉस्‍पिटल में मरम्‍मत आदि का काम कराए जाने की वजह से उसे 3 महीने के लिए बंद किया गया है किंतु इस कथन में सच्‍चाई कम प्रतीत होती है क्‍योंकि नयति द्वारा बताए गए 3 माह के समय में से पूरे दो माह का समय बीत चुका है और हॉस्‍पिटल में ऐसी कोई गतिविधि नजर नहीं आ रही जिससे उसके दोबारा खुलने की संभावना महसूस होती हो।
जो भी हो, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि ‘नियति’ आज जिस दशा को प्राप्‍त है उसके पीछे तमाम लोगों की बद्दुआओं के साथ-साथ मालिकानों की ‘बदनीयती’ एक बड़ा कारण है अन्‍यथा ऐसा न होता कि अनेक शिकायतों के बावजूद ‘नयति’ के प्रबंधतंत्र पर किसी पीड़ित के आंसुओं का कोई प्रभाव न पड़ता और वो वर्षों तक मनमानी करते हुए हॉस्‍पिटल को सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने का जरिया बनाए रखते।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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