मुआवज़े पर कृषि मंत्रालय ने कहा, आंदोलन में मरने वाले किसानों का रिकॉर्ड नहीं

लोकसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कहा है कि उनके पास किसान आंदोलन में मरने वालों का रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए मुआवज़े का सवाल ही नहीं उठता.
लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन करते हुए मरने वाले किसानों के आंकड़ों की जानाकारी मांगी गई और साथ ही उनके परिवार को मुआवज़े के प्रावधान को लेकर भी सवाल पूछे गए.
मंगलवार को इन सवालों के लिखित जवाब में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन को बताया कि “कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के पास इस मामले का रिकॉर्ड नहीं है इसलिए ये सवाल ही नहीं उठता.”
इसके अलावा एमएसपी लागू करने से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने कहा, “भारत सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सफारिश को ध्यान में रखते हुए हर साल उचित और औसत गुणवत्ता की 22 फसलों पर एमएसपी तय करती है. सरकार अपनी हस्तक्षेप योजनाओं के ज़रिए किसानों को लाभकारी कीमत भी प्रदान करती है. केंद्र और राज्य की एजेंसियां किसानों से एमएसपी पर खरीद भी करती हैं.”
किसान नेता क्या कहते हैं?
आंदोलन कर रहे किसान नेताओं का कहना है कि पिछले साल नंवबर से शुरू हुए धरने प्रदर्शनों के दौरान अब तक सात सौ से अधिक किसानों की मौत हुई है.
जिन तीन खेती कानूनों के विरोध किसान कर रहे थे वो तो सरकार ने संसद में निरस्त कर दिए हैं पर आंदोलन अब भी जारी है.
किसान संगठन आंदोलन के दौरान मरे किसानों के परिजनों को मुआवज़े की मांग कर रहे हैं. साथ ही वे किसानों के ख़िलाफ़ दर्ज किए गए मुकदमों को भी ख़ारिज करवाना चाहते हैं. न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का कानून बनाने की मांग तो है ही.
सरकार ने संसद को जो कुछ बताया है उस पर फ़िलहाल किसान नेताओं की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
चार दिसंबर को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार ने हमारी सभी मांगे नहीं मानी हैं इसलिए ये आंदोलन ख़त्म नहीं होगा.
किसान नेताओं को सरकार के बुलावे और संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक रद्द होने की खबरों के बीच समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक 4 दिसंबर को होने वाली है. हमारा आंदोलन ख़त्म नहीं होगा क्योंकि सरकार ने अभी तक हमारी मांगों को स्वीकार नहीं किया है.’
वहीं, किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा, ‘आज 32 किसान संगठन और वे लोग जो सरकार के साथ बातचीत के लिए जाते थे,उनकी बैठक बुलाई गई है. ग़लती से घोषणा हो गई कि आज संयुक्त किसान मोर्चे की बैठक है. बैठक में हमारे लोगों के खिलाफ दर्ज़ मामलों, MSP की कमेटी के मुद्दे पर चर्चा होगी.’
मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी करते हुए कहा था कि सरकार ने पांच लोगों को समिति के सदस्य के रूप में आमंत्रित किया है.
संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया है, “भारत सरकार की ओर से पंजाब किसान संगठन के नेता को फ़ोन आया था,वे एक समिति के लिए पांच नाम मांग रहे थे. लेकिन हमें इस बारे में कोई लिखित सूचना नहीं मिली है और ना ही समिति के बारे में कोई विवरण उपलब्ध है इसलिए इस पर टिप्पणी करना जल्दबाज़ी होगी.”
हालांकि भारत सरकार की ओर से इस समिति या इस पेशकश के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आयी है.
माना जा रहा है कि यह समिति एमएसपी को लेकर हो सकती है.
संयुक्त किसान मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया है कि बुधवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और हरियाणा किसान संगठन के बीच कोई बैठक निर्धारित नहीं है और ना ही ऐसी किसी बैठक के लिए हरियाणा सरकार से आमंत्रण मिला है.
-एजेंसियां

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