पैंगोंग झील पर डिसइंगेजमेंट को लेकर राहुल गांधी के झूठ को रक्षा मंत्रालय ने सिलसिलेवार उजागर किया

नई दिल्‍ली। कांग्रेस के पूर्व अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने चीन सीमा पर जारी डिसइंगेजमेंट को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे। शुक्रवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में राहुल ने संसद में रक्षा मंत्री के बयान (पूर्वी लद्दाख में वर्तमान स्थिति पर) का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘कायर’ करार दिया था। राहुल के आरोपों को लेकर रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है। इसमें सीधे-सीधे राहुल का जिक्र तो नहीं है लेकिन उनकी तरफ से किए गए कई दावों की चर्चा जरूर है। राहुल ने कहा था कि भारत का इलाका पैंगोंग झील के उत्‍तरी तट पर फिंगर 4 तक है। इस बात को रक्षा मंत्रालय ने पूरी तरह गलत बताते हुए कहा है कि भारत के हिसाब से लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (LAC) फिंगर 8 पर है। रक्षा मंत्रालय ने और क्‍या-क्‍या कहा है, आइए पॉइंटवाइज आपको बताते हैं।
बयान में क्‍या-क्‍या कहा गया?
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक उसने मीडिया और सोशल मीडिया में पैंगोंग झील में जारी डिसइंगेजमेंट को लेकर किए जा रहे गलत और गुमराह करने वाले दावों का संज्ञान लिया है। मंत्रालय के मुताबिक वहां पर जो स्थिति है उसके बारे में रक्षा मंत्री संसद के दोनों सदनों को बता चुके हैं। फिर भी कुछ बातें जिन्‍हें लेकर झूठे दावे किए जा रहे हैं, उनकी सच्‍चाई इस प्रकार है:
यह कहना कि भारतीय इलाका फिंगर 4 तक है, स्‍पष्‍ट रूप से गलत है। भारत का क्षेत्र मानचित्र में दर्शाया गया है और इसमें 43,000 वर्ग किलोमीटर का वह इलाका भी शामिल है जो 1962 से चीन के अवैध कब्‍जे में है।
यहां तक कि भारत के अनुसार LAC फिंगर 8 पर है, फिंगर 4 तक नहीं। इसी वजह से भारत लगातार फिंगर 8 तक पैट्रोल करने का अधिकार जताता रहा है, चीन के साथ वर्तमान बातचीत में भी यही दोहराया गया है।
पैंगोंग झील के उत्‍तरी किनारे पर दोनों पक्षों की परमानेंट पोस्‍ट्स काफी पुरानी हैं। भारत की तरफ यह धन सिंह थापा पोस्‍ट है जो फिंगर 3 के पास है। चीन की परमानेंट पोस्‍ट फिंगर 8 के पूर्व में है। वर्तमान समझौते के अनुसार, दोनों तरफ से फॉरवर्ड तैनाती को वापस लिया जाएगा और इन परमानेंट पोस्‍ट्स पर तैनाती रहेगी।
पैंगोंग झील की फिंगर 3 और 4 के बीच क्‍या है, 5 पॉइंट्स में समझें
भारत ने इस समझौते से कोई क्षेत्र नहीं खोया है। इसके उलट, भारत ने LAC के सम्‍मान की पुर्नस्‍थापना की है और यथास्थिति में किसी एकतरफा बदलाव को रोका है।
रक्षा मंत्री के बयान में भी यह बात साफ कर दी गई थी कि कुछ समस्‍याएं हैं जिन्‍हें सुलझाना अभी बाकी है जैसे- हॉट स्प्रिंग्‍स, गोगरा और देपसांग। इन पर पैंगोंग झील में डिसइंगेजमेंट पूरा होने के 48 घंटे के भीतर चर्चा शुरू हो जाएगी।
पूर्वी लद्दाख में राष्‍ट्रहित और भूमि की रक्षा इस वजह से हो सकी क्‍योंकि सरकार ने सशस्‍त्र बलों की क्षमताओं पर पूरा विश्‍वास दिखाया। जो हमारे सैन्‍य कर्मचारियों के बलिदान से हासिल हुई उपलब्धियों पर संदेह करते हैं, वे असल में उनका अपमान कर रहे हैं।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *