निलंबित बसपा विधायकों से अखिलेश की मुलाकात पर भड़कीं मायावती

लखनऊ। 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है.
मंगलवार को ख़बर आई कि बहुजन समाज पार्टी के पाँच से ज़्यादा विधायकों ने समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाक़ात की है.
इस बैठक के बाद अटकलें शुरू हो गईं कि ये विधायक समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं. हालाँकि इन विधायकों को बीएसपी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी से अक्टूबर 2020 में ही निलंबित कर दिया था.
ये विधायक हैं- असलम अली, हरगोविंद भार्गव, मोहम्मद मुज्तबा सिद्दीक़ी, हाकिम लाल बिंद, मोहम्मद असलम राइनी, सुषमा पटेल और वंदना सिंह.
इस मुलाक़ात को समाजवादी पार्टी और बीएसपी के निलंबित विधायकों ने सार्वजनिक नहीं किया है. कहा जा रहा है कि इन सात विधायकों में पाँच ने अखिलेश यादव से मुलाक़ात की है. ये विधायक यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के बाद समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं.
मायावती ने मीडिया में चल रही इन मुलाक़ातों की ख़बरों को लेकर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया है.
मायावती ने बुधावार को ट्वीट कर कहा, ”घृणित जोड़तोड़, द्वेष और जातिवाद की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी मीडिया के सहारे यह प्रचारित कर रही है कि बीएसपी के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं. यह बात घोर छलावा है.”
मायावती ने अपने ट्वीट में कहा है, ”जिन विधायकों के सपा में शामिल होने की बात कही जा रही है, उन्हें काफ़ी पहले ही राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के के मामले में बीएसपी से निलंबित किया जा चुका है.’’
‘सपा में इन निलंबित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती. इनको यह मालूम है कि बीएसपी के इन विधायकों को लिया तो सपा में बग़ावत होगी क्योंकि कई लोग बीएसपी में आने को आतुर हैं.”
मायावती ने कहा, ”जगज़ाहिर तौर पर सपा चाल, चरित्र और चेहरा के मामले में दलित-विरोधी रही है. इसमें सुधार के लिए वह तैयार नहीं है. इसी कारण सपा सरकार में बीएसपी सरकार के जनहित के कामों को बंद किया और भदोई को नया संत रविदास नगर ज़िला बनाने को भी बदल डाला.’’
‘वैसे बीएसपी के निलंबित विधायकों से मिलने का मीडिया में प्रचारित करने के लिए कल किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज़्यादा लगती है.”
-एजेंसियां

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