मुफ्ती ने की मोदी और राजनाथ से मुलाकात, 2-3 महीने में कश्‍मीर के हालात बदलने का भरोसा दिलाया

Mufti meets Modi and Rajnath, assures to change Kashmir's situation in 2-3 months
मुफ्ती ने की मोदी और राजनाथ से मुलाकात

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में जारी हिंसा और BJP-PDP के रिश्तों में आई तल्खी के बीच सूबे की सीएम महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। करीब आधे घंटे तक चली इस मीटिंग में कश्मीर में पत्थरबाजी की बढ़ती घटनाओं के साथ ही राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन को बचाने पर भी बातचीत हुई। मोदी के बाद मुफ्ती ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की। उन्होंने इस मुलाकात के बाद दो-तीन महीने में घाटी के हालात बदलने का भरोसा दिलाया।
Agle 2,3 mahine mein aap Jammu Kashmir ke haalaat ko bilkul badla hua paayenge: J&K CM Mehbooba Mufti after meeting HM Rajnath Singh pic.twitter.com/BpvlBheyME
—ANI (@ANI_news) April 24, 2017

The Chief Minister of Jammu and Kashmir, Ms. Mehbooba Mufti calling on the Union Home Minister, Shri Rajnath Singh, in New Delhi on April 24, 2017.
The Chief Minister of Jammu and Kashmir, Ms. Mehbooba Mufti calling on the Union Home Minister, Shri Rajnath Singh, in New Delhi on April 24, 2017.

इससे पहले पीएम के साथ बैठक के बाद मुफ्ती ने पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए बताया कि कश्मीर में अचानक बढ़े पथराव की घटनाओं, उपचुनाव में कम मतदान और हिंसा पर पीएम से बातचीत हुई। इसके अलावा गठबंधन के एजेंडे, सिंधु जल समझौते की वजह से राज्य सरकार को होने वाले नुकसान पर भी चर्चा हुई।
मुफ्ती ने कहा कि घाटी में हालात सामान्य करने के लिए एक माहौल पैदा करना होगा। पथराव के जवाब में गोली से हालात सुधरने वाले नहीं हैं। मुफ्ती ने उम्मीद जताई कि बातचीत के जरिए घाटी के हालात सुधारे जा सकते हैं। बीजेपी और पीडीपी के बीच मतभेद के सवालों पर महबूबा ने कहा कि इसे बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कश्मीर में गवर्नर रूल पर फैसला केंद्र को करना है।
महबूबा ने कहा कि मोदी बार-बार पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के रास्ते पर चलने की बात कह चुके हैं।
सीएम के मुताबिक वाजपेयी की पॉलिसी बातचीत थी, टकराव नहीं। बातचीत के जरिए मामले सुलझाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर में पहले वाजपेयी साहब के टाइम में बात हुई थी। एल के आडवाणी डेप्युटी पीएम थे। हुर्रियत के साथ बात हुई है। दूसरों से भी बात हुई है।’
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने रविवार को सुझाव दिया था कि दूसरे राज्यों को जम्मू-कश्मीर में कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। दूसरे राज्यों को घाटी के युवाओं को अपने यहां एजुकेशन के लिए आने का न्योता देना चाहिए।
नीति आयोग की ओर से जारी बयान के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर की सीएम के उस सुझाव पर हामी भरी, जिसमें सभी राज्यों से जम्मू-कश्मीर के स्टूडेंट्स में दिलचस्पी लेने की बात कही गई थी। बता दें कि यूपी और राजस्थान में हाल में कश्मीरी स्टूडेंट्स के साथ मारपीट करने के मामले सामने आए थे। माना जा रहा था कि कश्मीर में सुरक्षाबलों पर होने वाले पथराव की प्रतिक्रिया में इन घटनाओं को अंजाम दिया गया।
हार से पीडीपी की बढ़ी चिंता
पीएम और मुफ्ती की मुलाकात ऐसे वक्त में हो रही है, जब हाल ही में श्रीनगर में हुए लोकसभा उपचुनाव के दौरान हिंसक प्रदर्शन हुए थे। वोटिंग पर्सेंटेज भी काफी कम रहा था। इस चुनाव में पीडीपी ने अपनी सीट नेशनल कॉन्फ्रेंस के हाथों गंवा दी। इस सीट में पीडीपी को 2014 आम चुनाव में जीत मिली थी। मुफ्ती की अगुआई वाली राज्य सरकार को वहां हो रहे हिंसा की वजह से तीखी आलोचना का शिकार होना पड़ रहा है। वहीं, बीजेपी के राम माधव ने बीते शुक्रवार को राज्य के वित्त मंत्री और सीनियर पीडीपी नेता हसीब द्राबू से मुलाकात करके आगे की रणनीति पर बातचीत की। इस मुलाकात को राजनीतिक जानकार काफी अहमियत दे रहे हैं क्योंकि बीजेपी और पीडीपी राज्य में गठबंधन सरकार चला रहे हैं।
आम लोगों और सुरक्षाबलों का टकराव
बीते कुछ वक्त में राज्य में पत्थरबाजी की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है और आतंकवाद से जुड़ने वाले युवाओं की तादाद भी काफी बढ़ी है। ऐसे कई मौके सामने आए, जब आतंकियों से मोर्चा ले रहे सुरक्षाबलों को आम जनता के विरोध का सामना करना पड़ा। इस टकराव की वजह से एनकाउंटर के दौरान ही कुछ आम लोग भी मारे गए। अधिकारी और नेता, दोनों ने ही आम जनता से अपील की कि आम लोग इन मुठभेड़ वाली जगहों से दूर रहें लेकिन इसका कोई खास असर नहीं देखने को मिला। कुछ मौकों पर आतंकी फरार होने में भी कामयाब रहे क्योंकि उन्हें स्थानीय जनता का समर्थन हासिल है, जो उन्होंने खाने-पीने से लेकर आसरा तक उपलब्ध कराते हैं।
विपक्ष साध रहा लगातार निशाना
कश्मीर में हिंसा का मुद्दा इतना बढ़ चुका है कि कुछ वक्त पहले पीएम की अगुआई में हुई बीजेपी कोर कमेटी की बैठक में भी यह मामला उठा। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और श्रीनगर उपचुनाव में जीत हासिल करने वाले फारूख अब्दुल्ला ने तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर डाली। पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने भी घाटी के हालात को बेहद खराब बताते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। उमर ने सेना का वह कथित विडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसमें एक कश्मीरी युवक को जीप के सामने बांधकर घुमाने की बात कही गई थी। इस विडियो को लेकर खासा विवाद हुआ था, जिसके बाद सेना ने जांच के आदेश दिए थे।
खतरे में गठबंधन?
बीजेपी और पीडीपी राज्य में भीड़ की हिंसा, बढ़ते आतंकवाद और हाल में हुए श्रीनगर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कम वोटिंग को लेकर इन दिनों सार्वजनिक व निजी दोनों ही रूप से एक-दूसरे के खिलाफ बयान दे रही हैं। घाटी में पत्थरबाजों और हिंसक भीड़ से निपटने का तरीका दोनों ही ओर से हो रही बयानबाजी का केंद्र है। पीडीपी कहती है कि घाटी के हालात पर बीजेपी की राजनीति ‘टकराव को बढ़ाने वाली’ है जबकि बीजेपी का कहना है कि पीडीपी ‘तुष्टीकरण’ की राजनीति कर रही है। वहीं कश्मीर को लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस उलझन की वजह से सुरक्षा तंत्र तबाह हो रहा है।
-एजेंसी

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