स्वच्छ भारत अभियान में कचरे की recycling की हो रही अनदेखी, DM मथुरा को ज्ञापन सौंपा

DM मथुरा को ज्ञापन सौंपा, शनिवार को बनेगी मानव श्रंखला

यमुनापार क्षेत्र में जलते शहर भर के कचरे से उत्पन्न हो रही हैं जानलेवा समस्याएँ

प्रशासन तक पीड़ितों की आवाज पहुँचाने को इंकलाबी नौजवान सभा चला रहा है अभियान

DM Mathura apprised about dumping, recycling in the memorandum
DM मथुरा को ज्ञापन में डंपिंग, रिसाइकलिंग के बारे में अवगत कराया

मथुरा। प्रधानमंत्री के बहुप्रचारित ‘‘स्वच्छ भारत अभियान’’ के शोर में एक जानलेवा संकट का सामना कर रही यमुनापार की जनता की आवाज लगातार दबती चली जा रही है। शहर भर का कचरा पिछले कई वर्षों से यमुना पार के शहजादपुर व सोनी टप्पा इलाके के सैंकड़ों एकड़ क्षेत्र में ठूँस कर जला दिया जा रहा है। इस कचरे से उत्पन्न धँुआ आसपास के कई किलोमीटर क्षेत्र की हवा को जहरीला बना कर साँस के साथ बच्चों, बूढ़ों सहित हर क्षेत्रीय निवासी के शरीर में भर कर दमा और कैंसर जैसी भयानक जानलेवा बीमारियों की बुनियाद बना रहा है। प्रदूषण के चलते कुछ लोगों की मृत्यु की खबर भी इलाके में आम है।
भूमिगत जल में भी लगातार बढ़ रहा प्रदूषण का स्तर
कचरे के इस डंपिंग यार्ड से सटी बस्तियों में भूमिगत जल अब पीने योग्य नहीं रहा है। गरीब बस्तियों के लोग आर ओ प्लान्ट से पानी खरीद कर पीने को मजबूर हो गए हैं।
गलत जगह पर स्थापित किया गया है रिसाइकिलिंग प्लान्ट
विशेषज्ञों के अनुसार कचरे की रिसाइकिलिंग के लिए लगाए जा रहे प्लान्ट की चारदीवारी को आवासीय इलाके से करीब पांच सौ मीटर की देरी पर होना चाहिए। मगर यमुनापार का डंपिंग यार्ड खुद सरकारी विभाग ‘‘डूडा’’ द्वारा बनाए गए मकानों से दो सौ मीटर से भी कम दूरी पर है। हाल ही में स्थानीय विधायक व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने भी इस प्लांट का दौरा किया था। मगर सुनने में आया है कि वे इसे किसी निर्जन स्थान पर स्थानांतरित करने की बजाय यहीं दोबारा चलवाने का प्रयास कर रहे हैं।

रिसाइकिलिंग के लिए कंपनी को मिला था ठेका मगर काम हो गया ठप

नगर पालिका परिषद् की पूर्व अध्यक्षा श्रीमती मनीषा गुप्ता जी के कार्यकाल की शुरुआत में ही ‘‘मथुरा वेस्ट प्राॅसेसिंग लिमिटेड’’ नामक कंपनी को यह ठेका दिया गया कि वो हर वार्ड से घर-घर से रिक्शे द्वारा कचरा इकðा करे तथा उसे यमुनापार इलाके में आवंटित जगह पर ला कर उस से खाद, बिजली, ईंटें आदि बनाए। इसी के चलते तब शहर भर से जेनर्म योजना के तहत लाए गए सैंकड़ों कूड़ेदान उठवा लिए गए थे, जो अब तक वापस अपनी जगह पर नहीं रखे गए हैं। इस कंपनी का कचरा कलैक्शन कुछ दिन चला और फिर जो कुछ हुआ उसे अब तक यमुनापार वासी भोग रहे हैं। स्थानीय नागरिक इस समस्या के समाधान की मांग कई बार प्रशासन से कर चुके हैं किंतु उन्हें अब तक राहत नहीं मिली है।

करोड़ों के वाहन बन गए हैं कबाड़
इस रिसाइकिलिंग प्लान्ट तक शहर भर के कचरे को लाने के लिए जेनर्म योजना के तहत करोड़ों रुपए के वाहन खरीदे गए थे जो अनदेखी के चलते कबाड़ बन चुके हैं। यूपी में नई सरकार बने भी करीब सात महीने हो चुके हैं मगर अब तक इन वाहनों की सुध नहीं ली गई है। पूर्ण संभव है कि नए वाहनों की खरीद और उनके प्रबंधन के लिए एक बार फिर से जनता के टैक्स की रकम का दुरुपयोग किया जाएगा।
इंकलाबी नौजवान सभा ने चलाया हस्ताक्षर अभियान
मामले की गंभीरता को समझते हुए इंकलाबी नौजवान सभा के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने 3 अक्टूबर को इस क्षेत्र के सैंकड़ों निवासियों के बीच हस्ताक्षर अभियान चलाया और जगह-जगह नुक्कड़ सभा आयोजित कर उनकी समस्याओं को लिपिबद्ध किया।

DM को सौंपा ज्ञापन
इसी क्रम में इंकलाबी नौजवान सभा के प्रतिनिधियों ने 5 अक्टूबर को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंप कर उन्हें समस्या से अवगत किया। जिलाधिकारी महोदय ने जल्द ही उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया किंतु फिर भी अगले चैबीस घंटों के दौरान ज्वालामुखी की तरह सुलगते इस हजारों टन कूड़े को बुझाने के लिए दमकल की कोई गाड़ी नहीं पहुंची जिससे पता चलता है कि प्रशासन इस मामले को कितने हल्के में ले रहा है।

शनिवार को बनेगी मानव श्रंखला
अपनी समस्या को प्रकाश में लाने तथा प्रशासन सहित शहर के अन्य निवासियों का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से पीडित परिवार व इंकलाबी नौजवान सभा के सदस्य कल यानि शनिवार को सुबह लक्ष्मीनगर तिराहे पर मानव श्रंखला बनाएँगे।

ये हैं माँगें

रिसाइकिलिंग प्लान्ट को यमुनापार के आबादी क्षेत्र से दूर कहीं निर्जन स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।

कचरे में लगी आग को तुरंत बुझा कर मथुरा के ठोस कचरे को घर-घर से इकट्ठा करने, रिसाइकिल करने और उसके उचित प्रबंधन की प्रक्रिया सरकारी नियंत्रण में तुरंत शुरु की जाए।

इस पूरी प्रक्रिया में मथुरा, खास कर यमुनापार क्षेत्र के नौजवानों को सम्मानजनक रोजगार देने की गारंटी की जाए।