संस्कृति विवि के मैकेनिकल विभाग ने तैयार की बांस की साइकिल

मथुरा। संस्कृति स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के मैकेनिकल के छात्रों ने बांस की साइकिल बनाकर एक उपयोगी नया अविष्कार किया है। विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई यह बांस की साइकिल बहुत हल्की, मजबूत तथा टिकाऊ है और बाजार में उपलब्ध साइकिलों की कीमत से भी कम कीमत में तैयार हुई है।

संस्कृति स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष विंसेट बालू ने बताया कि विभाग की टीम लंबे समय से महंगी होती जा रही परंपरागत साइकिल का विकल्प खोज रही थी। लगातार मनन करने के बाद टीम को विकल्प के रूप में बांस से साइकिल बनाने का इनोवेटिव आइडिया मिला। अपने इस आइडिया को हकीकत में बदलने के लिए टीम के सदस्य जुट गए और एक सुंदर, मजबूत, हल्की और टिकाऊ साइकिल तैयार कर दी। यह साइकिल बाजार में उपलब्ध साइकिल की कीमत की तुलना में बहुत सस्ती भी है। यह अविष्कार जनसामान्य के लिए एक वरदान साबित हो सकता है। विभागाध्यक्ष बालू ने बताया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग की टीम ने लगातार एक महीने के अथक परिश्रम से इसको तैयार किया है और सुंदर रूप दिया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से ईको फ्रेंडली साइकिल है। ऐसे उपयोगी अविष्कार ही हमारे देश की पहचान बनेंगे।

संस्कृति इंजीनिरिंग विभाग के छात्रों द्वारा बनाई गई बैंबू साइकिल का निरीक्षण करते हुए संस्कृति विवि के कुलाधिपति सचिन गुप्ता ने बंबू साइकिल तैयार करने वाली मैकेनिकल इंजीनियरिंग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि हमारी एक छोटी सी सोच दुनिया को अनेक ऐसे विकल्प दे सकती है जिससे उनकी जीवन शैली में बड़ा बदलाव आ सकता है। उन्होंने मौजूद शिक्षकों से कहा कि आप सभी अपने आइडिया पर शोध करिए और इतना श्रम करिए जिससे आपका आइडिया मूर्त रूप ले सके। उन्होंने कहा कि एमएसएमई के सहयोग से हमको प्रोजेक्ट तैयार करने और उसपर काम करने की अनुमति मिल चुकी है। सरकार से प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक मदद भी मिलेगी।

विवि के कुलपति प्रोफेसर सीएस दुबे ने सभी शिक्षकों को शोध पत्र और नवोन्मेष के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में इसके लिए मजबूत व्यवस्था दी है। सभी शिक्षक समय से अपना शोध कार्य पूरा करें ताकि वे अपना और विवि का नाम विश्वपटल पर अंकित कर सकें।

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