मथुरा: मनोनीत पार्षदों के ‘शपथ ग्रहण’ समारोह को लगा ग्रहण, निगम कर्मचारी के कोराना पॉजिटिव निकलने से मचा हड़कंप

Oath-taking-ceremony
Oath-taking-ceremony in MATHURA Nagar nigam Office

मथुरा। कोरोना जैसी विश्‍वव्‍यापी महामारी के बीच कल आयोजित किए गए मनोनीत पार्षदों के ‘शपथ ग्रहण’ समारोह को तब ‘ग्रहण’ लग गया जब समारोह में शामिल हुए नगर निगम के एक कर्मचारी की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव निकल आई।
चिंता का विषय यह है कि इस शपथ ग्रहण समारोह में न सिर्फ नगर निगम के महापौर मुकेश आर्यबंधु शामिल थे बल्‍कि निगम के तमाम अधिकारी एवं कर्मचारियों सहित एक विधायक और कई मीडियाकर्मी भी मौजूद रहे।
बताया जाता है कि गांव फालेन निवासी उक्‍त कर्मचारी की तबीयत खराब होने पर कुछ समय पहले इसका कोरोना जांच भेजी गई थी, जो पेंडिग थी।
कर्मचारी की रिपोर्ट पेंडिंग होने की जानकारी नगर निगम के दूसरे कर्मचारियों को भी थी, बावजूद इसके उसे कार्यालय बुलाकर काम कराया गया लिहाजा वह शपथ ग्रहण समारोह में भी उपस्‍थित रहा।
आश्‍चर्य की बात यह है कि जिन अधिकारियों पर कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्‍टेंसिंग रखने व रखाने तथा खुद मास्‍क पहन कर सभी को मास्‍क का इस्‍तेमाल करने का संदेश देने की जिम्‍मेदारी है, वह भी इस शपथ ग्रहण समारोह में शासन-प्रशासन के आदेश-निर्देशों की धज्‍जियां उड़ाते देखे गए।
हालांकि महापौर डॉ. मुकेश आर्यबंधु ने भीड़ के पहुंचने, सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन न हो पाने तथा बहुत से लोगों द्वारा मास्‍क भी न लगाए जाने पर दुख व्‍यक्‍त करते हुए कहा है कि बिन बुलाए मेहमानों के आ जाने से स्‍थिति बिगड़ गई।
महापौर मुकेश आर्यबंधु चाहे कुछ भी कहें और कैसी भी सफाई दें लेकिन इसमें तो कोई दोराय नहीं कि जो कुछ नजारा वहां पेश हुआ, उसके लिए जिम्‍मेदार भी नगर निगम की अव्‍यवस्‍थाएं ही रहीं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कल इस शपथ ग्रहण समारोह में शामिल सभी लोगों की क्‍या कोई लिस्‍ट नगर निगम अथवा जिला प्रशासन की ओर से बनाई गई है या फिर सब-कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
चूंकि कोरोना संक्रमित पाया गया कर्मचारी कार्यक्रम में मौजूद था और अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित पत्रकारों तथा जनप्रतिनिधियों के बीच घूमता रहा इसलिए समस्‍या बड़ी हो जाती है। दूसरी ओर सहायक नगर आयुक्‍त राजकुमार मित्तल ने कोरोना संक्रमित कर्मचारी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने से इंकार करते हुए बताया है कि कर्मचारी के संपर्क में रहे 16 अन्‍य कर्मचारियों को चिन्‍हित कर उन्‍हें होम क्‍वारंटीन होने के निर्देश दिए गए हैं परंतु उन्‍होंने इस बारे में कुछ नहीं कहा कि शपथ ग्रहण समारोह में महामारी से बचाव के उपायों की धज्‍जियां क्‍यों उड़ीं और उनके लिए कौन-कौन जिम्‍मेदार है।
इस संबंध में जानकारी करने पर पता लगा कि नगर निगम के कर्मचारी की रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी होने के बाद एक ओर जहां नगर निगम के कार्यालय को सेनेटाइज कराया गया है वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारियों ने भी अपनी जांच के लिए सैंपल देर खुद को क्वारंटाइन कर लिया है किंतु आयोजन में शिरकत करने वाले बाकी लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया है जिनमें कई मीडियाकर्मी भी शामिल हैं।
हो सकता है कि शपथ ग्रहण समारोह का हिस्‍सा रहे विधायक जी भी अपनी जांच का बंदोबस्‍त करके खुद को क्वारंटाइन कर लें किंतु उन मीडियाकर्मियों की सुध कौन लेगा जो हर कार्यक्रम में बिन बुलाए बराती की तरह होते हैं और चाहे-अनचाहे उन्‍हें वहां जाना भी पड़ता है।
नियम-कायदे और कानून की बात की जाए तो जिला प्रशासन को ऐसे सभी लोगों पर कार्यवाही करनी चाहिए जिन्‍होंने सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन नहीं किया और जिन्‍होंने महामारी कानून को ताक पर रखकर महामारी फैलाने की कोशिश की। फिर चाहे वो लोग किसी स्‍तर के अधिकारी हों, कर्मचारी अथवा जनप्रतिनिधि क्‍योंकि यदि ऐसा नहीं किया जाता तो तय है कि भविष्‍य में भी ऐसे कार्यक्रमों पर अंकुश लगाना मुश्‍किल हो जाएगा।
-Legend News

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