ऑनलाइन रीटेल कारोबार पर दबदबे के लिए जियो जैसी स्ट्रेटेजी अपना रहे हैं मुकेश

नई दिल्‍ली। भारत में ऑनलाइन रीटेल का कारोबार बहुत तेजी से फैल रहा है। देश के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी भी जियोमार्ट के जरिए ऑनलाइन रीटेल में कूद चुके हैं और वे ऐमजॉन और वालमार्ट स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ई-कॉमर्स का कारोबार 2026 तक 200 अरब डॉलर ( 1 डॉलर 75 रुपये के हिसाब से करीब 15 लाख करोड़ रुपये) का हो जाएगा। अभी तक इस पर ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट के बीच टक्कर था। अब इसमें जियोमार्ट की भी एंट्री हो चुकी है।
जियो जैसी स्ट्रेटेजी पर काम
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ऑनलाइन रीटेल में दबदबा बनाने के लिए मुकेश अंबानी ने जियो वाली स्ट्रेटेजी अपनाई है। चार साल पहले 2016 में जब जियो आई थी तो लोगों को मुफ्त में कॉलिंग और 2 डॉलर यानी करीब 150 रुपये में सस्ता डेटा की आदत लगाई गई। आज जियो के सबसे ज्यादा यूजर्स हैं और वोडाफोन आइडिया बंद होने के कगार पर है जबकि एयरटेल के लिए सर्वाइव करना मुश्किल हो रहा है।
रेकॉर्ड बिक्री
इस फेस्टिव सीजन में ऑनलाइन रीटेल ने रेकॉर्ड बिक्री की। दशहरा पर आयोजित फेस्टिव सेल में शुरुआती चार दिनों मे ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट ने करीब 29000 करोड़ रुपये की बिक्री की। दिवाली से पहले जियोमार्ट पर सेल का आयोजन किया गया है। यहां फेस्टिव प्रोडक्ट पर 50 फीसदी तक की छूट ऑफर की जा रही है।
ऑफलाइन रीटेल में 12000 से ज्यादा आउटलेट
रीटेल सेक्टर में मुकेश अंबानी का अलग-अलग बिजनेस है। रिलायंस ट्रेड पर सैमसंग के कई स्मार्टफोन कॉम्पिटिटर के मुकाबले काफी सस्ता मिल रहा है। हाल ही में रिलायंस रीटेल ने फ्यूचर ग्रुप से बिग बाजार समेत उसके होलसेल और लॉजिस्टिक बिजनेस को खरीदा है। हालांकि इस पर ऐमजॉन की तरफ से रोक की अपील की गई है और सिंगापुर कोर्ट ने डील पर स्टे भी लगाया है। अब ऑफलाइन रीटेल में रिलायंस के पास 12000 से ज्यादा उाउटलेट का नेटवर्क हो गया। जियो के 40 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं और कंपनी ने फेसबुक के साथ करार किया है। ऐसे में उसके पास कस्टमर बेस डेटा और रिच काफी आसान हो गया है।
रिलायंस रीटेल में अब तक आए 6 अरब डॉलर
जियो में विनिवेश के जरिए मुकेश अंबानी ने 20 अरब डॉलर जुटाए और रिलायंस इंडस्ट्रीज को नेट डेट फ्री बनाया। अब रिलायंस रीटेल में विनिवेश हो रहा है और अब तक 6 अरब डॉलर का निवेश आ चुका है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरामको रिलायंस के ऑयल और केमिकल बिजनेस में 20 फीसदी हिस्सेदारी खरीद सकती है। कुल मिलाकर रीटेल सेक्टर में जियो जैसी सफलता हासिल करने के लिए मुकेश अंबानी के पास फंड का अभाव नहीं होगा। कंपनी कर्जमुक्त पहले हो चुकी है। रिलायंस रीटेल का विनिवेश जारी है और सऊदी अरामको से होने वाली डील की रकम बहुत बड़ी होगी।
-एजेंसियां

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