संस्कृति विवि में राष्ट्रीय ऑप्टोमैट्री सेमिनार का आयोजन

मथुरा। संस्कृति विश्वविद्यालय में ऑप्टोमैट्री विभाग एवं स्कूल ऑफ मेडिकल एलॉइड साइंस के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय ऑप्टोमैट्री सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में आए विशेषज्ञ वक्ताओं ने छात्र-छात्राओं को कांटेक्ट लैंस और नेत्रों को सुरक्षित रखने के विषय में विस्तार से जानकारियां दीं।

सेमिनार में आगरा से आए विशेषज्ञ एबी श्रीवास्तव ने कांटेक्ट लैंस के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आर्थो कांटेक्ट लैंस का उपयोग करके अपवर्तक त्रुटि को (refractive error) को कैसे दूर किया जा सकता है। आपको चाहिए कि कांटेक्ट लैंस के बारे में अपने अध्ययन को और अधिक विस्तार दें, ताकि आप इस क्षेत्र में पारंगत हो सकें।

लखनऊ से आए विशेषज्ञ मनीष मायर ने कम दृष्टि वाले रोगियों के लिए उपयुक्त उपकरण के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनाए जा रहे नवीतम उपकरणों की भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई खोजों से उपकरण निर्माण में बड़ा बदलाव आया है। कम दृष्टि नेत्र रोग वालों के लिए अब ऐसे आधुनिक उपकरण बन रहे हैं जो आखों के लिए आरामदेह हैं।

इसी क्रम में दिल्ली से आए नेत्र रोग विशेषज्ञ आनंद मती ने आंखों के रोग मायोपिया के बारे में जानकारी देते हुए इसके नियंत्रण के बारे में उपयोगी जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को केरेटोकोनस के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह एक असामान्य स्थिति है जिसमें आमतौर पर गोलाकार, गुम्बदनुमा रहने वाला कॉर्निया पतला हो जाता है और कोन की तरह के आकार में उभर आता है। यह असामान्य आकार में प्रविष्ट होने वाले प्रकाश को रेटिना पर उचित प्रकार से केंद्रित होने से रोकता है और दृष्टि में विकार उत्पन्न करता है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में इस रोग को आसानी से ठीक किया जा सकता है। गंभीर मामलों में कॉर्निया के प्रतिस्थापन की आवश्यकता हो सकती है।

सेमिनार में ऑप्टोमैट्री की छात्रा सुमन ठाकुर, विवेक चौहान, अंकितो स्तुति और पंकज कुमार ने पेपर प्रजेंटेशन और पीपीटी प्रेजेंटेशन में बताया क‍ि कैसे हम अपनी आंख को सुरक्षित रख सकते हैं। सेमिनार में विवि के कुलपति डा. राणा सिंह, डीन एकेडमिक डा. अतुल कुमार, डा. पल्लवी आदि मौजूद रहे।

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