राजकिशोर भारती की मौत के मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे, सामान्‍य सड़क दुर्घटना होने पर परिजनों को भी संदेह

मथुरा। वृंदावन के प्रतिष्‍ठित व्‍यवसायी और भारती ग्रुप के मालिक राजकिशोर भारती की कथित सड़क हादसे में मौत के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इन खुलासों के बाद राजकिशोर भारती की मौत का कारण सामान्‍य सड़क हादसा नहीं माना जा सकता।
राजकिशोर भारती के भाई गिरीश भारती का भी कहना है कि हालात किसी बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि वो फिलहाल इस ओर ध्‍यान केंद्रित करने की स्‍थिति में नहीं हैं परंतु इतना अवश्‍य कहते हैं कि मेरे भाई की मौत न तो सामान्‍य सड़क दुर्घटना है और न वो आत्‍महत्‍या है जैसा कि एक ‘वायरल ऑडियो’ के जरिए साबित करने की कोशिश की जा रही है।
उल्‍लेखनीय है कि राजकिशोर भारती की आकस्‍मिक मौत का कारण शुरू में यही बताया गया कि 14 तारीख की रात जब वह अपनी पुत्री की शादी के कार्ड बांटकर लौट रहे थे तब मथुरा-भरतपुर मार्ग पर अज्ञात वाहन ने उनकी गाड़ी में टक्‍कर मार दी जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

यहां सुन सकते हैं विष्‍णु और राजकिशोर भारती के बीच हुई बातचीत का वायरल किया गया ऑडियो

राजकिशोर भारती की सड़क दुर्घटना में मौत का समाचार अभी लोगों तक पहुंचा ही था कि अचानक एक ‘ऑडियो’ सोशल मीडिया पर वायरल होता है और उसमें राजकिशोर भारती यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि वह अपने भाई से प्रताड़ित हैं और अब उनकी जीने की कोई इच्‍छा नहीं है। वह मरने जा रहे हैं।
इस ऑडियो में विष्‍णु नाम का कोई शख्‍स राजकिशोर भारती से फोन पर बात करता है और कहता है कि ‘भइया’ का तो फोन लग नहीं रहा, आप अपने नंबर से मिला लो।
राजकिशोर भारती को ‘चाचाजी’ संबोधित करने वाला विष्‍णु उनसे यह भी कहता है कि वैसे ‘भइया’ अभी सनसिटी के ग्राउंड पर पहुंचने वाले हैं, मै भी वहां जा रहा हूं। कोई बात हो तो मुझे बता दो, मैं कह दूंगा।
उधर से राजकिशोर भारती कहते हैं कि मैं तो बाहर निकल गया हूं। इस पर विष्‍णु कहता है कि ऐसी बेवकूफी क्‍यों कर रहे हो, बाहर क्‍यों जा रहे हो। पता नहीं ‘मोनू भइया’ का फोन क्‍यों नहीं लग रहा, आप कहोगे तो मैं मोनू भइया को आपके पास लेकर आ जाऊंगा।
इस बीच राजकिशोर भारती बताते हैं कि उनकी बहुत बेइज्‍जती हुई है, उनको कई लोगों के सामने जूतों से मारा गया है।
बहरहाल, इस ऑडियो को बनाने और उसे वायरल किए जाने के टाइमिंग से बहुत से सवाल खड़े होते हैं।
सवाल नंबर एक: जिस विष्‍णु नामक शख्‍स ने राजिकशोर भारती से उनके मोबाइल फोन पर हुई अपनी बातचीत को रिकॉर्ड किया है, उसका इसे रिकॉर्ड करने का मकसद क्‍या था ?
सवाल नंबर दो: राजकिशोर भारती द्वारा यह बताए जाने पर कि वो तो बाहर निकल रहे हैं, विष्‍णु उनसे क्‍यों कहता है कि ऐसी ‘बेवकूफी’ क्‍यों कर रहे हो, कहोगे तो मोनू भइया को लेकर मैं आपके पास आ जाऊंगा। सारी बात बैठकर हो जाएंगी?
सवाल नंबर तीन: राजकिशोर भारती द्वारा जान देने की बात कहने पर भी विष्‍णु ने इसकी जानकारी उनके परिजनों को क्‍यों नहीं दी जबकि वह पूरे भारती परिवार से भलीभांति परिचित बताया जाता है और सबके मोबाइल नंबर भी उसके पास बताए गए हैं?
चौथा और सबसे महत्‍वपूर्ण सवाल: विष्‍णु ने राजिकशोर भारती से हुई अपनी बातचीत की जानकारी जब उसी वक्‍त किसी को नहीं दी, तो उनकी मौत के बाद उसे वह बातचीत वायरल करने की जरूरत क्‍यों पड़ गई?
इन सब बातों के उत्तर जानने की कोशिश की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
सबसे पहले तो यह पता लगा कि विष्‍णु जिस व्‍यक्‍ति को ‘भइया या मोनू भइया’ कह रहा है और जिन्‍हें राजकिशोर भारती के पास लाने की बात कर रहा है वो कोई मेघश्‍याम वार्ष्‍णेय हैं जिनकी भारती परिवार से न केवल काफी निकटता रही थी बल्‍कि लेन-देन भी था।
राजकिशोर भारती के भाई गिरीश भारती के मुताबिक उनके मेघश्‍याम वार्ष्‍णेय के ऊपर अभी भी करीब चार करोड़ रुपए बकाया हैं और घर में बेटी की शादी होने के कारण उन्‍हीं रुपयों का तकादा राजकिशोर भारती मेघश्‍याम वार्ष्‍णेय से कर रहे थे, लेकिन मेघश्‍याम वार्ष्‍णेय उन्‍हें पैसा वापस देने की बजाय मेरे प्रति भड़का रहा था।
राजकिशोर भारती इसीलिए विष्‍णु से यह कहते सुनाई देते हैं कि उसने (छोटे भाई ने) मेरी बहुत बेइज्‍जती की है सब लोगों के सामने, मैं जीना नहीं चाहता।
इस बारे में गिरीश भारती बताते हैं कि दरअसल घर में शादी के वक्‍त पैसों की जरूरत के कारण मैं भाईसाहब पर मेघश्‍याम से पैसे मांगने को कह रहा था और उनके इस मामले में ढीले रवैये को देखकर चिंतित था, इसलिए वह परेशान जरूर थे किंतु जान देने जैसी कोई बात हो ही नहीं सकती।
गिरीश भारती के अनुसार राजकिशोर भारती बहुत सीधे और धर्मभीरू इंसान थे इसलिए वह परेशान तो हो जाते थे किंतु उनके द्वारा आत्‍महत्‍या किए जाने का कोई सवाल पैदा नहीं होता।
फोन पर विष्‍णु से जान दे देने की बात कहने के बारे में भी गिरीश भारती कहते हैं कि यदि किसी सूरत में एकबार को उनके द्वारा जान देने की बात मान भी ली जाए तो उनके पास अपनी लाइसेंसी रिवॉल्‍वर थी, उससे जान दे सकते थे। किसी अन्‍य की गाड़ी मांगकर दूसरे वाहन से उसे टकराकर जान देने की बात किसी तरह गले नहीं उतरती।
गिरीश भारती का कहना है कि फोन करने वाला विष्‍णु हमारे पूरे परिवार से भली भांति वाकिफ है लेकिन वह मेघश्‍याम वार्ष्‍णेय के काफी निकट है। उसने भाईसाहब को फोन भी यह बताने के लिए किया कि मेघश्‍याम की उससे बात नहीं हो पा रही, फोन नहीं लग रहा, भाईसाहब खुद बात कर लें।
गिरीश भारती यह भी कहते हैं कि विष्‍णु का अचानक फोन पर भाईसाहब से यह पूछने लगना कि फिर मैं भइया (मेघश्‍याम वार्ष्‍णेय) से क्‍या कह दूं। उनसे तो कोई बात नहीं है। वो मेरी बात का भरोसा कैसे करेंगे कि आप ऐसा कह रहे हैं, यह सारी बातें स्‍पष्‍ट करती हैं कि बातचीत किसी खास मकसद से और किसी को कन्‍वेंस करने के लिए रिकॉर्ड की गई थी ताकि यह साबित किया जा सके कि भाईसाहब की मेघश्‍याम के प्रति तो कोई नाराजगी नहीं थी, लेकिन मेरे व्‍यवहार से बहुत दुखी थे।
गिरीश भारती ने वायरल ऑडियो में राजकिशोर भारती द्वारा कही गई हर बात का जवाब दिया और बताया कि कोई भी पता कर सकता है कि भाईसाहब जिस जमीन को मेरे नाम किए जाने का जिक्र कर रहे थे, वह जमीन आज भी उन्‍हीं के नाम है। इसके अलावा भी उनके एक-एक पैसे का हिसाब नंबर एक में है इसलिए बेईमानी का सवाल ही पैदा नहीं होता।
सच तो यह है कि मेघश्‍याम वार्ष्‍णेय ने उन्‍हें हमारे प्रति इसलिए भड़काया जिससे वह पारिवारिक कलह का लाभ उठाकर हमारा पैसा हड़प सके।
गिरीश भारती का तो यहां तक कहना है कि जिस समय विष्‍णु द्वारा भाईसाहब से बात की जा रही थी, उस समय भी मेघश्‍याम उसी के साथ था और इसकी पुष्‍टि दोनों के मोबाइल नंबरों की उस वक्‍त की लोकेशन ट्रेस करके आसानी से की जा सकती है। यानी मेघश्‍याम खुद अपने सामने विष्‍णु की राजिकशोर भारती से बात करा रहा था।
गिरीश भारती ने बताया कि कुछ वर्षों पहले भारती परिवार के साथ नीरज अग्रवाल पुत्र नारायण दास अग्रवाल भट्टे वाले आदि कई लोगों ने जमीनों का व्‍यवसाय, ग्रुप बनाकर शुरू किया था। इसी ग्रुप में मेघश्‍याम वार्ष्‍णेय भी शामिल था। किसी सौदे में विश्‍वास टूटने के कारण मेघश्‍याम को इस ग्रुप से बाहर कर दिया गया किंतु मेघश्‍याम के नाम कई जमीनों की रजिस्‍ट्री थीं इसलिए उनका विवाद बना रहा।
नीरज अग्रवाल का इस संबंध में कहना था कि उनकी तीन जमीनें मेघश्‍याम के नाम थीं जिनमें से एक का हिसाब पिछले दिनों पंच-पंचायत के माध्‍यम से हो गया किंतु दो जमीनों का हिसाब होना बाकी है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन मेघश्‍याम कोई न कोई बहाना बनाकर टालता रहा है।
नीरज अग्रवाल ने बताया इन्‍हीं विवादों के चलते मेघश्‍याम ने उनके खिलाफ मई 2018 में एक के बाद एक दो एफआईआर दर्ज कराईं किंतु जांच के बाद पुलिस ने एक को एक्‍सपंज कर दिया और दूसरी में फाइनल रिपोर्ट लगा दी ।
गिरीश भारती के मुताबिक, चूंकि नीरज अग्रवाल और उन्‍होंने मेघश्‍याम पर इसके बाद भी हिसाब करने के लिए दबाव बनाना नहीं छोड़ा और वृंदावन व मथुरा के कई सभ्रांत लोगों को बैठाकर पंचायत भी कराई इसलिए मेघश्‍याम खुद को काफी असहज महसूस कर रहा था।
मेघश्‍याम इस कारण लगातार भाईसाहब को परिवार के प्रति भड़काने का काम कर रहा था, तथा जब उसे लगने लगा कि वह अपने मकसद में सफल हो रहा है तो उसने विष्‍णु के साथ उनकी बातचीत रिकॉर्ड कराकर यह साबित करने की कोशिश की है कि भाईसाहब हमसे बहुत परेशान थे और इसलिए जान देने पर आमादा थे।
यह भी पता लगा है कि विष्‍णु से जब किसी ने राजकिशोर भारती के साथ हुई बातचीत रिकॉर्ड करने तथा उसे उनकी मौत के बाद वायरल करने का कारण जानना चाहा तो उसने कहा कि बातचीत तो मैंने वैसे ही रिकॉर्ड कर ली थी, रही बात उसे वायरल करने की तो मैंने उसे मेघश्‍याम भइया को दे दिया था। उन्‍होंने उसे क्‍यों व किस मकसद से वायरल किया, यह मुझे नहीं मालूम।
जो भी हो लेकिन इतना तो तय है कि जिस तरह किसी का गुस्‍से में यह कह देना कि मैं तुझे मार दूंगा, सच नहीं होता उसी तरह राजकिशोर भारती द्वारा जान दे देने की बात कहना, सच हो यह जरूरी नहीं।
यूं भी ऑडियो वायरल होने से पहले तक उनकी मौत का कारण सड़क दुर्घटना ही माना जा रहा था परंतु ऑडियो में उनके द्वारा जान दे देने की बात एक ओर जहां पारिवारिक विवाद साबित करने की कोशिश है तो दूसरी ओर उसकी टाइमिंग और परिवारीजनों तक को उससे छिपा कर रखना यह बताने के लिए पर्याप्‍त है कि हो न हो राजकिशोर भारती की मौत के पीछे का सच कुछ और ही हो। कुछ ऐसा जिसके जरिए कई निशाने साधे गए और कई को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
जहां तक विष्‍णु का सवाल है तो उसका यह कहना शायद ही किसी के गले उतरे कि उसने यूं ही बातचीत रिकॉर्ड कर ली थी और यूं ही उसे मेघश्‍याम को दे दिया।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्‍या सबकुछ यूं ही होता रहा और मेघश्‍याम ने भी बातचीत का ऑडियो यूं ही वायरल कर दिया, वो भी राजकिशोर भारती की मौत के बाद।
विष्‍णु की राजिकशोर भारती से हुई बातचीत यह भी समझा देती है कि वह न केवल दोनों पक्षों का राजदार है बल्‍कि मेघश्‍याम का विश्‍वासपात्र भी है। यदि ऐसा नहीं होता तो ‘यूं ही रिकॉर्ड’ की गई इतनी गंभीर बातचीत को मेघश्‍याम के सुपुर्द क्‍यों कर देता ?
– Legend News

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