मेडिकल साइंस भी कहती है- ‘जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन’

आपका मिजाज दिन भर कैसा रहता है, इसका सीधा संबंध आपके भोजन से है। अगर आप यह सोच कर परेशान हैं कि दिन कैसा रहेगा तो इस सबसे निजात दिलाने का मंत्र आपके फ्रिज में रखे खाद्य पदार्थों में छिपा हुआ है।
मेडिकल साइंस भी ‘जैसा खाए अन्न, वैसा होए मन’ जैसे विचार पर चलने को कहता है। कई तरह की बीमारियों के इलाज के लिए मेडिकल साइंस ‘पोषण संबंधी मनोचिकित्सा’ का प्रयोग बढ़ा रहा है।
मानसिक बीमारियां से बचाता है हैप्‍पी डायट
कई चिकित्सा परामर्शदाताओं और शोधकर्ताओं ने कहा कि ‘हैप्‍पी डायट’ लेने से डिप्रेशन, ऐंग्जाइटी, पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) और अन्य चिकित्सीय बीमारियों से बचाने और उनके इलाज में कारगर हो सकता है। गुड़गांव के पारस अस्पताल की डॉक्टर ने बताया कि खराब पोषण मानसिक रोग होने का बड़ा कारण है। शोधकर्ता डॉ. एलेक्स कोर्ब के मुताबिक भोजन मिलने की उम्मीद से दिमाग डोपामाइन नामक रसायन का उत्सर्जन करने लगता है, जो हमें हैपी जोन में ले जाता है।
आखिर क्या हैप्‍पी फूड?
पोषण विशेषज्ञ कहते हैं कि विटामिन, मिनरल्स व फैटी एसिड युक्त हैप्‍पी फूड दिमाग की कार्यप्रणाली चुस्त रखते हैं। ये तनाव और डिप्रेशन से राहत दिलाते हैं। ‘हैप्‍पी डायट’ में गोभी, पत्तागोभी, पालक जैसी हरी सब्जियों के अलावा ब्रॉकली, मशरूम, लाल/पीली शिमला मिर्च, प्याज, ओरिगैनो और विटामिन युक्त फल जैसे बैरीज, सेब, संतरा, आड़ू और नाशपाती शामिल होता है। वहीं प्रोटीन के लिए अंडा, चीज, चिकन, मछली लिया जा सकता है जबकि सूक्ष्म पोषक तत्वों में बादाम-पिस्ता आदि आते हैं।
अच्छी संगत भी जरूरी
कई अन्य बातें भी भोजन को खुशी का जरिया बनाती हैं। जैसे परोसा गया भोजन खास आपके लिए है। भोजन परोसने वाले का अंदाज आत्मीय और मनुहार भरा हो। अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रीशन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक ‘हैप्‍पी फूड’ के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि भोजन करते वक्त आपके साथ आपके प्रिय मित्र, पति/पत्नी या परिवार के ऐसे सदस्य हों, जिनका साथ आपको अच्छा लगता हो।
पूरा ध्यान भोजन पर हो
भोजन करते वक्त ज्यादातर लोग खाने पर ध्यान कम देते हैं और टीवी या मोबाइल पर ज्यादा। लिवरपूल यूनिवर्सिटी, लंदन के शोधकर्ता और मनोवैज्ञानिक डॉ. एरिक रॉबिंसन कहते हैं कि टीवी देखते हुए या अन्य कार्य में व्यस्त रहते हुए भोजन करने से एकाग्रता, याददाश्त और सावधानी पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इस प्रकार का भोजन वजन बढ़ाता है और मन को खुशी नहीं देता है।
-एजेंसियां

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