संस्कृति विवि में राष्ट्रीय सेमिनार, प्रबंधन क्षेत्र के रुझानों पर चर्चा

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रबंधन के क्षेत्र में नए और उभरते रुझानों के पर विस्तार से चर्चा हुई। सेमिनार में भाग लेने आए विद्वानों ने छात्र-छात्राओं को बताया कि आज कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां प्रबंधन की उपयोगिता महसूस न की जा रही हो। प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए काम करने को विशाल क्षेत्र इंतजार कर रहा है, जरूरत बस सही शिक्षा और कौशल हासिल करने की है।

राष्ट्रीय सेमिनार में इंडो यूरोपियन चैंबर ऑफ स्मॉल मीडियम ऐंटरप्राइजेज के प्रेसीडेंट विजय तिवारी ने कहा कि आज हमारा देश विश्व गुरु बनने के अभियान पर अग्रसर है। इसके पीछे हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महती इच्छा छिपी है।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में प्रबंधन के नए-नए आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को ट्रेंड फालोअर (पथ के अनुयायी) की जगह ट्रेंड सैटर (पथ प्रदर्शक) बनने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने पंचायती राज्य के 29 विषयों की बारीकी और उसमें प्रबंधन की उपयोगिता को बड़े सहज ढंग से विद्यार्थियों को समझाया।

वी मार्ट की एचआर प्रभारी कुमारी आशु गोस्वामी ने कहा कि यदि हम अपने काम के प्रति निष्ठावान होकर काम करते हैं तो निश्चित आगे बढ़ते हैं। उन्होंने मानव संसाधन प्रबंधन के विभिन्न आयामों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अपनी उपयोगिता बनाने के लिए हमारा मिशन और विजन साफ और स्पष्ट होना चाहिए।

डिफेंस रिसर्च एंड डवलपमेंट आर्गेनाईजेशन(डीआरडीओ) में वरिष्ठ वैज्ञानिक शैलेंद्र जायसवाल ने कहा कि आज हमारे सामने जो समास्याएं आ रही हैं, उनके समाधान में प्रबंधन बड़ी भूमिका निर्वाह कर सकता है।

विवि के कुलपति डा. राणा सिंह ने प्रबंधन में नए रुझानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। सेमिनार का शुभारंभ विवि के एकेडमिक डीन अतुल कुमार के स्वागत भाषण से हुआ। अंत में संस्कृति विवि के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स विभाग के विभागाध्यक्ष सीपी वर्मा ने अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

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