मास्‍को: चीनी रक्षा मंत्री ने राजनाथ सिंह से मिलने के लिए समय मांगा

मास्‍को। पैंगोंग झील के पास में भारतीय जवानों के हाथों में जोरदार झटका खाए चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंघे आज भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मास्‍को में मुलाकात कर सकते हैं। चीनी रक्षा मंत्री ने राजनाथ सिंह से मिलने के लिए समय मांगा था। दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्‍सा लेने के लिए मास्‍को पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि रूस पर्दे के पीछे से अपने दोनों ही घनिष्‍ठ मित्र देशों भारत और चीन के बीच दोस्‍ती कराने में लगा हुआ है और यह बैठक भी रूसी प्रयासों का हिस्‍सा है।
भारत और चीन के रक्षा मंत्री ऐसे समय पर मिल रहे हैं जब पूर्वी लद्दाख में दोनों ही देशों के हजारों सैनिक, टैंक और तोपें आमने-सामने हैं। इससे पहले भी चीन के रक्षा मंत्री ने राजनाथ सिंह से मिलने की इच्‍छा जताई थी लेकिन यह मीटिंग नहीं हुई थी।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चीन के रक्षा मंत्री वेई फेंघे ने अपने समकक्ष भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ शुक्रवार को बैठक के लिए समय मांगा है। हालांकि अभी तक भारत की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत और चीन के बीच जारी तनाव को देखते हुए रूस पर्दे के पीछे से दोनों ही देशों के बीच तनाव कम करने में लगा हुआ है। द एशिया प्रोग्राम संस्‍था के डेप्‍युटी डायरेक्‍टर माइकल कुगमैन का मानना है कि रूस को यह भरोसा है कि अगर वह भारत अैर चीन के बीच मध्‍यस्‍थता करता है तो उसका फायदा होगा। उन्‍होंने कहा कि रूस इस विवाद में हस्‍तक्षेप के जरिए अ‍मेरिका को अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर नीचा दिखाना चाह रहा है।
‘रूस वस्‍तुत: इस संकट का लाभ उठा सकता है’
कुगमैन का मानना है कि रूस भारत और चीन के बीच तनाव को कम करने के लिए मध्‍यस्‍थ की भूमिका निभाना चाह रहा है। उन्‍होंने कहा, ‘रूस ने अमेरिका को उकसाया नहीं है या उसे दूर रहने की चेतावनी भी नहीं दी है। रूस वस्‍तुत: इस संकट का लाभ उठा सकता है क्‍योंकि वह उन कुछ शक्तिशाली देशों में शामिल है जिनका चीन और भारत दोनों के ही साथ घनिष्‍ठ संबंध है।’
माइकल कुगमैन ने कहा, ‘रूस के लिए यह एक मौका है ताकि प्रभाव को बढ़ाया जा सके और दो वैश्विक शक्तियों के बीच संकट में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई जा सके। इसके जरिए रूस अमेरिका को नीचा द‍िखाना चाह रहा है क्‍योंकि इस संकट में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं है जबकि मास्‍को शांति की स्‍थापना करने वाले की भूमिका निभा रहा है। मैं नहीं समझता हूं कि रूस इस विवाद से डरा हुआ है। रूस को पूरा भरोसा है कि वह इस विवाद को सुलझा सकता है।’
-एजेंसियां

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