मुल्‍ला नसरुद्दीन और एक बीयर बार का मालिक

मुल्‍ला नसरुद्दीन जिस बियर बार में जाता था वहां के मालिक की शक्‍ल से उसे बहुत चिढ़ थी।
एक दिन मुल्‍ला ने इस बीयर बार में पहुंच कर बीयर का गिलास अपने लिए मंगवाया और फिर उसे बीयर बार के मालिक के मुंह पर उड़ेल दिया।
इसके बाद उसने मालिक से अपने कृत्‍य के लिए माफी मांगी और बताया कि उसे बहुत अफसोस है।
मालिक ने मुल्‍ला को क्षमा करते हुए सहानुभति पूर्वक पूछा कि आखिर उसने ऐसा किया क्‍यों ?
इस पर मुल्‍ला ने बताया कि वह एक किस्‍म की मानसिक दुर्बलता का शिकार है, जिस कारण ऐसा कर बैठा।
बार मालिक ने मुल्‍ला से कहा, आप किसी मनोचिकित्‍सक से अपना इलाज कराएं तो आपकी यह दुर्बलता ठीक हो जाएगी।
कुछ दिनों के अंतराल पर मुल्‍ला ने एकदिन फिर बार मालिक के मुंह पर बीयर उड़ेल दी।
जाहिर है कि इस बार बार मालिक गुस्‍से से भर उठा और कहने लगा- मैंने आपसे कहा था न कि आप किसी मनोचिकित्‍सक के पास जाकर अपना इलाज कराएं।
मालिक का गुस्‍सा शांत करते हुए मुल्‍ला ने उसे बताया कि मैं एक मनोचिकित्‍सक से अपना इलाज करा रहा हूं।
मुल्‍ला की बात सुनकर मालिक कुछ नर्म पड़ा और कहने लगा- ऐसे इलाज से क्‍या फायदा, जब कुछ लाभ ही दिखाई नहीं दे रहा।
वाह जनाब, आप कैसे कह सकते हैं कि मुझे उसके इलाज से फायदा नहीं हो रहा। निश्‍चित ही मुझे फायदा हो रहा है। पहली बार मुझे आपके मुंह पर बीयर उड़ेलते हुए लज्‍जा का अनुभव हुआ था किंतु इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। मुल्ला का जवाब था।