म्यांमार की सैन्य सरकार ने बौद्ध भिक्षु अशीन विराथु को रिहा किया

म्यांमार की सैन्य सरकार ने विवादित बौद्ध भिक्षु अशीन विराथु को रिहा कर दिया है. विराथु मुस्लिम विरोधी पहचान के लिए जाने जाते हैं.
इससे पहले उनके ख़िलाफ़ नागरिक सरकार ने राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया था. फ़रवरी में हुए सैन्य तख़्तापलट में नागरिक सरकार को हटा दिया गया था.
फ़ायरब्रांड भिक्षु को अपने सैन्य समर्थित विचारों के लिए भी जाना जाता है.
मुसलमानों और ख़ासकर रोहिंग्या समुदाय को निशाना बनाकर दिए गए उनके भाषण के कारण उन्हें ‘बुद्धिस्ट बिन लादेन’ भी नाम दिया गया.
बीते कुछ सालों में वो सैन्य समर्थित रैलियों में नज़र आते रहे हैं जहां उन्होंने राष्ट्रवादी भाषण दिए और म्यांमार की नेता आंग सान सू ची और उनकी तत्कालीन सरकार नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी की आलोचना की.
पिछले साल नवंबर में किया था सरेंडर
साल 2019 में उन पर नागरिक सरकार के ख़िलाफ़ ‘नफ़रत और अवमानना’ भड़काने का मामला दर्ज किया गया था.
विराथु इसके बाद फ़रार हो गए थे लेकिन पिछले साल नवंबर में उन्होंने प्रशासन के आगे सरेंडर कर दिया था. इसके बाद से उनके ट्रायल का इंतज़ार था.
सोमवार को सैन्य सरकार ने कहा कि उनके ख़िलाफ़ सभी दर्ज मामलों को हटा दिया गया है. इन मामलों को क्यों हटाया गया है इसका प्रशासन ने कोई कारण नहीं बताया है.
सैन्य सरकार ने यह भी कहा है कि उनका सैन्य अस्पताल में इलाज चल रहा है. विराथु के स्वास्थ्य की स्थिति अभी तक साफ़ नहीं हो पाई है.
एक दशक पहले तक मांडले के इस बौद्ध भिक्षु के बारे में बहुत कम लोगों ने सुना था.
1968 में जन्मे अशीन विराथु ने 14 साल की उम्र में स्कूल छोड़ दिया और भिक्षु का जीवन अपना लिया.
विराथु को लोगों ने तभी जाना जब वे 2001 में राष्ट्रवादी और मुस्लिम विरोधी गुट ‘969’ के साथ जुड़े. म्यांमार में इस संगठन को कट्टरपंथी माना जाता है, लेकिन इसके समर्थक इन आरोपों से इंकार करते हैं.
साल 2003 में उन्हें 25 साल जेल की सज़ा सुनाई गई, लेकिन साल 2010 में उन्हें अन्य राजनीतिक बंदियों के साथ रिहा कर दिया गया.
-एजेंसियां

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